कार्यकर्ताओं ने प्रियंका के जयकारे लगाने से लेकर उन्हें 'बदलाव की आँधी' तक करार दिया लेकिन राहुल गाँधी को लेकर ऐसे कोई ख़ास नारे नहीं लगे। पोस्टरों में भी प्रियंका गाँधी को राहुल से ज्यादा तवज्जोह दी गई।
फ़िल्म के राहुल गाँधी असली राहुल गाँधी की तरह डॉक्टर सिंह की प्लेट में केक का टुकड़ा नहीं पटकते, वह उनसे काफ़ी विनम्र तरीक़े से पेश आते हैं। राहुल की प्रेमिका उन्हें सबका 'प्यारा रागा' बताती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े सूबे के लिए क्या राहुल या प्रियंका राफ़ेल पर 'बोफोर्स' से हमला करेंगे या कुतुब पर चढ़ 'आसमानी' बातें करेंगे?
अपने ट्वीट में जेटली ने बैंकों की ख़राब हालत का भी ज़िक्र किया, "2008-2014 के बीच बैंकों को लूटा गया और वो हम पर आरोप लगाते हैं कि हमने इंडस्ट्रियल लोन माफ़ किए, जबकि हमने एक रुपया भी माफ़ नहीं किया।"
साढ़े तीन साल तक कुशलतापूर्वक सेवा देने के बावजूद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था, इसकी वजह राहुल का वो आदेश था जिसके मुताबिक़ जो 80 साल के हो गए हों उन्हें सत्ता में नही रहना चाहिए।
राहुल गाँधी हमेशा से ही नए-नए तरीक़ों का इस्तेमाल करके भाजपा के ख़िलाफ़ टीका-टिप्पणी करते नज़र आते हैं। फिर भले ही कॉन्ग्रेस का हर दावा झूठा ही क्यों न साबित हो जाए।
प्रियंका गाँधी की सीट का आवंटन इस ओर भी इशारा करता है कि कहीं न कहीं कॉन्ग्रेस को यह एहसास है कि वो वंशवादी परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है, जिसे दुनिया की नज़र से धूमिल करना होगा।