मीडिया गिरोह और देश के आदर्श लिबरल समूह की बौखलाहट साफ़ है। इसे पिछले 4 सालों में हर दूसरे दिन ये कहते हुए सुना गया है कि देश का मतलब नरेंद्र मोदी नहीं है।
उन्होंने कहा कि राहुल जिस तरह की हरकत कर रहे हैं उससे वह अब पप्पू कहलाने के लायक नहीं बचे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस को गधों की सेना और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को गधों का सरताज कहा।
जब भी कर्ण युद्धक्षेत्र में कोई बहादुरी का कार्य करता- उसका सारथी शल्य कुछ बेतुकी बातें कर उसका मनोबल तोड़ने की कोशिश करता। राहुल गाँधी आज बिना सबूत रक्षा सौदों पर छींटाकशी कर शत्रु का काम आसान कर रहे हैं और देश का मनोबल तोड़ रहे हैं।
"राहुल गांधी आपके नेता ने इस राष्ट्र के पीएम की हत्या का आह्वान किया है तो क्या आप उन पर कार्रवाई करेंगे? यदि आप स्पष्ट रूप से कार्रवाई नहीं करते हैं तो इसका मतलब है कि आप अपने नेता के शब्दों का समर्थन करते हैं?
राहुल को आयुध फैक्ट्री और राइफल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के बीच का अंतर नहीं पता। राहुल को यह भी नहीं पता कि शिलान्यास और उद्घाटन में क्या फ़र्क़ होता है। कैग ने यूपीए कार्यकाल के दौरान ही सरकार के ढुलमुल रवैये पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया था।
याद रखिए, इस देश में जो भी हुआ वो कॉन्ग्रेस ने ही किया है। वरना आज भी सिर्फ पत्थर ही पत्थर होता। हम पत्थर खाते और पत्थर ही... समझने और कॉन्ग्रेस के आगे सिर झुकाने के बजाय अंड-बंड बोलना बंद कीजिए।