दुनिया भर में वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में अपनी भारी भागीदारी सुनिश्चित करने से पहले तबलीगी जमात से जुड़े लोगों ने आतंकवादी हमलों में नियमित रूप से भाग लिया। 2017 के लंदन ब्रिज हमले में हमलावरों में से एक, यूसुफ ज़ाग्बा को तबलीगी जमात से जुड़ा था। 2005 में लंदन बम धमाकों को अंजाम देने वाले 7/7 आतंकवादियों के सरगना मोहम्मद सिद्दीकी खान और सहयोगी शहजाद तनवीर को भी तबलीगी जमात से जुड़ा था।
लश्कर और आईएसआई ने मिलकर बनाया TRF जेके। मकसद उत्तरी कश्मीर में कुछ खास लोगों की हत्या और सुरक्षाबलों पर हमले। लेकिन, यह संगठन अपने मंसूबों में कामयाब हो पाता उससे पहले ही उसके पूरे मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया गया है।
तानिया आइएस की तर्ज पर भारत में इस्लामिक राज्य की स्थापना करना चाहती थी। उसका सहयोगी मनाजीरुल इस्लाम भी पकड़ा गया है। वह भी तानिया की तरह छात्र है। इस्लाम भी लगातार पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में था।
21 साल की तानिया ने 10 साल पहले घुसपैठ किया। अरबी लिटरेचर की एमए फाइनल ईयर की यह छात्रा दो साल से लश्कर के लिए सक्रिय तौर पर काम कर रही थी। आतंकी संगठन के लिए भर्तियॉं करने से लेकर संवेदनशील सूचनाएँ जुटाने तक हर काम में वह संलिप्त थी।
वायुसेना जवानों की हत्या तब की गई जब वे एयरपोर्ट जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे। एक मारुति जिप्सी और एक बाइक से 5 आतंकी वहाँ पहुँचे और एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों ने ख़ून से लथपथ जवानों के सामने डांस करते हुए जिहादी नारे भी लगाए थे।
NDTV की निधि राजदान 'Kashmirosint' नामक ट्विटर हैंडल से अक्सर बातचीत किया करती थीं। अब सामने आया है कि ये ट्विटर अकाउंट आतंकवादियों द्वारा संचालित किया जाता था और इसके द्वारा प्रोपेगंडा व फेक न्यूज़ फैलाया जाता था। दिल्ली दंगों में भी इसका इस्तेमाल किया गया।
गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला ने दाऊद से जुड़े कई राज उगले हैं। बताया है कि कैसे मिर्जा दिलशाद बेग की वजह से डी गैंग का सरगना बच गया। उसने थाइलैंड और बांग्लादेश में भी दाऊद की पकड़ का खुलासा किया है।
मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी किताब में खुलासा किया है कि किस तरह से ISI द्वारा मुंबई के डॉन से मिलकर देश में हथियारों, गोला-बारूद और धन के वितरण के लिए एक नेटवर्क तैयार किया गया। इसका सिर्फ एक मकसद था भारत की अखंडता और स्थिरता पर प्रहार।
जर्मनी में समुदाय विशेष को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। फ्रांस ने विदेशी इमामों को देश में नहीं आने देने का फरमान सुनाया है। ऐसा आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए किया गया है।