1757 में जाट राजकुमार जवाहर सिंह ने 5000 योद्धाओं के साथ मथुरा में अब्दाली की सेना के खिलाफ मोर्चा लिया। 9 घंटे तक चले युद्ध में जवाहर सिंह के 3000 योद्धा बलिदान हुए
35 साल पहले भी कश्मीर ने ऐसा ही नरसंहार देखा था। फर्क बस इतना है आज कश्मीर घूमने गए हिंदुओं को निशाना बनाया गया है और उस समय स्थानीय हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा गया था।
अमृता देवी समेत 363 बिश्नोइयों का बलिदान देख महाराजा अभय सिंह ने आदेश जारी किया कि बिश्नोइयों के ग्रामों के आसपास न पेड़ काटे जाएँगे और न जानवर मारे जाएँगे।
जवाहरलाल नेहरू महिला मित्र को पत्र में फ़ौज द्वारा 400 हिन्दुओं की हत्या पर ख़ुशी जताते हैं। महात्मा गाँधी बिहारी हिन्दुओं को 'पापी' और 'कुकर्मी' कहते हैं। इस बौखलाहट का कारण क्या था?