कुणाल कामरा के शो में जब पत्रकारिता की 'सस्ती आलिया भट्ट' मनीषा पांडे पहुँची तो बेकाबू हो गई। अपने शो के पाकिस्तानी दर्शक होने का ऐसे बखान किया जैसे ये कोई 'तमगा' हो।
फालतू डिस्क्लेमर डाल कर पौराणिक पात्रों का मजाक बनाने वाला 'न्यूजलॉन्ड्री' क्या इस्लाम, जन्नत, 72 हूरों और दारू की नदी पर व्यंग्य करेगा? यहाँ तो तथ्य कहने पर 'सर तन से जुदा' हो जाता है, सोचिए व्यंग्य पर क्या होगा।