बाबरी मस्जिद का टूटना भले ही भारतीय कानून की दृष्टि में एक आपराधिक घटना है, लेकिन हिन्दुओं के इतिहास के हिसाब से यह उस आस्था के साथ न्याय है जिसके मंदिर की दीवार पर मस्जिद खड़ी की गई थी।
पर्सिया के बादशाह ने पैगम्बर मुहम्मद की चिट्ठी को फाड़ डाला। पैगम्बर ने तब कई राजाओं को लिखा था कि अगर तुम इस्लाम नहीं अपनाओगे तो तुम्हारा साम्राज्य तहस-नहस हो जाएगा। पैगम्बर ने इस्लामी सैनिकों को 'जिहादी' की संज्ञा दी थी। 1400 वर्ष पूर्व शुरू हुई इस कहानी को जानने के लिए...
"अगर मुझे जल्दी उत्तर नहीं मिला तो समझना कि स्वीडिश पुलिस और सीमा बल के लिए यह मेरी आखिरी चेतावनी है, वरना अल्लाह की मर्ज़ी से मैं किसी की परवाह किए बगैर इस राजा का सर काट दूँगा, काट कर अलग कर दूँगा, फिर चाहे इसके लिए क्यों न मुझे अपना ही सर कटवाना पड़े।"
इस विरोध प्रदर्शन के बहाने भारत और हिन्दुओं के प्रति नफरत फैलाने की इस हरकत के पीछे लंदन के कई पाकिस्तानी समर्थन वाले ग्रुप और जेकेेएलएफ यानि जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट की युनाइटेड किंगडम वाली ब्रांच का हाथ है।
शुभकामना संदेश को लेकर समुदाय विशेष के लोगों ने जहीर को किया ट्रोल। ट्रोल करने वाले उमर को राणा अय्यूब, निखिल वागले और सबा नकवी जैसे लिबरल पत्रकारों के साथ ही संजय निरुपम जैसे कॉन्ग्रेसी भी फॉलो करते हैं।
सबके अंत में एक ही मकसद: कमलेश तिवारी की गर्दन काटनी है। ये किसी व्यक्ति की सोच नहीं है, ये सामूहिक सोच है जो किसी व्यक्ति के माध्यम से फलित होती है। कमलेश तिवारी की हत्या अशफाक और मोइनुद्दीन ने ही नहीं, एक मजहब ने की है जो ऐसे लोगों को रोकना तो छोड़िए, उनकी निंदा तक नहीं कर पाता।
इस ऑडियो में हत्यारे के पिता-बीवी दोनों लगातार अशफाक से गुजरात आने की गुजारिश करते सुनाई पड़ रहे हैं। लेकिन अशफाक कह रहा है कि गुजरात आना उसके लिए पॉसिबल नहीं हैं।
संत राफेल म्यूज़ियम एक महत्वपूर्ण स्मारक है। यह फ़्रांस-इटली की सीमा के पास स्थित है। इसके एक तरफ सेंट टोपेज़ है और दूसरी तरफ़ अपने फिल्म फेस्टिवल के लिए जाना जाने वाला कांस।
चूँकि भाषाई बाध्यता है कि इस नृशंस हत्या का जश्न मनाने वाले जिहादी मानसिकता के मुसलमानों को आप एक स्तर तक ही कुछ कह सकते हैं वरना इनकी परवरिश तो नाली के कीचड़ में मिली विष्ठा में लोटते उस जीव की तरह ही है जिसका नाम लेना मैं चाहता नहीं।