इन तीन महीनों में अगर वो EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें इस अवधि का ब्याज देना होगा। हालाँकि, इस वजह से उनके लोन चुकाने की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ जाएगी। सबसे जरुरी बात यह है कि EMI पर ग्राहकों को सिर्फ तीन माह की मोहलत मिली है, ना की लोन चुकाने से माफी!
पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से त्राहि-त्राहि कर रही है। लेकिन, चीन संक्रमण पर काबू पाने का जश्न मना रहा है। उसने वेट मार्केट फिर से खोल दिया है। खुलेआम कुत्ते, बिल्ली, बतख, खरगोश का माँस बिक रहा है। चमगादड़, केकड़े और छिपकलियाँ भी बेची जा रही हैं।
पुलिस से वहाँ उपस्थित लोग झड़प करने लगे। इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज कर के लोगों को वहाँ से भगाना पड़ा। जमालुद्दीन अंसारी, हुसैन ख़ान, सैयद नवाब कुरैशी, मोहम्मद मिराज शेख और अजहरुद्दीन शेख समेत अन्य लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है। इन सब पर राजस्थान एपिडेमिक डिजीजेज एक्ट लगाया गया है।
वुहान वायरस का संक्रमण रोकने के लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार के सभी प्रयास सफल रहें। इसके लिए राज्य सरकारों को बिना किसी छल-कपट के एकजुट होकर काम करना होगा। तभी अपने लोगों के जीवन की रक्षा की जा सकती है।
”हम भी यहीं के बाशिंदे हैं। हम भी पाकिस्तानी हैं। तो हमारा भी ख्याल करना चाहिए। जैसे सब लोगों के साथ कॉपरेट करते हैं। हमारे साथ भी करना चाहिए। हमारे पास भी छोटे-छोटे बच्चे हैं। हम भी गरीब लोग हैं। यहाँ के रहने वाले। मगर फिर हमारे साथ कोई कॉपरेट क्यों नहीं करता। दूसरे लोगों को दिया जाता है। हमें नहीं दिया जाता। ये गलत है न!”
महाराष्ट्र के अहमदनगर में 34 ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है। इनमें से 29 विदेशी हैं। झारखंड और असम में भी अब संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि हुई है। दोनों के तार निजामुद्दीन के मरकज से जुड़े हुए हैं।
4 महिलाएँ, 4 पुरुष। रहने वाले पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के। निजामुद्दीन में जमात के कार्यक्रम में शिरकत की। मिले छत्तीसगढ़ की एक मस्जिद से। जब मौके पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुॅंची तो उनका विरोध किया। उन्हें गुमराह करने की कोशिश की।
रायविंड स्थित मरकज में ठहरे 35 लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी, जिनमें से 27 कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। लाहौर स्गिटर रायविनफ़ में इस्लामी संगठन तबलीगी जमात ने एक मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें कम से कम 1200 लोग शामिल हुए थे।
पुलिस को एक किमी तक समुदाय विशेष के लोगों ने खदेड़ा। उनकी जीप तालाब में पलट दी। छतों से पत्थर फेंके गए। फायरिंग की बात भी कही जा रही। सब कुछ ऐसे हुआ जैसे हमले की तैयारी पहले से ही हो। उपद्रव के बीच जमाती भाग निकले।
जनता कर्फ्यू और प्रधानमंत्री द्वारा लॉकडाउन की घोषणा से काफी पहले दिल्ली में किसी तरह की गैदरिंग पर रोक लगा दी गई थी। तब न ट्रेनों का परिचालन रुका था और न ही बसों। बावजूद इसके नियम-कायदों की धज्जियॉं उड़ाकर जमात के लोग कानून को ठेंगा दिखाते रहे।