राज्यसभा में विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) मतलब UAPA संशोधन विधेयक को पारित कर दिया गया। बिल के पक्ष में 147 और विपक्ष में 42 वोट पड़े। इस बिल में आतंक से संबंध होने पर संगठन के अलावा किसी शख्स को भी आतंकी घोषित करने का प्रावधान शामिल है।
ब्यूटी पार्लर में नौकरी के लिए रोज ऑटो से आती-जाती। इसी दौरान ऑटो ड्राइवर 'अमन' से हुई दोस्ती। 'अमन' के साथ कई बार मंदिर भी गई। 'अमन' हाथ में कलावा बाँधता था, कड़ा पहनता था। एक दिन अचानक से पता चला कि वो हिन्दू नहीं बल्कि मुस्लिम है और उसका अमन नहीं बल्कि ख़ालिद है।
रूजवेल्ट को लिखे गए इस पत्र के 6 साल बाद 6 और 9 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था। इतिहास और आइंस्टीन दोनों को यह अफ़सोस हमेशा रहा कि इस महान त्रासदी की नींव पर कुछ Best Brains के भी हस्ताक्षर थे।
सौ करोड़ की आबादी, NDA के 45% वोट शेयर में आखिर किसके वोटर कार्ड हैं? फिर सवाल कौन पूछेगा इन हुक्मरानों से? आलम यह है कि तीन चौथाई बहुमत वाले योगी जी के राज्य में, हिन्दुओं को अपने घरों पर लिखना पड़ रहा है कि यह मकान बिकाऊ है!
2015 में फ्री वाई-फाई से लेकर गली-गली में सीसीटीवी लगाने का वादा करके दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाले केजरीवाल आज फिर से अपने झूठे वादों की राजनीति खेलकर 2020 फतह करना चाहते हैं लेकिन उनके पिछले वादों की जमीनी हकीकत क्या है, उस पर भी जरा ध्यान डाल लें:
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बाल दुष्कर्म के मामलों की जानकारी देते हुए बताया गया था कि इस प्रकार के मामलों के निपटाने की दर महज नौ फीसदी ही है। और यह हालात पोक्सो कानून लागू होने के सात साल बाद की है।
हनुमान मंदिर की कमिटी ने आदिल और शादाब को उस समय रंगे हाथों पकड़ लिया, जब दोनों माथे पर टीका लगा मंदिर में घुस गए और वहाँ की मूर्तियों को तोड़ने लगे। लोगों ने बताया कि शक से बचने के लिए इन दोनों युवकों ने माथे पर टीका लगा रखा था, ताकि हिन्दू नहीं होने की पहचान से बच सकें।
उन्नाव बलात्कार मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फ़ैसला लेते हुए कहा कि इससे संबंधित सभी केस दिल्ली ट्रांसफर हों। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कोर्ट में CBI के ऑफ़िसर को उपस्थित रहने के लिए भी कहा, जो इस बात की जानकारी देंगे कि इस मामले की जाँच में अब तक क्या हुआ।
शगुफ्ता का कहना है कि इस मामले में न्यायालय में प्रताड़ना का मुकदमा चला। इसमें कोर्ट ने पीड़ित महिला को गुजाराभत्ता के रूप में 2000 रुपए महीना देने के लिए निर्देश दिए। कोर्ट के निर्देश के बाद भी आजतक उसके शौहर ने उसे कुछ नहीं दिया और न ही वह उससे मिलता है।
तुम्हारी लड़ाई वो 49 लोग क्यों लड़ेंगे जिनका अजेंडा ही तुम्हारी सरकार को कमजोर करना है। उनके पास लिखने और बोलने का सामर्थ्य है, क्या तुम्हारे पास वो सामर्थ्य नहीं? अगर है तो वो दिखता क्यों नहीं?