"एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष को राज्य में रैली से रोकने में असहिष्णुता नज़र नहीं आ रही। यदि ऐसा किसी ज़रूरी कारण से भाजपा शासित किसी राज्य में होता तो अब तक आपातकाल आ चुका होता।"
अमित शाह ने कहा कि इस युद्ध में एक तरफ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और गरीब कल्याण की विचारधारा है जबकि दूसरी तरफ स्वार्थ और सत्ता के लिए एकजुट लोगों का जमघट है, जिनके पास ना ही कोई नेता है और ना ही कोई नीति
2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा का यह बहुत बड़ा कदम माना जाएगा। इस फैसले से मालूम पड़ता है कि भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा नेतृत्व करने वाले लोगों के लिए जगह तैयार की जा रही है
भाजपा अध्यक्ष ने बैठक में कहा कि शिवसेना से गठबंधन के लिए प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन अगर चीजें सही नहीं रही तो हमे अकेले चुनाव में उतरने की तैयारी भी शुरू कर देनी चाहिए।