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नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन की आड़ में चल रहा था बड़ा खेल, टारगेट था UP की औद्योगिक विकास की गति को तोड़ना: जानें योगी सरकार ने गलत मंसूबों को कैसे किया ध्वस्त

उत्तर प्रदेश के 'आर्थिक प्रवेश द्वार' नोएडा में होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर राज्य की निवेश छवि पर पड़ता है। इसी के चलते अब नोएडा में औद्योगिक अशांति फैला कर उत्तर प्रदेश को नाकाम साबित करने की कोशिश की जा रही है।

नोएडा (गौतम बुद्ध नगर जिला) उत्तर प्रदेश का सबसे विकसित औद्योगिक और आईटी हब है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश के ‘आर्थिक प्रवेश द्वार’ नोएडा में होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर राज्य की निवेश छवि पर पड़ता है।

इसी के चलते अब नोएडा में औद्योगिक अशांति फैला कर उत्तर प्रदेश को नाकाम साबित करने की कोशिश की जा रही है। अप्रैल में हुए श्रमिक विरोध और हिंसक प्रदर्शनों से तो कम से कम यही जान पड़ता है।

हालाँकि जाँच एजेंसियों की तफ्तीश बताती है कि मजदूरों की हिंसा नोएडा को टारगेट करने की थी। 2017 के बाद योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था सुधार, निवेश आकर्षण और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया।

इसी के जरिए सरकार ने नोएडा को मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक्स हब, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स केंद्र बना दिया। अब इस पर चोट करने की कोशिश की जा रही है।

जाँच से पता चला कि नोएडा हिंसा स्पॉन्टेनियस नहीं थी। मुख्य आरोपित अदित्य आनंद (मास्टरमाइंड) को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया। उसने 5 साल से तैयारी कर रखी थी।

अदित्य 2022 में मजदूर बिगुल से जुड़ा। इसके बाद नोएडा की फैक्टरियों का पूरा डाटा इकट्ठा किया। इसमें कर्मचारियों की संख्या और वेतन से लेकर उनकी स्थिति तक का पूरी जानकारी जुटाई।

मार्च 30 से अप्रैल 1 के बीच सेक्टर-37, अरुण विहार में एक कमरे में 5 संगठनों (मजदूर बिगुल दस्ता, दिशा संगठन, RWPI, नवजवान भारत सभा, एकता संघर्ष समिति) की मीटिंग हुई।

जाँच में मुख्य आरोपी रुपेश राय (मजदूर बिगुल दस्ता के सदस्य) के व्हाट्सएप चैट्स से साबित हुआ कि अप्रैल की शुरुआत से प्लानिंग चल रही थी।

श्रमिकों को भड़काने के लिए 17+ व्हाट्सएप ग्रुप्स बनाए गए। मजदूर बिगुल दस्ता ( जो कि असल में एक लेफ्ट विंग संगठन है और CPI-ML से जुड़ा है, उसने मजदूरों को मोबिलाइज किया।

अदित्य आनंद और कुछ अन्य ने झूठी खबर और अफवाहें फैलाईं। जाँच के बाद जो गिरफ्तारियाँ हुईं उनमें 66 लोगों में से 45 गैर-मजदूर (आउटसाइडर्स) थे।

नोएडा के विकास को पटरी से उतारने की सुनियोजित साजिश

1. ‘मजदूर बिगुलऔर बाहरी विचारधारा का दखल

‘मजदूर बिगुल’ जैसी संस्थाएं और पत्रिकाएं, जो कट्टरपंथी वामपंथी विचारधारा से प्रेरित हैं, नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय देखी गई हैं। इनका मुख्य काम श्रमिकों को ‘हक’ के नाम पर भड़काकर ‘हड़ताल’ की स्थिति पैदा करना है।

जिस तरह 70 और 80 के दशक में पश्चिम बंगाल में ‘घेराव’ और ‘उग्र आंदोलन’ से टाटा और बिड़ला जैसे उद्योगों को बाहर निकाला गया, वही मॉडल नोएडा में लागू करने की कोशिश हो रही है।

खुफिया इनपुट बताते हैं कि कुछ एक्टिविस्ट जो बंगाल और केरल के आंदोलनों में सक्रिय थे, अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा की झुग्गी बस्तियों में ‘श्रमिक पाठशाला’ चला रहे हैं।

