तुम्हारे (मुस्लिम) 'मर्द' 'हैंडसम' और 'खूबसूरती' नहीं है आरफा और निवेदिता, वे महिलाओं को सुरमा लगाकर नहीं फँसाते बल्कि माथे पर टीका और हाथ में कलावा पहनकर आते हैं।
कुणाल कामरा के शो में जब पत्रकारिता की 'सस्ती आलिया भट्ट' मनीषा पांडे पहुँची तो बेकाबू हो गई। अपने शो के पाकिस्तानी दर्शक होने का ऐसे बखान किया जैसे ये कोई 'तमगा' हो।
आरफा ने 'लव जिहाद' को सीधे-सीधे हिंदू महिलाओं का अपमान बता दिया। मतलब जो भी इस मुद्दे पर सवाल उठा रहा है, वो महिलाओं को नासमझ मान रहा है, यहाँ यही बताने की कोशिश की गई।
दिल्ली के उत्तम नगर में तरुण कुमार की मुस्लिमों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी और द वायर इसे 'मामूली विवाद' बता रहा है। हिंदुओं के 'त्रिशूल दीक्षा' कार्यक्रम पर आर्टिकल लिख द वायर ने इसे डर जैसा बता दिया।
अस्थाई सीजफायर होते ही ईरान को विश्वगुरु साबित करने में जुट गईं। क्यों? क्योंकि तुम्हारा सहोदर पाकिस्तान वहाँ दलाली करने लगा था। बात अब उम्माह की हो गई है ना?
गंगा सबकी है ये बात सही है लेकिन यहाँ कुछ फेक न्यूज फैलाई जा रही है इसलिए सबसे पहले फैक्ट्स जानने जरूरी हैं। वाराणसी में जो हुआ वो मुस्लिम युवकों ने जानबूझकर किया।
आरफा को भारत के 'हिंदू राष्ट्र' कहलाए जाने से दिक्कत है, क्योंकि आरफा के दिमाग में गलतफहमी है कि भारत में संस्कृति और सभ्यता का विकास मुगलों के आने के बाद हुआ।