सेना के सूत्रों के हवाले से ANI ने दावा यह भी किया है कि घुसपैठ में पाकिस्तानी सेना ने भी अपनी सैन्य चौकियों से भारी कवर फायरिंग देते हुए सहयोग किया था।
मीडिया के इस ख़ास वर्ग का दर्द यह है कि इतना बड़ा ऐतिहासिक फैसला बिना किसी हिंसा और संघर्ष के इतने शानदार होम वर्क के साथ आखिर कैसे सम्भव हो गया? बुद्धिपीड़ितों को तो अभी भी यह उम्मीद है कि काश कहीं तो कुछ खूनखराबा हो, ताकि सरकार के निर्णय पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा सके।
ओवैसी ने रजनीकांत के उस बयान पर भी तंज कसा जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर क्रन्तिकारी निर्णय लेने के लिए मोदी-शाह की तुलना कृष्ण और अर्जुन की जोड़ी से की थी। ओवैसी ने पूछा कि अगर मोदी-शाह को कृष्ण-अर्जुन कहा जा रहा है तो पांडव और कौरव कौन हैं?
एक ट्विटर यूजर ने लिखा है कि शेहला जैसे लोगों को सुरक्षा कवर देना जनता के टैक्स का ग़लत इस्तेमाल है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि अब जब जम्मू-कश्मीर पुलिस केंद्र सरकार के अधीन होगी, क्या शेहला रशीद अपनी सुरक्षा वापस कर देगी?
शाह फैसल पहले भी धमकी देते रहे हैं। वे ख़ुद को अलगाववादी घोषित कर चुके हैं। एक बयान में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों को भड़काने की कोशिश करते हुए कहा कि वे तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक बेइज्जती का बदला नहीं ले लेते।
बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में तो ट्वीट का सही अनुवाद किया है, लेकिन उनकी इस रिपोर्ट का उस तथ्य/वीडियो से कोई लेना-देना नहीं है, जिसमें BBC ने बहुत सारे लोगों के विरोध करने और सुरक्षाबलों द्वारा उन पर पेलेटगन इस्तेमाल करने का दावा किया था।
इन मीडिया संस्थानों से 'कश्मीर में 10000 लोगों का विरोध प्रदर्शन' वाली खबर को लेकर असली वीडियो माँगा गया था। लेकिन अभी तक ये वीडियो नहीं दे पाए हैं। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा कि सभी लोग बीबीसी उर्दू के वीडियो का जिक्र कर रहे हैं लेकिन...
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार रोजाना स्थिति का जायजा ले रही है और ऐसे में स्थिति सामान्य होने का इंतजार किया जाए। अगर ऐसा ही रहा तो आप बाद में बताना हम तब मामले को देखेंगे। फिलहाल सुनवाई 2 हफ्ते के लिए टाल दी गई है।
डॉ. असगर विशेष दर्जा ख़त्म किए जाने से चार दिन पहले ही सूचना निदेशक नियुक्त की गईं थी। उनका काम लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक करना था। पिछले 8 दिन से उनका काम लोगों की परेशानियाँ सुनना और उसका समाधान निकालना है।