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किस बच्चे को बनाया जाएगा ईसाई, यह परीक्षा के नंबर से होता था तय: बरेली में 3 की गिरफ्तारी के बाद खुलासा, जानिए कैसे चल रहा था धर्मांतरण का रैकेट

ईसाई इतिहास की इस परीक्षा में हासिल किए जाने वाले नम्बरों के आधार पर भी आरोपित धर्मान्तरण के लिए बच्चों का चुनाव करते थे। जिस बच्चे को जितने ज्यादा नंबर मिलते थे उनको उतनी ही अधिक सुविधा और सहूलियत दी जाती थी। इस काम के लिए बाहर से फंडिंग हो रही थी जिसके स्रोत की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में रविवार (28 जुलाई, 2024) को ईसाई धर्मान्तरण के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ था, तब पुलिस ने नाबालिग बच्चों को ईसाई बनाने के आरोप में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान प्रेम जायल, विनोद और नितिन के तौर पर हुई थी। बाद में पुलिस ने इस रैकेट की जाँच की तो कई नए और बड़े खुलासे हुए। बताया जा रहा है कि बच्चों को ईसाई धर्म का इतिहास पढ़ा कर उसी से संबंधित इम्तिहान लिया जाता था। इस एग्जाम में मिले नंबरों के ही आधार पर नाबालिगों का धर्म परिवर्तन करवाया जाता था

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बरेली के इज्जतनगर थानाक्षेत्र के इस मामले में आरोपित पादरी अपने साथियों सहित पहले गरीब बच्चों को चिन्हित किया करता था, फिर इन बच्चों को खाने-पीने की चीजें देकर मेलजोल बढ़ाया जाता था। बच्चों के घर जाने पर ये आरोपित खुद को धर्म उपदेशक और शिक्षक बताया करते थे, फिर इनके परिवार से मिलकर उन्हें बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं आदि का लालच दिया जाता था। शुरुआत में गरीब बच्चों को पढ़ाई के नाम पर अपने ठिकाने पर बुलाया जाता था। बच्चों को नए-नए खेल भी खिलाए जाते थे जिस से वो बार-बार वहाँ जाना चाहते थे।

यहाँ उन सभी को पहले ईसाई इतिहास बताया जाता था। बाद में इसी इतिहास से सवाल बना कर उन बच्चों का एग्जाम लिया जाता था। आरोप है कि ईसाई इतिहास की इस परीक्षा में हासिल किए जाने वाले नम्बरों के आधार पर भी आरोपित धर्मान्तरण के लिए बच्चों का चुनाव करते थे। जिस बच्चे को जितने ज्यादा नंबर मिलते थे उनको उतनी ही अधिक सुविधा और सहूलियत दी जाती थी। इस काम के लिए बाहर से फंडिंग हो रही थी जिसके स्रोत की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। पुलिस न सिर्फ आरोपितों के खातों बल्कि उनकी कॉल रिकॉर्ड भी निकलवा रही है। इनके पास मिले ईसाई साहित्यों की भी जाँच करवाई जा रही है।

क्या है FIR में

गौरतलब है कि इन सभी आरोपितों को गुलशन कुमार नाम के शिकायतकर्ता की तहरीर पर गिरफ्तार किया गया है। गुलशन कुमार का आरोप है कि आरोपित पहले भी कई बच्चों को ईसाई बना चुके हैं। उनको इस साजिश की भनक लगी तो वो भी आरोपितों की सभा में बैठने गए, तब बच्चों के साथ पादरी प्रेम जोनल ने उन्हें भी ईसाई बनने का लालच दिया। आरोपितों ने गुलशन को नीले कवर वाली एक किताब दी जिस पर सुनहरे रंग से ‘पवित्र शस्त्र भजन संहिता और नीति वचन’ लिखा हुआ था।

पादरी जोनल ने गुलशन के हाथ में किताब पकड़ाते हुए उनसे कहलवाया, “हे ईशु भगवान। मैं आपकी शरण मे आ गया हूँ और ईसाई धर्म कबूल करता हूँ।” पीड़ित के मुताबिक उनके साथ आरोपितों ने धोखा और विश्वासघात किया है। बकौल पीड़ित इस हरकत से उनकी धार्मिक भावनाएँ आहात हुई हैं। पुलिस ने इस शिकायत पर तीनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 299 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/5(1) के तहत कार्रवाई की है। मामले में जाँच व आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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