यह बात चौंकाने वाली है कि भविष्य में देश का नेतृत्व करने की इच्छा रखने वाले राहुल गाँधी को ऐसी राष्ट्रीय आपात स्थितियों के दौरान आतंकी समूहों के साथ होने वाली जटिल वार्ताओं के बारे में पूरी और सही जानकारी अब तक नहीं है।
अब राहुल गाँधी ने कुछ ऐसा किया है, जिसे जानकार आपके सामने उनके दिखावे की पोल तो खुल ही जाएगी, साथ ही यह भी पता चलेगा कि वे भारतीयता, हिंदुत्व और हमारी पूजा पद्धति से कितने अनभिज्ञ हैं।
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा, “पार्टी के कार्यकर्ता भी चाहते थे कि कॉन्ग्रेस इस तरह की बयानबाजी न करे।
आम लोग चाह रहे थे कि पूरे देश के लोगों को सेना के साथ खड़ा रहना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यवश कॉन्ग्रेस जैसे भी हो, कहीं न कहीं गलत कदम उठा रही थी। सेना का मनोबल तोड़ने का काम कर रही थी।”
मीडिया गिरोह और देश के आदर्श लिबरल समूह की बौखलाहट साफ़ है। इसे पिछले 4 सालों में हर दूसरे दिन ये कहते हुए सुना गया है कि देश का मतलब नरेंद्र मोदी नहीं है।
उन्होंने कहा कि राहुल जिस तरह की हरकत कर रहे हैं उससे वह अब पप्पू कहलाने के लायक नहीं बचे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस को गधों की सेना और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को गधों का सरताज कहा।
जब भी कर्ण युद्धक्षेत्र में कोई बहादुरी का कार्य करता- उसका सारथी शल्य कुछ बेतुकी बातें कर उसका मनोबल तोड़ने की कोशिश करता। राहुल गाँधी आज बिना सबूत रक्षा सौदों पर छींटाकशी कर शत्रु का काम आसान कर रहे हैं और देश का मनोबल तोड़ रहे हैं।