पटनायक दावा करते हैं कि वेदों में कहीं भी भगवान शिव का ज़िक्र ही नहीं है। इसके बाद भारतीय इतिहास के बारे में ट्वीट करने वाला मशहूर ट्विटर हैंडल 'true Indology' ने उन्हें पलट कर जवाब में वह वैदिक ऋचा बता दिया, जिसमें भगवान शिव को उनके अन्य नामों शम्भु, शंकर, पशुपति के अलावा "शिव" नाम से भी नमस्कार किया गया है।
पठान सही थे या सिख। यह फैसला करना केसरी फिल्म का मकसद नहीं है। चाहे सिख सैनिक अंग्रेज़ों के सिपाही बनकर लड़ें हों या हमला करने वाले पठान आज़ादी के परवाने हों, उन 22 वीरों का 'लास्ट स्टैंड' सब बातों से ऊपर था। इसके बारे में हमें पता होना चाहिए था।
यासीन मलिक पर मुकदमा खुल चुका है, 84 के दंगों पर दोबारा केस खुला है, नेशनल हेराल्ड केस है, चिदंबरम हैं, अगस्ता-वेस्टलैंड है, रामजन्मभूमि है, एनडीटीवी का प्रणय रॉय है, क्विंट का राघव बहल है, 370 का मामला सुप्रीम कोर्ट ने देखने का वादा किया है, अर्बन नक्सलियों पर मामले चल रहे हैं…
विज्ञान कहता है कि पीरियड का शादी की उम्र से कोई रिश्ता नहीं होता। कम उम्र में शादी का लड़कियों के जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। बाल विवाह रोकने के लिए कानून भी है। फिर भी मुस्लिम लॉ का हवाला देकर अदालत के फैसले पर सवाल। आखिर इस दकियानूसी सोच और कठमुल्लों के दवाब का क्या है इलाज?
पीड़िता ने कहा कि आरोपित अतुल को लोग कह रहे हैं कि वो किसी भी तरह से छूट जाएँगे और फिर उसका उन्नाव रेप पीड़िता से भी बदतर हाल करेंगे। पीड़िता ने कहा कि उसने न्याय के लिए CJI को भी पत्र लिखा है।
'The Wire' के झूठ की पोल खोलते हुए दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कश्मीर में छप रहे अख़बारों के न केवल नाम गिनाए, बल्कि उनकी तस्वीरें भी दिखाईं।
उन्होंने कहा कि दूध, दही और माखन के बिना श्रीकृष्ण की कल्पना की ही नहीं जा सकती। पीएम मोदी ने समझाया कि जिस तरह प्रकृति, पशुधन और पर्यावरण के बिना भगवान कृष्ण अधूरे नज़र आते हैं, उसी तरह इनके बिना भारत भी अधूरा लगेगा। उन्होंने प्रकृति से संतुलन बना कर चलने की अपील की।
अयोध्या करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र बिंदु है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो इससे करोड़ों भारतीयों की इच्छा पूरी होगी। उन्होंने कहा कि वो राम मंदिर निर्माण का समर्थन करते हैं।
“हमें ऐसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है। कश्मीर बंद नहीं है। वहाँ कर्फ्यू नहीं है। अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को ‘कर्फ्यू पास’ के साथ बाहर निकलना होता।”
स्कूलों की पोल तब खुली, जब पैरेंट्स एसोसिएशन ने एक आरटीआई दाखिल की। 2000 से अधिक स्कूलों में फायर एनओसी का न होने का मतलब है कि 2 लाख बच्चे ख़तरे की जद में आ जाते हैं। दिल्ली सरकार किस अनहोनी के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठी है?