नर्स एक बीमार बच्चे के बेड के पास खड़ी होकर कुछ निर्देश दे रही है और हमारे पत्रकार माइक लेकर पिले पड़े हैं! ये इम्पैक्ट किसके लिए क्रिएट हो रहा है? क्या ये मनोरंजन है कुछ लोगों के लिए जिनके लिए आप पैकेज तैयार करते हैं? फिर आपने क्या योगदान दिया इस मुद्दे को लेकर बतौर पत्रकार?
हॉस्पिटल का नाम, बीमारी का नाम, जगह का नाम, किसकी गलती है आदि बेकार की बातें हैं, क्योंकि सौ से ज़्यादा बच्चे मर चुके हैं। इतने बच्चे मर कैसे जाते हैं? क्योंकि भारत में जान की क़ीमत नहीं है। हमने कभी किसी सरकारी कर्मचारी या नेता को इन कारणों से हत्या का मुकदमा झेलते नहीं देखा।
उधर AES से हो रही मासूमों की मौतें थमने का नाम नहीं ले रही, इधर बिहार में गर्मी व लू का ऐसा प्रकोप चला है कि 161 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। दक्षिण-पूर्वी बिहार में गर्मी का प्रकोप भयंकर तरीके से बढ़ गया है और मरने वालों में अधिकार बुज़ुर्ग हैं।
पथराव शुरू हुआ, डॉक्टरों पर जानलेवा हमले हुए तो पुलिस ने क्यों नहीं रोका? क्यों डॉक्टरों की जान बचाने के लिए दंगाईयों पर नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई नहीं की गई? जवाब हम सब को पता है।
वायुसेना ने वीरगति को प्राप्त सभी यात्रियों को श्रद्धांजलि दी है। इस विमान में जीएम चार्ल्स, एच विनोद, आर थापा, ए तंवर, एस मोहंती, एमके गर्ग, केके मिश्रा, अनूप कुमार, शेरिन, एसके सिंह, पंकज, पुताली और राजेश कुमार सवार थे। ऑपइंडिया की ओर से सभी जवानों को श्रद्धांजलि!
एक-एक सेकंड का विलम्ब घातक है। अर्धसैनिक बल भेजे जाएँ, उच्च स्तरीय जाँच कमिटी गठित की जाए, अच्छे वकील खड़े कर कार्यकर्ताओं को न्याय दिलाई जाए? भाजपा अब 'बेचारी' नहीं है और उसे न ही ऐसा दिखावा करने का अधिकार है। कार्यकर्ताओं को चाहिए- न्याय।
आज़म खान की पहचान ही इस बात से है कि वो निहायत ही घटिया बातें बोलते हैं। वो अगर बेहूदगी न करें तो देश को पता भी न चले कि खुद को समुदाय विशेष का ज़हीन नेता मानने वाला, और प्रोजेक्ट करने वाला, ये आदमी किस दर्जे का धूर्त है।
जब अंकित के परिवार ने अपने घर के एकमात्र कमाऊ इंसान को खो देने की भरपाई करने के लिए केजरीवाल से मुआवज़े की माँग की, तो वो प्रार्थना सभा को बीच में ही छोड़ कर चल दिए। तंजील अहमद और एमएम खान के परिवार को 1-1 करोड़ रुपए दिए तो फिर अंकित के परिवार के साथ यह राजनीति क्यों?
कुख्यात नक्सली किरण कुमार और उसकी पत्नी अल्लूरी कृष्णा कुमारी को धर दबोचा गया है। दोनों ही पति-पत्नी 1994 से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय थे और लगभग 150 पुलिस वालों की मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं। इन पर 20 लाख रुपए का इनाम था।
बेगूसराय में महादलित परिवार के घर में घुस कर 2 महिलाओं के साथ बलात्कार की कोशिश की गई। आरोपितों में से एक लड्डू मियाँ को पीड़ितों ने पहचान लिया। लड्डू मियाँ महादलित परिवार को ज़मीन बेचने की धमकी देता रहता है। एक माह पूर्व भी उसने महिला की पिटाई की थी।