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विदेश से करोड़ों की फंडिंग, निशाने पर गरीब-दिव्यांग एवं महिलाएँ: देश भर में धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले मौलाना कलीम और मौलाना उमर सहित 12 को उम्रकैद

मुजफ्फरनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र स्थित फुलत गाँव का कहने वाला कलीम सिद्दीकी पिकेट इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की शिक्षा ली है। इसके बाद दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने लगा। बीच में ही पढ़ाई छोड़कर वह इस्लामी स्कॉलर बन गया और इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने लगा।

देश में अवैध धर्मांतरण का रैकेट चलाने वाले वाले मौलाना कलीम सिद्दीकी और उमर गौतम सहित 12 आरोपितों को उम्रकैद की सजा मिली है। इसके अलावा, चार दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। यह सजा लखनऊ स्थित NIA की कोर्ट ने सुनाई है। कोर्ट ने इन सभी को कल दोषी करार दिया था और सजा का ऐलान बुधवार (11 सितंबर 2024) को किया।

कोर्ट ने मंगलवार (10 सितंबर 2024) को मौलाना उमर गौतम और मौलाना कलीम सिद्दीकी सहित 16 आरोपियों को दोषी करार दिया था। वहीं, इदरीस कुरैशी नाम के आरोपित को हाई कोर्ट से स्टे मिल गया था। NIA-ATS कोर्ट ने इन्हें धारा 417, 120B, 153A, 153B, 295A, 121A, 123 और अवैध धर्मांतरण की धारा 3, 4, और 5 के तहत दोषी पाया है।

इन धाराओं में दोषियों को 10 साल से लेकर अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। NIA-ATS कोर्ट ने मौलाना उमर और मौलाना कलीम समेत 12 दोषियों को अधिकतम सजा उम्रकैद की सुनाई है। वहीं, जिन चार दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है, उनके नाम हैं – राहुल भोला, मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान, मोहम्मद सलीम, कुणाल अशोक चौधरी उर्फ आतिफ।

ये सभी दोषी उत्तर प्रदेश एवं अन्य जगहों पर धर्मांतरण का रैकेट चलाते थे। ये लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करते थे। ये दोषी लोगों को उनके मूल धर्म के बारे में भ्रम, नफरत और भय पैदा करके उनका ब्रेनवॉश करते थे। इसके बाद उन्हें इस्लाम की खूबियाँ बताते थे और मुस्लिम बनाते थे। इन सबको राज्य के अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किया गया था।

ये गिरोह उन लोगों को अपना टारगेट बनाते थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग होते थे। इसके अलावा महिलाएँ भी इनके निशाने पर होती थीं। इनके रैकेट को चलाने के लिए इन्हें खाड़ी सहित दुनिया भर से पैसे आते थे। बहला-फुसलाकर, डरा धमकाकर और दबाव बनाकर धर्मांतरण कराते थे। धर्मांतरण करने के बाद उन पर दबाव बनाया जाता था कि वो और हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराएँ।

यह गिरोह इस बात का भी ख्याल रखता था कि धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बने लोग फिर से अपने धर्म में वापसी ना कर लें। इसके लिए उन्हें विशेष तौर पर ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें देश के अलग-अलग मस्जिदों एवं मदरसों में रखा जाता था। जो इस्लाम छोड़ने की कोशिश करते, उन्हें धमकी भी दी जाती थी।

मुजफ्फरनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र स्थित फुलत गाँव का कहने वाला कलीम सिद्दीकी पिकेट इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की शिक्षा ली है। इसके बाद दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने लगा। बीच में ही पढ़ाई छोड़कर वह इस्लामी स्कॉलर बन गया और इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने लगा।

कलीम सिद्दीकी दिल्ली के शाहीन बाग में 18 साल से अपना ठिकाना बना रखा था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 22 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 562 दिनों तक जेल में रहने के बाद अप्रैल 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी। जमानत के दौरान उस पर कई तरह की पाबंदियाँ भी लगाई गई थीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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