Homeव्हाट दी फ*मटन में नहीं थी नल्ली, बिना दुल्हन वापस लौट गए बाराती: तेलंगाना में शादी...

मटन में नहीं थी नल्ली, बिना दुल्हन वापस लौट गए बाराती: तेलंगाना में शादी हुई रद्द, पुलिस के मान-मनौव्वल से भी नहीं बनी बात

पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने के लिए हस्तक्षेप किया, लेकिन दूल्हा पक्ष अपने फैसले पर अड़ा रहा। दूल्हा पक्ष के लोगों का कहना था कि नल्ली वाला मटन न मिलना उनका अपमान है।

तेलंगाना में लड़ाई-झगड़े के बाद एक शादी कैंसल हो गई और इसका कारण बना – मटन। ये हूबहू ऐसा ही हुआ, जो एक तेलुगू फिल्म में भी कभी दिखाया गया था। बाद में स्थिति ऐसी बन गई कि शादी ही रद्द करनी पड़ी। दरअसल, बाराती के स्वागत में दुल्हन के परिजनों ने मांसाहारी भोजन की व्यवस्था की थी। बारात में आए लोगों को मटन तो परोसा गया था, लेकिन उसमें बोन मैरो (हड्डी समेत मटन का वो पीस जिसे चूसा जा सके), जिसे नल्ली भी कहते हैं – वो मौजूद नहीं था।

मटन के साथ नल्ली न सर्व किए जाने के कारन बाराती भड़क गए। बारातियों को ये सब इतना बुरा लगा कि उन्होंने शादी ही कैंसल कर दी। तेलुगू फिल्म ‘बालागम’ में कुछ ऐसा ही दिखाया गया है। सबसे पहले इसे लेकर दूल्हा और दुल्हन के छोटे भाई के बीच विवाद हुआ। इसके बाद शादी ही रद्द हो गई। दुल्हन जहाँ निजामाबाद जिले की रहने वाली थी, वहीं दूल्हा जागतियाल जिले का है। दुल्हन के घर पर ही दोनों पक्षों के परिजनों की मौजूदगी में सगाई हुई थी।

इसके बाद दोनों परिवारों ने भव्य और परंपरागत तरीके से शादी की योजना बनाई। बारात के स्वागत के लिए मटन की व्यवस्था की गई थी। शादी में बाकी सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक से मटन के साथ बोम मैरो न मिलने के कारण विवाद पैदा हो गया। दोनों पक्षों में फिर झगड़ा शुरू हो गया। मामला थाने तक भी पहुँच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने के लिए हस्तक्षेप किया, लेकिन दूल्हा पक्ष अपने फैसले पर अड़ा रहा। दूल्हा पक्ष के लोगों का कहना था कि नल्ली वाला मटन न मिलना उनका अपमान है।

दूल्हे के घर वाले शादी रद्द कर के निकल गए। पुलिस भी इस बात से सन्न रह गई कि सिर्फ नल्ली वाले मटन के कारण शादी कैंसल हो गई। दूल्हा पक्ष का कहना था कि दुल्हन पक्ष ने जानबूझकर उनसे ये बात छिपाई कि मेनू में बोन मैरो नहीं है। बता दें कि मार्च 2023 में ही तेलुगू फिल्म ‘बालागम’ रिलीज हुई थी। इसमें भी कुछ ऐसा ही दिखाया गया है कि नल्ली वाला मटन नहीं मिलता है तो फिर शादी ही रद्द हो जाती है। अब वास्तविकता में कुछ ऐसा ही हुआ है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -