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तृप्ति देसाई का सबरीमाला में घुसना बड़ी साज़िश: वामपंथी मंत्री ने कहा- एक्टिविस्ट पर हमला ड्रामा

वामपंथी मंत्री ने एक्टिविस्ट बिंदु अम्मिणी पर हुए हमले को नाटक करार दिया। उन्होंने कहा कि ये सब पूर्व-नियोजित ड्रामा था। बता दें कि बिंदु सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के लिए जा रही थीं, तभी किसी व्यक्ति ने उनपर मिर्ची स्प्रे से हमला कर दिया था।

सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली महिला पर फेंका गया मिर्च पाउडर, दर्शन करने पहुँचीं तृप्ति देसाई

“एर्नाकुलम शहर के पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर एक आदमी ने मेरे चेहरे पर मिर्च पाउडर छिड़क दी। पुलिस बहुत गैर जिम्मेदार है और उन्होंने उस बदमाश को गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की, जिसने उन पर हमला किया।”

सबरीमाला मंदिर में घुस रही थीं 50 से कम उम्र की 10 महिलाएँ: केरल पुलिस ने भगाया

पुलिस ने बताया कि उन महिलाओं को मंदिर की परंपरा के बारे में पता नहीं था और उन्हें जैसे ही इसका भान हुआ, वो ख़ुद वापस चली गईं। पुलिस ने बताया कि उन महिलाओं को समझाने की कोई ज़रूरत ही नहीं पड़ी।

छगनलाल के बाथरूम में ही नहाने पर अड़ी नवयुवती, कहा, ‘पितृसत्ता का नाश हो, सबरीमाला में भी जाएँगे, और यहीं नहाएँगे’

युवती छगनलाल के विरोध पर चीखी, "द्वार खोलिए, अन्यथा तोड़ना पड़ेगा। डाऊन विद पेट्रियारकी। हमें जल्दी है, आप अपना मग्गा ले कर कोने मे बैठ जाएँ। जब एक महिला अंतरिक्ष में जा सकती है, एवरेस्ट पर जा सकती है तो आपके स्नानागार में क्यों नहीं आ सकती है।"

मैं तो सबरीमाला जाऊँगी, सुरक्षा दो या न दो: केरल सरकार ने तृप्ति देसाई से कहा- SC से ऑर्डर ले कर आओ

“राज्य सरकार सबरीमाला मंदिर जाने वाली किसी भी महिला को सुरक्षा प्रदान नहीं करेगी। तृप्ति देसाई जैसी कार्यकर्ताओं को सबरीमाला को अपनी शक्ति प्रदर्शन के स्थान के रूप में नहीं देखना चाहिए। अगर उन्हें पुलिस सुरक्षा की जरूरत है, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट से आदेश लेकर आना होगा।”

SC ने सबरीमाला मामले में 2018 के फ़ैसले को प्रभावी रूप से ख़ारिज कर दिया: एडवोकेट जे साई दीपक

कोर्ट ने कहा है कि सबरीमाला मामला तब तक क़ायम रहेगा जब तक 7 जजों की बेंच ‘धर्म के लिए आवश्यक अभ्यास’ के सवाल पर फ़ैसला नहीं ले लेती।

सबरीमाला में घुसने वाली 10 से 50 वर्ष की महिलाओं कोई सहायता नहीं दे पाएँगे: केरल की वामपंथी सरकार

"सबरीमाला में घुसने का प्रयास करने वाली 10 से 50 वर्ष तक की उम्र की महिलाओं को राज्य सरकार कोई सहायता मुहैया नहीं कराएगी। हमें अभी इस बात पर विचार करना है कि आगे क्या किया जा सकता है अगर..."

सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट में नहीं बनी सहमति: 3-2 में बँट गए जज, अब 7 जजों की पीठ करेगी फैसला

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अवाला जस्टिस खानविलकर और जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने के पक्ष में अपना मत सुनाया। जबकि पीठ में मौजूद जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नरीमन ने सबरीमाला समीक्षा याचिका पर असंतोष व्यक्त किया।

राम मंदिर के बाद अब सबरीमाला का इंतजार… रिटायरमेंट से पहले CJI गोगोई सुनाएँगे फैसला

अब तक राम मंदिर मामले को ही सबसे बड़ा माना जा रहा था, लेकिन इस पर फ़ैसला सुना दिए जाने के बाद अब सबकी निगाहें सबरीमाला मामले पर टिक गई है। धर्म और आस्था से जुड़ा यह मामला भी CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता में उनके रिटायरमेंट से पहले...

साल भर बाद भी सबरीमाला के सवाल बरकरार, आस्था को भौतिकतावादी समाजशास्त्र से बचाने की ज़रूरत

आस्था नितांत निजी विषय है। सार्वजनिक जीवन और समाज जिस तर्क और भौतिक नियम से चालित होते हैं, उनसे आस्था समेत निजी विषयों के नियम-कानून नहीं बन सकते। नियम सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए होते हैं जो समाज और सार्वजनिक क्षेत्र में लागू होते हैं।

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