राउत की मानें तो गुरुवार दोपहर तक महाराष्ट्र में सरकार गठन की तस्वीर साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अब ज्यादा इतंजार करने की ज़रूरत नहीं है, सरकार गठन में बस 5-6 दिन और लगेंगे।
महाराष्ट्र में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। आज राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस संबंध में रिपोर्ट रखेंगे। एनसीपी और कॉन्ग्रेस के नेताओं के बीच होने वाली बैठक पर भी सबकी नजरें टिकी है। शिवसेना ने अपने सभी विधायकों को आधार कार्ड के साथ मुंबई तलब किया है।
महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना के एनसीपी से गठबंधन की भी खबर सामने आई थी। मगर इस पर एनसीपी ने खुद सोनिया गाँधी और उनकी पार्टी का मुँह ताकना शुरू कर दिया।
हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को निर्मम हत्या कर दी गई थी। सोनिया को पत्र लिखने वाले जमीयत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपितों के परिजनों से मुलाकात कर मदद का भरोसा दिलाया था।
जब शरद पवार से पूछा गया कि क्या सोनिया गाँधी महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ मिल कर सरकार गठन करने के ख़िलाफ़ हैं, पवार ने कहा कि सरकार गठन को लेकर कोई चर्चा ही नहीं हुई। उन्होंने कहा कि किसी अन्य तीसरे दल के बारे में चर्चा हुई ही नहीं।
शरद पवार ने अपने बयान से शिवसेना को सकते में डाल दिया है। पवार ने कहा कि सरकार का गठन कैसे होना है, इस बारे में भाजपा और शिवसेना सोचे। उन्होंने मीडिया में चल रही उस चर्चा को नकार दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि शिवसेना और एनसीपी मिल कर सरकार बना रही है।
“बीजेपी-शिवसेना ने हमारे खिलाफ चुनाव लड़ा था, तो फिर कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना का गठबंधन कैसे हो सकता है। शिवसेना और भाजपा अलग हैं। हम और कॉन्ग्रेस अलग हैं, उनको उनका रास्ता तय करना है।”
राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उद्धव ने 24 नवंबर को अयोध्या जाने का ऐलान किया था। पिछले साल उन्होंने राम मंदिर के लिए 'चलो अयोध्या' आंदोलन की शुरुआत की थी। नारा दिया था- पहले मंदिर फिर सरकार।
शिवसेना हिन्दुत्व के एजेंडे से पीछे हटने को तैयार है फिर भी सोनिया दुविधा में हैं। शिवसेना को समर्थन पर कॉन्ग्रेस के भीतर भी मतभेद है। ऐसे में एनसीपी सुप्रीमो के साथ उनकी आज की बैठक निर्णायक साबित हो सकती है।