इस मामले में कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी नोटिस जारी किया है। अपने नोटिस के ज़रिए कोर्ट ने लोगों को पीने का साफ़ पानी और साफ़ हवा मुहैया न करा पाने पर मुआवज़ा देने की बात भी कही है।
ये कहानी है उस योद्धा की, जिसकी गाथा मारवाड़ में आज भी सुनाई जाती है। वो राठौड़, जिसके प्रताप से भयभीत होकर शाहजहाँ नंगे-पाँव अपने ही दरबार से भाग खड़ा हुआ। जिसकी वीरता देख मुगलों ने छल का सहारा लिया और प्रपंच की आड़ ली।
एक ज़माने में फ़िरोज़शाह तुगलक जब शिकार पर निकलते थे तो इसी महल में ठहरते थे। 1993 के बाद इस मालचा महल को लेकर कई जनश्रुतियाँ प्रचलित हुईं, जिनमे कहा गया कि इस महल में रहने वाली विलायत बेग़म ने हीरे को पीसकर निगल लिया और आत्म-हत्या कर ली।
वामपंथियों की पैदल सेना में सबसे ज्यादा लोग दिल्ली जैसी जगहों के कॉलेजों के नए बच्चे होते हैं। व्यवस्थित तरीके से उनके दिमाग में झूठ का सहारा ले कर खास धर्म और विचार के खिलाफ जहर भरा जाता है। रवीश और केजरीवाल से ले कर कामरा, राठी, बनर्जी, पीईंग ह्यूमन आदि इसकी पूरी योजना बनाते हैं।
कॉन्ग्रेस और शिवसेना के भीतर लड़ाई चल रही है। कॉन्ग्रेस का एक खेमा शुरुआत से ही शिवसेना के साथ जाने के हक में नहीं रहा है। पूर्व उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल ने अजित पवार को बताया है कि पार्टी में 30-35 ऐसे विधायक हैं, जो उनकी अनुपस्थिति में असहज महसूस कर रहे हैं। ये आँकड़ा बढ़ भी सकता है।
वह सरकार कितनी अनैतिक थी इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जो डिप्टी सीएम बना था, उसने सीएम की पार्टी से बगावत कर ही चुनाव जीता था। वे सीएम के बेटे को ही हराकर विधानसभा पहुॅंचे थे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अजित पवार ने 22 नवंबर को पत्र दिया था। पत्र में कहा गया था कि एनसीपी के सभी 54 विधायकों ने उन्हें नेता चुना है और सरकार बनाने के लिए अधिकृत किया है।
शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो सकती है राजनीतिक तस्वीर। अजित पवार को मनाने की कोशिश में जुटी एनसीपी। छगन भुजबल ने की मुलाकात। संसद में भी हंगामे के आसार।
शरद पवार 1978 में पार्टी तोड़ कर CM बने। 1988 में राजीव ने मुख्यमंत्री बनाया। 1990 में जोड़-तोड़ से सरकार बनाई। 1993 में तत्कालीन CM के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने। उन्होंने जो लिगेसी सेट की है, भतीजा उसका ही अनुसरण कर रहा है। मिलें अजित प्रकरण के अन्य किरदारों से।
शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी, तीनों दलों के विधायक अलग-अलग होटलों में रुके हुए हैं। उद्धव ठाकरे ने इन विधयकों से मुलाक़ात की। उन्होंने और शरद पवार ने एनसीपी विधायकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उनका ये गठबंधन लम्बे समय तक चलेगा।