मोहम्मद कासिम भी ज्योति मल्होत्रा से जुड़े पाकिस्तानी एंबेसी में तैनात ISI एजेंट एहसान-उर-रहमान उर्फ दानिश के संपर्क में था। वो दानिश को सेना से जुड़ी जानकारियाँ देता था।
उच्च न्यायालय ने इसे "छात्रवृत्ति की आड़ में सरकारी तंत्र द्वारा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग" का मामला बताते हुए संज्ञान लिया। पहले राजीव गाँधी के नाम पर थी योजना।