(लेफ्ट, राइट और सेंटर: शुक्रवार, 19 सितंबर, 2025)
इस लेखक ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दो भविष्यवाणियाँ की थीं। उस समय मीडिया और यहाँ तक कि जो लोग मीडिया की हर बात को पत्थर की लकीर मानते थे, वे भी कह रहे थे कि मोदी 2014 में जैसे तैसे प्रधानमंत्री तो बन गए हैं, लेकिन उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिलेगा। भाजपा हार जाएगी।
ऐसे माहौल में पहली भविष्यवाणी यही थी कि मोदी को 300 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।
मेरी दूसरी भविष्यवाणी यह थी कि सवाल यह नहीं है कि मोदी जीतेंगे या नहीं। सवाल यह है कि मोदी को दूसरा कार्यकाल मिलने से बौखलाया विपक्ष क्या करेगा? वे अराजकता फैलाएँगे। देश में गृहयुद्ध की स्थिति पैदा करेंगे।
सौभाग्य से पहली भविष्यवाणी सच साबित हुई। 303 सीटें प्राप्त हुईं। और दुर्भाग्य से, दूसरी भविष्यवाणी भी सच साबित हुई। अराजकतावादियों ने सरकार के खिलाफ किसान आंदोलन और शाहीन बाग का प्रदर्शन किया।
राहुल गाँधी को ऐसा लगता है कि 1978 में, जब जनता पार्टी सत्ता में थी, तब दो युवा कॉन्ग्रेसी गुंडों ने खिलौना पिस्तौल और क्रिकेट बॉल दिखाकर इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-410 का अपहरण कर लिया था और मोरारजी सरकार से दादी इंदिरा और चाचा संजय पर लगे आरोप वापस लेने और इस्तीफा देने की माँग की थी। वैसे ही यह भी कह रहा है कि वह ‘हाइड्रोजन बम’ दिखाकर मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। उस समय कॉन्ग्रेस ने कहा था कि भोलानाथ पांडे और देवेंद्र पांडे का कॉन्ग्रेस के साथ कोई सम्बन्ध नहीं था। कॉन्ग्रेस ने सरासर झूठ बोला था। 1980 में जब इंदिरा गाँधी दोबारा प्रधानमंत्री बनीं, तब दोनों पांडे बंधु कॉन्ग्रेस के टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए थे।
कर्नाटक की आलंद विधानसभा सीट पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाने के लिए राहुल गाँधी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद, उनके ‘हाइड्रोजन बम’ की क्षमता सबको पता चल गई है। इस आदमी के पास फटी हुई एक पिस्तौल भी नहीं है। पिछले कर्नाटक चुनाव में, यानी 2023 में अगर भाजपा ने ‘वोट चोरी’ की थी, तो कॉन्ग्रेस कैसे जीत गई? इस सवाल का जवाब राहुल गाँधी के पास नहीं है। जब एक रिपोर्टर ने पूछा कि ‘वोट चोरी’ के सबूत लेकर कोर्ट जाओगे? तब इस सवाल का जवाब देते हुए राहुल गाँधी ने गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में कहा कि ‘यह मेरा काम नहीं’ है।
तो भई, तुम्हारा काम क्या है? लोगों को भड़काना? यह आदमी ‘वोट चोरी’ का बेबुनियाद मुद्दा इस इरादे से उठा रहा है कि तुम्हारी बकवास से नाराज भारत की जनता सड़कों पर उतर आए, संसद में घुस जाए, प्रधानमंत्री आवास में घुस जाए और बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात पैदा कर दे।
राहुल गाँधी की दाल किसी मुद्दे पर नहीं गलती। उन्होंने जाति जनगणना की माँग करके पिछड़े वर्गों को ऊपर उठाने की कोशिश की। सरकार ने मुसलमानों की दर्जनों जातियों की भी गिनती करने की घोषणा करके हिंदुओं में फूट डालने की चाल को नाकाम किया। इतना ही नहीं, सरकार ने बिहार के अलावा पूरे देश की मतदाता सूची का सत्यापन करने की भी घोषणा की। जब विपक्ष ने विशेष जाँच भूमिका (SIR) का विरोध किया, तो प्रधानमंत्री ने बेहद सख्त और तीखे स्वर में कहा कि मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाने के सरकार के संकल्प को कोई नहीं तोड़ सकता।
राहुल ने अंबानी-अडानी पर निशाना साधा और सूट-बूट वाली सरकार का दिण्डक चलाया। सभी न्यायिक व्यवस्थाओं ने राहुल द्वारा दोनों औद्योगिक घरानों पर लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है। बस, बची-कुची कसर सेबी ने पूरी कर दी, जिसने हिंडनबर्ग मामले में पलटी मारते हुए गौतम अडानी को क्लीन चिट दे दी है।
ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने का आइडिया भी बहुत चला। 2004 और 2009 में EVM से चुनाव हुए और कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। उस समय ईवीएम हैक नहीं हुई थीं, लेकिन मोदी के सत्ता में आने के बाद ईवीएम में घोटाले होने लगे?
