30 अक्टूबर को बीजेपी विधायक दल के नेता का चुनाव होना है। इसके लिए भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुंबई जाएँगे। कयास हैं कि विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद वे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिल सकते हैं।
“बीजेपी रोटेशन आधारित सीएम पद के लिए सहमत नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री का पद शिवसेना को दिया जा सकता है। आदित्य ठाकरे के लिए उपमुख्यमंत्री पद पर शिवसेना को मान जाना चाहिए। फडणवीस मुख्यमंत्री का पद सँभाले।”
क्षेत्र विशेष तक सीमित शिव सेना को एहसास है कि हालिया उभार मोदी की लोकप्रियता की बदौलत है। भाजपा से अलग होने का नतीजा भी वह 2014 के विधानसभा और 2017 के बीएमसी चुनाव में भुगत चुकी है। देर-सबेर उसका लौटना तय है। तब तक उसके राजनीतिक फुफकार के मजे लीजिए!
सांसद ओम राजे के पिता पवन राजे निंबालकर कॉन्ग्रेस के नेता थे। साल 2006 में 13 जून को मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे के पास उन्हें गोली मार दी गई थी। इस मामले में लोकसभा के पूर्व सांसद पद्मसिंह पाटिल आरोपित हैं।
‘‘आपको इस बात का एहसास करने में लंबा वक्त लगा कि बाला साहब ठाकरे को गिरफ्तार करना एक भूल थी। अगर आपके आँसू सच्चे हैं तो आपको उनकी गिरफ्तारी पर माफी माँगनी चाहिए।’’
आदित्य चुनाव मैदान में उतरने वाले पहले ठाकरे हैं। उनके चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद से ही कई तरह के कयास लग रहे हैं। पिछले दिनों महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा था कि आदित्य को डिप्टी सीएम बनाने में उन्हें खुशी होगी।
आदित्य ठाकरे ट्विटर पर लिखा कि मेट्रो के जिस कार्य को गर्व से किया जाना चाहिए था, उसे धूर्तता के साथ रात के अंधेरे में चोर-छिपे किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को पेड़ काटने की जगह पीओके में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने की सलाह दी।
शाहरुख़ ने धोखे से शिवसेना नेता नंदवंशी को स्थानीय टिम्बर मार्केट में बुलाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब शिवसेना नेता वहाँ पहुँचे तो मुगलईपुरा निवासी शाहरुख़ और उसके 5 साथियों ने धारदार हथियारों से उन पर हमला कर दिया। इस हमले में उनकी मौत हो गई।
कभी बाल ठाकरे ने ऐलान किया था वह व्यक्तिगत तौर पर जीवन में कभी भी किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। उनके बेटे उद्धव ठाकरे ने भी जीवन में कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। लेकिन इस बार यह टूट रहा है, मतलब दिलचस्प होगा यह चुनावी समर!
उद्धव ठाकरे ने कहा,"मुझे नेहरू को वीर कहने में गुरेज नहीं होता यदि वह 14 मिनट भी जेल के भीतर सावरकर की तरह रहे होते। सावरकर 14 वर्षों तक जेल में रहे थे।" साथ ही कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी को भी उन्होंने निशाने पर लिया।