कॉन्ग्रेस की तरफ से भी उपमुख्यमंत्री पद की माँग। कॉन्ग्रेस के बालासाहेब थोराट राज्य के नए उप मुख्यमंत्री हो सकते हैं। उधर अजित पवार भी मुँह फुलाए बैठे हैं। NCP अपने हाथ से डिप्टी CM पद जाने नहीं देना चाहती। उद्धव ठाकरे के फ्लोर टेस्ट से पहले महा-ड्रामा!
पूरे दिन प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के रेप और हत्या की खबरों से मीडिया और सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा उबलता रहा, वहीं रात होते-होते एक और हृदयविदारक खबर आई है कि उसी इलाके में, उसी थाना क्षेत्र में एक और महिला की अधजली लाश मिली है।
"मुझे इस घटना का दुख है। लेकिन ये दुर्भाग्य की बात है कि पीड़िता एक डॉक्टर थी, पढ़ी-लिखी थी, फिर भी उसने ऐसे समय में पहले अपनी बहन को कॉल क्यों किया? उसने 100 नंबर पर कॉल क्यों नहीं किया। अगर वो 100 नंबर पर कॉल करती तो शायद उसे बचाया जा सकता था।"
"मुस्लिमों के लिए एक देश बनाया गया है- पाकिस्तान। मगर भारत में ऐसा नहीं है, और अगर भारत में ऐसा है तो सिर्फ बहुसंख्यक हिन्दुओं की वजह से। भारत को हिन्दू जैसे धर्म की जरूरत है। अगर भारत सेक्युलर है तो हिन्दू की वजह से।"
हैदराबाद के प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) हत्याकांड को तेलंगाना पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। उनके मुताबिक गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद पाशा और अन्य तीन बहुत दिन से प्रीति के साथ बलात्कार करने की योजना बना रहे थे और टोल प्लाजा पर खड़ी पीड़िता की स्कूटी को भी उन्होंने जानबूझकर पंचर किया था।
बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी से मुंबई में माहौल गर्माने के साथ-साथ सियासी समीकरण भी बिगड़े थे। तब शिवसेना प्रमुख के ख़िलाफ़ व्यक्तिगत प्रतिशोध के रूप में भुजबल को ही दोषी ठहराया गया था। बाल ठाकरे की गिरफ़्तारी शिवसेना के लिए एक भावनात्मक मुद्दा रहा है। पार्टी बार-बार इस घटना के लिए एनसीपी से माफ़ी की माँग करती रही लेकिन अब...
प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की स्कूटी पंक्चर होती है... मदद के लिए कुछ लोग आते हैं... बहन को फोन करती है... थोड़ी देर में फोन स्विच ऑफ हो जाता है... अगले दिन आधी जली लाश मिलती है... लाश से 100 मीटर की दूरी पर अंडरवियर मिलता है... इन सारे बिंदुओं का कनेक्शन ढूँढने पर...
कॉन्ग्रेसी विधायक गोवर्धन दांगी ने अपनी मर्दवादी सोच के तहत एक महिला सांसद को धमकी दे डाली - "प्रज्ञा ठाकुर कभी आई तो उसका पुतला नहीं बल्कि उसे पूरा का पूरा जिंदा जला भी देंगे।"
देश के राइट विंग की यही समस्या है कि उसे दीर्घकालिक युद्ध भी लड़ना है, लेफ्ट विंग की स्वीकार्यता भी चाहिए और अपनी नैतिकता भी बचानी है। तुमने न तो संदर्भ देखा, न सुनवाई की, बस विरोधियों के जाल में उलझ कर तुमने साध्वी प्रज्ञा को एक लाइन में नकार दिया। यही सब करना था तो उसे चुनाव क्यों लड़वाया?