2. जेवर एयरपोर्ट और इन्वेस्टमेंट वॉर

जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी के आने से उत्तर प्रदेश, विशेषकर नोएडा, दुनिया भर के निवेशकों के लिए ‘हॉटस्पॉट’ बन गया है।अब जैसे ही जेवर एयरपोर्ट का काम तेजी से बढ़ा, वैसे ही अचानक श्रमिक आंदोलनों और जातीय रैलियों (जैसे गुर्जर रैली) में तेजी आई।

विदेशी कंपनियों (सैमसंग, विवो, माइक्रोसॉफ्ट) के मन में जबरन यह डर पैदा करने की कोशिश की गई कि ‘यहाँ का माहौल कभी भी खराब हो सकता है।‘ यदि निवेश रुकेगा तो यूपी की 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का सपना टूटेगा।

नोएडा विरोध प्रदर्शन – घटनाक्रम और नैरेटिव विश्लेषण

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में किसानों और श्रमिकों के प्रदर्शनों को एक सोची-समझी रणनीति के तहत ‘कानून-व्यवस्था की विफलता’ के रूप में पेश करने की कोशिश की गई है।

घटनाक्रम और प्रभाव तालिका (1 से 10 के पैमाने पर)

तिथि/घटनाक्या नैरेटिव सेट करने की कोशिश हुई?प्रभाव (1-10)वास्तविक अपराधी/तत्व
श्रमिक विरोध (शुरुआती चरण)“कंपनियां असुरक्षित हैं, श्रमिक पलायन कर रहे हैं।”4स्थानीय यूनियन नेता और कुछ बाहरी कंटेंट क्रिएटर।
राजकुमार भाटी एवं गुर्जर रैली“सरकार एक विशिष्ट समुदाय के खिलाफ है, सामाजिक वैमनस्य है।”7राजनैतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले नेता और डिजिटल एक्टिविस्ट।
सोशल मीडिया कैंपेन (UP Industry in Danger)“यूपी अब निवेश के लायक नहीं रहा, गुंडागर्दी बढ़ गई है।”8पेड बॉट्स और कुछ विशेष विचारधारा वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स।
पुलिस कार्रवाई एवं गिरफ्तारी“लोकतंत्र की हत्या हो रही है, शांतिपूर्ण प्रदर्शन दबाया जा रहा है।”5वे तत्व जो धारा 144 का उल्लंघन कर हिंसा भड़का रहे थे।

इन घटनाओं का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों (जैसे सैमसंग, विवो, डेटा सेंटर निवेशक) के मन में असुरक्षा पैदा करना था। इस नैरेटिव का प्रभाव 7/10 तक देखा गया, जिसे योगी सरकार ने तुरंत काउंटर भी किया।

तथ्यों ने उजागर कर दिए विपक्ष के नैरेटिव

बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट: जहाँ अखिलेश सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर दोहरे अंकों (17.5% के आसपास) तक पहुँच गई थी, वहीं योगी सरकार के कार्यकाल में यह गिरकर 3% से 4% के बीच आ गई है। यह डेटा साबित करता है कि रोजगार खत्म नहीं हो रहा, बल्कि बढ़ रहा है।

सपा काल (2012-2017) में उत्तर प्रदेश में अपराध दर ऊँची थी। NCRB 2012-2015 डेटा के अनुसार, IPC अपराधों में 24% वृद्धि हुई। हत्या, बलात्कार, अपहरण और दंगे बढ़े। 2012-2017 के बीच 815 दंगे हुए, जिनमें 192 मौतें हुईं।

इस काल के दौरान माफिया राज, लैंड ग्रैबिंग और राजनीतिक संरक्षण आम थे। गौतम बुद्ध नगर सहित पश्चिमी UP में भी औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा की शिकायतें थीं। ऐसे में जो उद्योग यूपी में आने वाले थे नहीं आए।

सपा सरकार की तुलना में योगी सरकार (2017-2026) में स्थिति में बेहद सुधार आया। NCRB 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, UP का कुल अपराध दर 181.3 से 335.3 प्रति लाख (राष्ट्रीय औसत 270.3-448.3 से कम) है। हत्या दर 1.4 प्रति लाख, डकैती और लूट में भारी कमी (85% तक कुछ श्रेणियों में) आई।

2017 के बाद बड़े दंगे शून्य रहे। बरेली और बहराइच जैसी घटनाओं में भी 24 घंटे में मामला काबू कर लिया गया। UP-112, पुलिस सुधार और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने प्रभाव दिखाया। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक शांति बढ़ी, जिससे निवेशक आकर्षित हुए।

