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दूसरी तिमाही में शानदार 8.4 फीसदी GDP ग्रोथ: भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी के संकेत, आँकड़े जारी

आँकड़ों के मुताबिक दूसरी तिमाही (Q2) 2021-22 में जीडीपी 35.73 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि 2020-21 की दूसरी तिमाही में 32.97 लाख करोड़ रुपए रहा।

माना लोकतंत्र में विपक्ष हो, पर जब उसकी नकारात्मक राजनीति लोकतंत्र के लिए ही नासूर बन जाए तो क्या करें?

ऐसे विपक्ष का क्या इलाज है? क्या लोकतंत्र के नाम पर ऐसे विपक्ष को ढोते रहना चाहिए?

बिटकॉइन को करेंसी के तौर पर मान्यता नहीं देगी मोदी सरकार, निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दूर किया संशय

वित्त मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि सरकार बिटकॉइन को लेकर किए जाने वाले ट्रांजैक्शन का कोई डाटा नहीं रखती है।

‘पराली जलाना अपराध नहीं होगा, किसानों को शामिल कर MSP पर गठित होगी कमेटी’: कृषि मंत्री तोमर ने कहा- बड़ा दिल दिखाते हुए घर...

मोदी सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद अब फैसला किया है कि किसानों द्वारा पराली जलाना अपराध नही माना जाएगा।

बस नाम में शीत, गरमी भरपूर: संसद के इस सत्र में पश्मीना शॉल के अलावा और क्या-क्या होगा, सब कुछ एक साथ

संसद सत्र हंगामेदार होगा, यह भारतीय राजनीति के विशेषज्ञों और मीडिया का सबसे बासी क्लीशे है। असल में क्या होना है यह जानिए।

कृषि कानूनों की वापसी पर मोदी कैबिनेट की मुहर, मार्च 2022 तक गरीबों को मिलता रहेगा फ्री राशन

अनुराग ठाकुर ने कहा कि आज पीएम के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की औपचारिकताएँ पूरी कीं।

कृषि कानूनों की वापसी: BJP को उनकी ही वेबसाइट पर मौजूद ये पुस्तक पढ़नी चाहिए, जानिए क्यों

एक साल पहले जब किसान प्रदर्शनकारी दिल्ली के लिए निकले थे, तभी इस आंदोलन में खालिस्तानी तत्वों की उपस्थिति का स्पष्ट रूप से पता चल गया था।

पाकिस्तान-चीन ने किसानों में फैलाया प्रोपेगेंडा, राहुल-अखिलेश-ममता-केजरीवाल… सबका दुष्प्रचार यथार्थ पर भारी

कृषि बिल विरोध आड़ में हिन्दू सिख भाईचारे को भी नुकसान पहुँचाने की कोशिश हुईं। 26 जनवरी की लाल किले की घटना को इससे जोड़कर देखा जा सकता है।

सेक्युलर मुखौटे वाला खालिस्तानी आंदोलन, जहाँ भीड़तंत्र के सामने बेबस रही पुलिस: ‘ठेकेदारों’ से निपटने और कम्युनिकेशन पर सोचे केंद्र

कार्यकर्ताओं को भरोसे में नहीं लिया या संचार व्यवस्था कमजोर रही? भीड़तंत्र वाले 'ठेकेदारों' के हिंसक आंदोलन के बाद क्या करे केंद्र सरकार? आगे इस तरह की बलैकमेलिंग से निपटने का रास्ता क्या हो?

हिंसक भीड़ के सामने झुकी सरकार या सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम: आखिर PM मोदी ने क्यों वापस लिए कृषि कानून, जानिए अंदर...

कई लोग मान रहे हैं कि केंद्र सरकार सड़क पर उतर कर भीड़ और हिंसा के सहारे अपनी बात मनवाने की कोशिश करने वालों के सामने झुक गई है। अंदर के लोगों का कहना है कि आंतरिक सुरक्षा के लिए ये अनिवार्य था।

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