“हमें सूचना मिली थी कि केरन, तंगधार व नौगाम सेक्टरों के विपरीत पीओके इलाके में आतंकवादी शिविर चल रहे हैं। इन्हें निशाना बनाया गया और उनका समर्थन करने वाले लोग, पाकिस्तानी चौकियाँ भी हमारी जवाबी कार्रवाई की जद में आए।”
"आर्टिकल 370 के खत्म होने के बाद से कहा जा रहा है कि प्रदेश की नौकरियाँ बाहरी राज्यों के लोगों को मिल जाएँगी। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जम्मू-कश्मीर में उत्पन्न होने वाली हर एक नौकरी स्थानीय लोगों को ही दी जाएगी।"
घुसपैठ में नाकाम रहने पर पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए भारी गोलाबारी की। सेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। घाटी के लोगों ने भी पाकिस्तान को मुॅंहतोड़ जवाब देने की अपील की है।
दक्षिणी कश्मीर में पिछले 48 घंटों में यह तीसरी घटना है, जिनमें आतंकियों ने दहशत फैलाने के मंशा से हमले किए। इन तीन घटनाओं में जम्मू-कश्मीर के बाहर के तीन लोग संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा मारे गए। सोमवार (14 अक्टूबर) की रात शोपियां के शिरमाल के सुंधु गाँव में राजस्थान के एक ट्रक चालक शेरी ख़ान की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
जम्मू-कश्मीर के हालत को लेकर ख़ुफ़िया रिपोर्ट की मानें तो कश्मीर में इस्लामिक आतंकवादी संगठन हमला कर सकता है।
यही वजह है कि कश्मीर पर भारत सरकार और सेना दोनों कड़ी नज़र रखे हुए हैं।
सुरक्षाबलों की ओर शुरू किये गए घेराबंदी एवं तलाशी अभियान के वक़्त मुठभेड़ हो गई जिसमें सुरक्षाबलों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया है। वहीं शांति और स्थिरता की स्थिति बनाए रखने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके के प्रमुख दंगाई हयात अहमद भट को भी गिरफ्तार कर लिया है।
सुरैया और साफिया के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में शामिल महिलाएँ जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेश में बाँटने का विरोध कर रही थीं। फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला पहले से ही हिरासत में हैं।
फलों से भरे ट्रकों की आवाजाही शुरू होने से हताश आतंकवादियों ने शीरमाल गाँव में हमला किया। आतंकियों की फायरिंग में ट्रक ड्राइवर शरीफ खान की मौक़े पर मौत हो गई। घटना में शामिल एक आतंकवादी पाकिस्तानी बताया जा रहा है।
“हम यहाँ स्थानीय लोगों से मिले और किसी भी व्यक्ति ने मानव अधिकारों का उल्लंघन होने की बात नहीं कही। पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा झूठा था। हाँ, यहाँ मूलभूत सेवाएँ जैसे फोन पर प्रतिबंध लगा था। लेकिन जब बड़े कदम उठाए जाते हैं तो इस तरह के निर्देश जारी किए जाते हैं।”
पीएमएसएसएस के तहत स्नातक में दाखिला लेने वाले बच्चों में से 2,400 जम्मू और 1,474 कश्मीर से हैं। शेष लद्दाख से हैं। इस वर्ष जम्मू-कश्मीर के सबसे अधिक बच्चों ने महाराष्ट्र में दाखिला लिया है। इसके बाद दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश का नंबर है।