शीर्ष नेतृत्व की मोदी घृणा ने कॉन्ग्रेस को इतना कुंठित कर दिया है कि वह राजनीति के सामान्य तकाजे से भी दूर जा चुकी है। इस नियति को उसने खुद चुना है। अतीत के अनुभवों से नहीं सीखा। न ही यह याद रख पाई कि दिल्ली की सत्ता में AAP उसे बेदखल कर आई थी न कि BJP को।
राहुल गाँधी की नर्वसता उस दिन साफ़ देखी गई कि, जब राहुल गाँधी दिल्ली की इकलौती अपनी जनसभा में बोल बैठे, "6 महीने बाद मोदी को देश के युवा डंडा मारेंगे।" दिल्ली में कॉन्ग्रेस की इकलौती जनसभा में दिया राहुल गाँधी का यह बयान पार्टी के गले की फाँस बन गया, जिसे लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं को सफाई तक देनी पड़ी।
शाहीन बाग सहित पूरी दिल्ली में लोगों ने पहचान पत्र दिखाते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में यूजर्स ने चुटकी ली कि जो लोग कागज दिखाने से इनकार करते हैं आज वह पहचान पत्र लेकर लाइन में लगे हैं।
राजनैतिक पंडितों के दावे तब भी आज की तरह ही AAP के हक में थे। आप ऐसे ही अति आत्मविश्वास में थी। तब भी वोटों की गिनती 11 तारीख को ही हुई थी। जब नतीजे आए तो सारे दावे, सारा यकीन रेत की महल की तरह ढह गया था।
दिल्ली में 2013 और फिर 2015 में मतदान का नया रिकॉर्ड बना। दोनों ही बार आम आदमी पार्टी की सरकार बनी। सबसे कम वोटिंग 1998 में हुई थी, जब दिल्ली की सत्ता बीजेपी के हाथ से निकल कर कॉन्ग्रेस के पास चली गई थी।
बीजेपी ने अपनी शिकायत में कहा है कि AAP समर्थकों ने भ्रामक रीक्रिएशन के जरिए भाजपा की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। इस स्पूफ में अमित शाह को फिल्म के खलनायक गब्बर के रूप में दिखाया गया है तो वहीं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी, विजय गोयल और सांसद गौतम गंभीर को डाकुओं के रूप में चित्रित किया गया है।
कोलकाता में CAA के समर्थन में बीजेपी द्वारा कैलाश विजयवर्गीय और मुकुल राय के नेतृत्व में रैली निकाली जा रही थी। लेकिन राज्य की ममता बनर्जी सरकार की पुलिस ने रैली को रुकवाया और उन्हें हिरासत में ले लिया।
2015 में करीब 67% मतदान हुआ था। इस बार भी ऐसा हुआ तो एक करोड़ के करीब वोट पड़ेंगे। दिल्ली में इस वक्त भाजपा के सदस्यों की संख्या 62 लाख के करीब है। इन सभी ने बीजेपी के लिए वोट डाले तो 11 फरवरी को करिश्मा तय है।
कॉन्ग्रेस के एक सांसद हंगामा करते हुए सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्ति तक पहुँच गए और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को घेर लिया। सांसद मणिकम टैगोर आक्रामक ढंग से डॉ हर्षवर्धन के बहुत नजदीक आ गए। जिसके बाद लोकसभा में हाथापाई की नौबत तक आ गई।
जस्टिस कैत ने सुनवाई करते हुए कहा कि दोषियों ने सजा में देरी करने की रणनीति अपनाई है। इसलिए मैं सभी दोषियों को 7 दिनों के भीतर उनके कानूनी उपचार के लिए निर्देशित करता हूँ, जिसके बाद अदालत को उम्मीद है कि अधिकारियों को कानून के अनुसार काम करना होगा।