कट्टरपंथी जमीयत नेता फजलुर रहमान ने सरकार के खिलाफ 27 अक्टूबर को मार्च का किया ऐलान। कहा, "यह जंग तब तक जारी रहेगी जब तक इमरान ख़ान की सरकार चली नहीं जाती। पूरे देश से लोगों का जनसैलाब मार्च में भाग लेने आ रहा है और फ़र्ज़ी शासक इसमें एक तिनके की तरह डूब जाएँगे।"
कॉन्ग्रेस में ओल्ड गार्ड और न्यू गार्ड की लड़ाई 2007 में राहुल के पार्टी महासचिव बनने के बाद ही शुरू हो गई थी। पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इनके सामने राहुल को सरेंडर करना पड़ा था। अब सोनिया की वापसी के साथ ही ओल्ड गार्ड हिसाब चुकता करने में लग गए हैं।
ख़ुफ़िया इनपुट्स के मुताबिक जैश कमांडर अबू उस्मान के नेटवर्क से जुड़ा मॉड्यूल दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाके में घुस अपने मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में है। इनका मकसद त्योहारों में भीड़भाड़ वाले इलाके में तबाही मचाना है। निशाने पर चार प्रमुख बाजार हैं।
जब हमले नहीं हों तो रवीश कहते हैं कि कश्मीरी संगीनों के साये में जी रहे हैं, उनकी आवाज़ दबाई जा रही है। जब आतंकी हमला होता है तो वह सरकार और सुरक्षा बलों को घेरते हैं। दोनों हाथों में लड्डू रखने के लिए मीठी आवाज़ में हर ख़बर में 'नौकरी' घुसेड़ देना ही काफ़ी है।
सोनिया गॉंधी ने कॉंन्ग्रेस की कमान संभालने के बाद तंवर को उनके पद से हटा कर पूर्व केंद्रीय मंत्री शैलजा को प्रदेश की जिम्मेदारी दी थी। साथ ही हुड्डा को भी आगे किया जा रहा है, जबकि राहुल गॉंधी ने पूर्व मुख्यमंत्री की तमाम चेतावनियों के बावजूद तंवर को उनके पद से हटाने से इनकार कर दिया था।
अदिति सिंह ने कहा कि उनको कोई नोटिस नहीं मिला है। साथ ही उन्होंने कहा कि विधानसभा के विशेष सत्र में विधायक राजेश सिंह और विधान परिषद के सदस्य दिनेश सिंह भी शामिल हुए थे। पार्टी विधानमंडल दल ने क्या उन्हें भी नोटिस भेजा है?
भूकंप, बाढ़ और जल-जमाव जैसी आपदाएँ झेलने के बाद बिहारवासी कम से कम ये सीख लेंगे कि आपदा की स्थिति में किसी और के बदले अपने आप पर भरोसा करना होगा क्योंकि जिनके भरोसे बैठे हैं उस सरकार, राजनैतिक दल, एनजीओ वगैरह में से तो कोई आता नहीं!
जब दर्शक बढ़ रहे हैं, उनका जन्म बिलकुल ही अलग समय में हुआ है, तब न्यूज वाले उनके दादा की जवानी के शो क्यों चला रहे हैं? याद कीजिए कि चौबीस घंटे का न्यूज टेलीविजन जब से आया है, आपने न्यूज डिबेट में क्या बदलाव देखे हैं? आपको याद नहीं आएगा।
जोगेंद्र नाथ मंडल ने जिस तर्ज पर इतिहास रचा उसका हश्र जानना जरूरी है। जोगेंद्र नाथ तो नेता थे, परिस्थितियाँ विपरीत हुईं तो गुमनामी में ही सही वापस भारत आ गए, लेकिन उनका क्या जो उनके आह्वान पर मात्र एक वोट बनकर पाकिस्तानी हुए।
यहाँ तक कि जब चौधरी को उनका वह ट्वीट दिखा दिया गया, जिसमें उन्होंने "50 से अधिक देशों" के UNHRC में पाकिस्तान के समर्थन का दावा किया था, तो भी उन्हें समझ नहीं आया कि उसमें गलत क्या है। "मैंने जो कहा, उस पर मैं कायम हूँ। इसमें इतनी हैरत की क्या बात है? आप किसका एजेंडा चला रहे हो?"