इसमें कहा कि रामराज्य कुछ और नहीं बल्कि शिर्क (अत्याचारी, गैर मजहबी) का झंडा और बाबरी विध्वंस तौहीद अर्थात न्याय के झंडे के पतन के अलावा और कुछ नहीं है।
अखिल भारत हिन्दू महासभा ने बाबरी मस्जिद ध्वंस के एवज में मुआवजे के रूप में मुस्लिम पक्ष को मिल रही 5 एकड़ ज़मीन के खिलाफ याचिका दायर करने जा रही है। इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए महासभा अदालत से इस आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए कहेगी।
“मुझे ये बताया गया कि मुझे केस से हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबियत ठीक नहीं है। ये बिल्कुल बकवास बात है। जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं लेकिन जो वजह दी गई है वह गलत है।”
जमीयत ने कहा है कि पर्यटकों और घुमंतुओं के रचित वृत्तांतों पर अदालत को भरोसा नहीं करना चाहिए। उसने कहा है कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने के कोई सबूत नहीं है। साथ ही इतिहास में हुई ग़लतियों को कोर्ट सुधार नहीं सकता है।
हाजी सईद ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए हुए एक यज्ञ में शामिल हुए थे। कार्यक्रम की फोटो सार्वजनिक होने के बाद उन्हें उनके धर्म से खारिज कर दिया गया। माफी मॉंगने के बाद भी उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी मिल रही है।
आजम खान ने इस दौरान अयोध्यावासियों को संदेश देते हुए कहा कि रामलला किसी एक नहीं, बाकी सब धर्मों के हैं। इसलिए अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद रामलला को पहली चुनरी वही चढ़ाई जाए, जिसे मुस्लिम कारसेवकों की ओर से आज पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास को दिया गया है।
"शिया वक्फ बोर्ड ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले से बिलकुल इत्तेफाक नहीं रखता, न ही वह एआईएमपीएलबी का हिस्सा है। रिज़वी ने यह भी कहा कि देश के मुसलमानों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।"