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कॉन्ग्रेस के टूलकिट पर दैनिक भास्कर और द वायर कैसे नाचे: कोरोना पर उनकी रिपोर्टिंग से समझिए

दैनिक भास्कर और द वायर ने मोदी सरकार के मंत्रियों पर रिपोर्ट की है। ठीक उसी लाइन पर जैसा करने का निर्देश कॉन्ग्रेस के टूलकिट में है।

चीनी वायरस पर मोदी घृणा से सना लेफ्ट-लिबरल प्रोपेगेंडा: कोरोना से भी घातक है ये राजनीति

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर जैसे-जैसे तेज होती गई इसके समानांतर एक और लहर भी उफान मारने लगी। यह लहर संक्रमण से भी घातक है।

इजरायली रॉकेट से मरीं केरल की सौम्या… NDTV फिर खेला शब्दों से, Video में कुछ और, शीर्षक में जिहादियों का बचाव

केरल की सौम्या इजरायल में थीं, जब उनकी मौत हुई। वह अपने पति से बात कर रही थीं, तभी फिलिस्तीनी रॉकेट उनके पास आकर गिरा। लेकिन NDTV ने...

12 ऐसे उदाहरण, जब वामपंथी मीडिया ने फैलाया कोविड वैक्सीन के खिलाफ प्रोपेगेंडा, लोगों में बनाया डर का माहौल

हमारे पास 12 ऐसे उदाहरण हैं, जब वामपंथी मीडिया ने कोरोना की दूसरी लहर से ठीक पहले अपने ऑनलाइन पोर्टल्स पर वैक्सीन को लेकर फैक न्यूज फैलाई और लोगों के बीच भय का माहौल पैदा किया।

यूपी पर स्विच ऑन, बंगाल हिंसा पर स्विच ऑफ: मेनस्ट्रीम मीडिया का ये संतुलन क्या कहलाता है

मीडिया भय, लालच, स्वार्थ या मोह के कारण सच न दिखाए तो लोकतंत्र कैसे ज़िंदा रहेगा? क्या बंगाल को लेकर ऐसा ही नहीं हो रहा?

RSS कार्यकर्ता की मौत को लेकर ‘लोकसत्ता’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने किया फैक्टचेक, बेटी ने वीडियो के जरिए दिया जवाब

इंदिरा गाँधी रुग्णालय में नारायण भाऊराव दाभाडकर भर्ती थे। उनकी बेटी ने अब एक वीडियो जारी कर चीजें साफ़ की हैं। वो इस घटना के बारे में बताते हुए रो पड़ीं।

क्लबहाउस चर्चा में पत्रकार साक्षी जोशी ने माना- ‘बीजेपी ने बंगाल में जमीन पर किया है बहुत काम, हासिल कर सकती है बढ़त’

क्लबहाउस चर्चा में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बॉथरूम ब्रेक और टॉयलेट रूटीन पूछने वाली पत्रकार साक्षी जोशी ने माना है कि बंगाल चुनावों में बीजेपी को बढ़त मिल सकती है।

कोरोना पर रिपोर्टिंग ही बनी ‘त्रासदी’, संक्रमण से जीतने के जज्बे को मार रही ‘भय’ की ये पत्रकारिता

यह भय का ही असर है जो अस्पताल में बेड पर कब्जा करने के लिए मजबूर कर रहा है। आवश्यकता न होने के बावजूद ऑक्सीजन सिलेंडर और इंजेक्शन रखने के लिए उकसा रहा है।

रवीश और बरखा की लाश पत्रकारिताः निशाने पर धर्म और श्मशान, ‘सर तन से जुदा’ रैलियाँ और कब्रिस्तान नदारद

अचानक लग रहा है जैसे पत्रकारों को लाश से प्यार हो गया है। बरखा दत्त श्मशान में बैठकर रिपोर्टिंग कर रही हैं। रवीश कुमार लखनऊ को लाशनऊ बता रहे हैं।

पत्रकारिता का पीपली लाइवः स्टूडियो से सेटिंग, श्मशान से बरखा दत्त ने रिपोर्टिंग की सजाई चिता

चलते-चलते कोरोना तक पहुँचे हैं। एक वर्ष पहले से किसी आशा में बैठे थे। विशेषज्ञ को लाकर चैनल पर बैठाया। वो बोला; इतने बिलियन संक्रमित होंगे। इतने मिलियन मर जाएँगे।

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