मुइया उस हमले का भी मास्टरमाइंड था जिसमें भाजपा विधायक मांडवी और उनके साथ पाँच पुलिस अधिकारियों का जीवन समाप्त हो गया था। विधायक के वाहन में उस समय IED विस्फोट हुआ था, जब वो दंतेवाड़ा ज़िले से गुजर रहे थे।
माओवादी कहीं ना कहीं अब ये बात जान और समझ गए हैं कि 'जल-जंगल-जमीन' का उनका नारा अब प्रासंगिक नहीं रहा है। इनके पोषक ये बात अच्छे से जानते है कि यदि अब यह 3 मुद्दे ही प्रासंगिक नहीं रहे, तो अब माओवंशी किस तरह से अपना अभियान आगे बढ़ाएँ? लोगों के बीच डर पैदा कर के ही ये आतंकवादी संगठन अब प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं।
गढ़चिरौली में नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट से सुरक्षा बलों को निशाना बनाया। इस हमले में 15 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। यह घटना तब हुई जब गढ़चिरौली के घने जंगलों के बीच से सी 60 कमांडो यूनिट का दस्ता गुजर रहा था।
यहाँ पर नक्सली पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। गत वर्ष यहाँ सरकारी भवन को विस्फोटक से उड़ाने से लेकर थाने पर हमले की घटनाएँ हो चुकी हैं।
सेक्टर अधिकारी संजुक्ता दिगल चुनाव कराने के लिए एक बूथ की तरफ जा रही थीं। उनके साथ अन्य मतदानकर्मी भी थे। जब उनकी गाड़ी एक जंगल से गुज़र रही थी तो रास्ते में उन्हें कोई संदिग्ध वस्तु पड़ी दिखी। उसकी जाँच के लिए जैसे ही वो लोग उतरे, नक्सलियों ने संजुक्ता को गोली मार दी।
नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी की चपेट में आने से भाजपा विधायक भीमा मंडावी की मौत हो गई। उनके साथ ही घटना में सुरक्षा में तैनात 5 जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गए।
गया में नक्सलियों ने भाजपा नेता और पूर्व जदयू विधान पार्षद अनुज कुमार सिंग के पैतृक आवास को डायनामाइट लगाकर उड़ा दिया। इस घटना के पूर्व नक्सलियों ने पहले अनुज कुमार के भाई अजय सिंह को जगाया और फिर उन्हें कब्जे में लेकर भाजपा नेता के घर की चाभी ले ली।