डेढ़ साल की थीं भाषा सुंबली जब अपनी माँ की गोद में रहते हुए उन्हें कश्मीर घाटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। 19 जनवरी 1990 की उस भयावह रात को अब 31 साल बीत गए हैं।
रिपोर्ट से आतंकियों को कश्मीर जाने के लिए 2000 डॉलर की राशि देने की बात भी सामने आई है। आतंकियों को कहा जा रहा है कि कश्मीर भी उतना ही पहाड़ी है जितना आर्मीनिया का नार्गोनो काराबाख है।
इस नोट में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके), गिलगित-बाल्टिस्तान समेत पूरे जम्मू-कश्मीर को अलग देश के रूप में दिखाया गया था, जोकि भारत के लिए बिल्कुल बर्दाश्त से बाहर था।
"कॉन्ग्रेस सदैव राष्ट्रीय अस्मिता के साथ खिलवाड़ करती रही है और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से उन तत्वों को प्रोत्साहित करती रही है, जो देश के अंदर अलगाववाद और अराजकता को बढ़ावा देते हैं।"