90 के दशक में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार पहली बार नहीं हुआ था। 14वीं शताब्दी में सूफी संतों से मिली सीख पर सिकंदर बुतशिकन ने इस काम को धड़ल्ले से किया था।
भारत का गौरव रहे 'मार्तंड सूर्य मंदिर' को कश्मीर में 'शैतान की गुफा' कहा जाता है, विशाल भारद्वाज की फिल्म 'हैदर' की वजह से। सिकंदर शाह मीरी ने किया था ध्वस्त।
कश्मीरी पंडितों से नेहरू ने कहा - "या तो शेख अब्दुल्लाह के साथ रहो, या जहन्नुम में जाओ।" राजीव गाँधी बोले - "फारूक मेरे दोस्त हैं, क्या करें।" पीड़ितों से सुनिए अनसुनी दर्द की दास्ताँ।