योगी सरकार की नीतियों की वजह से जो उद्योग थे, उन्होंने यूपी में विस्तार किया। जो उद्योग नहीं थे, उन्हें योगी सरकार लेकर आई। सरकारी स्तर पर बड़ी कंपनियों की स्थापना हुई।

डिफेंस कॉरिडोर, SEZ जैसी व्यवस्थाएँ, औद्योगिक पार्क, वाहन निर्माण, स्मार्टफोन निर्माण, फूड एवं प्रोसेसिंग यूनिट्स की तादात बहुत बढ़ी। हजारों करोड़ के निवेश से सिर्फ नोएडा ही नहीं यूपी के अलग-अलग हिस्सों में इंडस्ट्रीज लगी।

MSME का गढ़ बनता उत्तर प्रदेश

योगी काल में औद्योगिक क्रांति हुई। साल 2017 से अब तक 17,841 नई फैक्टरियां रजिस्टर्ड, 16 लाख+ प्रत्यक्ष रोजगार। नोएडा-ग्रेटर नोएडा यमुना एक्सप्रेसवे के कारण भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स हब बन गया।

योगी सरकार ने ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को पुनर्जीवित किया है। फैक्ट्रीज की संख्या की बात की जाए तो पिछले 7 वर्षों में पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या में 25% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

इसके अलावा MSME लोन को बढ़ावा मिला है। बैंकों के माध्यम से छोटे उद्यमियों को रिकॉर्ड लोन वितरित किए गए हैं।

पिछड़े जिलों (पूर्वांचल, बुंदेलखंड) का विकास

सपा सरकार पर आरोप था कि विकास सैफई और पश्चिमी UP तक सीमित रहा; पूर्वांचल-बुंदेलखंड माफिया और गरीबी की चपेट में।

2011-12 में पूर्वांचल की प्रति व्यक्ति आय राज्य औसत से काफी कम थी; बुंदेलखंड में सूखा और बेरोजगारी चरम पर। 

योगी सरकार ने संतुलित विकास पर जोर दिया, जिसमें पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (340 km), बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (296 km), गंगा एक्सप्रेसवे। इनसे पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग, रोजगार और कनेक्टिविटी बढ़ी।

योगी सरकार में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों से 3.14 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे। पूर्वांचल और बुंदेलखंड अब विकास के नए केंद्र बन रहे हैं, जबकि नोएडा जैसी जगहें राज्य को गति दे रही हैं। बीते लगभग 1 दशक में प्रति व्यक्ति आय को योगी सरकार ने दोगुना से भी अधिक कर दिया। साल 2024-25 में ये ₹1,09,844 से 1,26,304 रुपए तक हो गया।

इसके अलावा GSDP ₹13.3 लाख करोड़ से ₹30.25 लाख करोड़ हो गया। गौतम बुद्ध नगर की प्रति व्यक्ति आय ₹10.17 लाख (2023-24) हुई, जो जापान के बराबर Public Private Partnership पर काम कर रही है। इसके अलावा सभी 75 जिलों में वृद्धि दर्ज की गई। 15 से अधिक जिलों में ₹1 लाख+ की आय दर्ज की गई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मजदूर हबसे मैन्युफैक्चरिंग हबकी यात्रा

एक साजिश के तहत यह प्रचारित किया जा रहा है कि यूपी के लोगों को अन्य राज्यों में श्रमिक बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है।वास्तविकता इसके ठीक उलट है:

जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी: ये प्रोजेक्ट्स पश्चिमी यूपी को केवल सेवा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन और लॉजिस्टिक्स का केंद्र बना रहे हैं।

औद्योगिक सुरक्षा बल (UPISF): उद्योगों की सुरक्षा के लिए विशेष बल का गठन किया गया है, ताकि उद्यमियों को डराया न जा सके।

सीएम योगी की जीरो टॉलरेंसनीति

दंगाइयों और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई (बुलडोजर एक्शन और कुर्की) ने उद्यमियों में यह विश्वास पैदा किया है कि उनकी संपत्ति और निवेश सुरक्षित है। पूर्ववर्ती सरकारों में जहाँ ‘रंगदारी’ एक उद्योग बन गया था, अब वहाँ ‘पारदर्शिता’ है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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