जब शिवा स्कूटी लेकर लौटा, तब मोहम्मद आरिफ ने 'प्रीति रेड्डी' का हाथ पकड़ा और केशवुलु ने उनके पाँवों को जकड़ लिया। नवीन ने पीड़िता का कमर पकड़ा और तीनों उन्हें उठा कर झाड़ियों में ले गए। पुलिस की रिपोर्ट में चारों आरोपितों के कुकर्मों का है पूरा विवरण।
लिंगाराम ने बताया कि दोनों पहली नज़र में ही संदिग्ध प्रतीत हो रहे थे। उनकी गतिविधियाँ संदेहास्पद होने के कारण लिंगाराम ने उन्हें पेट्रोल बेचने से इनकार कर दिया। गवाह लिंगाराम ने पुलिस को यह भी बताया कि वो आरोपितों को सामने देखते ही पहचान सकते हैं। इसके बाद ही...
रात के सवा नौ बजे जब डॉ. प्रीति ने अपनी बहन को फ़ोन किया था, उसी समय आरिफ़ ने उनके पास आकर मदद की पेशकश की थी। टोल प्लाजा पर स्कूटी खड़ी करते देख ही वह अपने साथियों के साथ रेप और मर्डर का प्लान बना चुका था।
लगभग 35-वर्षीया महिला की लाश की प्रारम्भिक जाँच में पुलिस को संदेह है कि उसने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसकी लाश सिद्दुलागट्टा रोड पर एक सुनसान जगह पर पड़ी मिली थी। पुलिस ने बताया कि महिला की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी।
पड़ोसी जीशान ने इस घटना को तब अंजाम दिया जब पीड़िता घर में अकेली थी। उसे 22 नवंबर को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नौ दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद वह जिंदगी की जंग हार गई।
रंगा रेड्डी जिला बार काउंसिल इकलौती संस्था नहीं है, जिसने आरोपितों की सहायता से इनकार किया है। महबूबनगर बार काउंसिल ने भी आरोपितों को न्यायिक सेवाएँ देने से इनकार कर दिया था।
"रिज़वान ने बंदूक की नोक पर रेप किया। जब शोर मचाई तब मेरे पिता पहुँचे और उसे रंगे हाथों पकड़ा।" 16 साल की बलात्कार पीड़िता के इस बयान का रिजवान के वकील ने हाई कोर्ट में यह कहकर विरोध किया कि लड़की को सेक्स करने की आदत थी और आरोपित ने उसे आंतरिक या बाहरी चोट नहीं पहुँचाई।
"मुझे इस घटना का दुख है। लेकिन ये दुर्भाग्य की बात है कि पीड़िता एक डॉक्टर थी, पढ़ी-लिखी थी, फिर भी उसने ऐसे समय में पहले अपनी बहन को कॉल क्यों किया? उसने 100 नंबर पर कॉल क्यों नहीं किया। अगर वो 100 नंबर पर कॉल करती तो शायद उसे बचाया जा सकता था।"