क्या चुनाव आयोग मोदी का खिलौना है? 2014 के चुनाव में कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। केंद्रीय चुनाव आयोग के आयुक्त कॉन्ग्रेस द्वारा चुने गए थे। इसके बावजूद, भारतीय जनता पार्टी को 303 सीटें मिलीं। अगर चुनाव आयोग और ईवीएम हैक करना संभव है, तो भाजपा को 2024 में 400 पार करने का मौका क्यों नहीं मिला? उसे 240 सीटों पर क्यों सिमटना पड़ा?
यहाँ तक कि शातीत सोनिया के बेटे राहुल को भी पता है कि वह झूठे आरोप लगा रहे हैं। और कॉन्ग्रेस के कदम चूमने की आदी हो चुकी दरबारी मीडिया, राहुल के इन झूठों को अपने तंत्र के जरिए फैला रही है।
कुछ सड़कों के उबड़-खाबड़ होने की छोटी-मोटी शिकायतों के अलावा, भारत के मतदाताओं को मोदी सरकार से और कोई शिकायत नहीं है। लेकिन मैंने दुनिया के किसी भी देश में ट्रैफिक जाम के कारण दंगे होने और सरकार गिरने की बात नहीं सुनी।
मोदी सरकार का 11 साल का रिकॉर्ड उज्ज्वल है। लोग खुश हैं। राजनीतिक स्थिरता है। असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाए गए दंगे नियंत्रण में हैं। कुछ इलाकों में सरकार की तमाम सुविधाओं का लाभ उठाने के बावजूद, कुछ मुस्लिम मतदाता मोदी को वोट नहीं देते, फिर भी मोदी सबका साथ सबका विकास पर अड़े हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश के कई समझदार मुस्लिम शांति से रहने के लिए मोदी समर्थक बन गए हैं।
कुल मिलाकर, देश ठीक चल रहा है। जो भी छोटी-मोटी शिकायतें हैं, वे नगण्य हैं। ऐसी छोटी-मोटी शिकायतें आपके परिवार में, दोस्तों के बीच, सोसायटी की इमारतों में भी बनी रहेंगी। सरकारें बदलती रहेंगी, लेकिन ऐसी शिकायतें किसी न किसी रूप में जारी रहेंगी। पूरी दुनिया में ऐसी कमियाँ होना स्वाभाविक है।
राहुल गाँधी ये सब समझते हैं। उन्हें ये भी पता है कि अगर मोदी 2029 में फिर से प्रधानमंत्री बन गए, तो उनके जीते जी कॉन्ग्रेस कभी सत्ता में नहीं आएगी (मैं दुआ करता हूँ कि राहुल 125 साल जिएँ)।
2029 के चुनाव सिर्फ राहुल के लिए नहीं, सिर्फ कॉन्ग्रेस के लिए नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष के लिए आखरी मौका हैं। बंगाल चुनाव ममता बनर्जी के लिए भी आखिरी मौका है। एक ज्योतिषी ने तो यहाँ तक कह दिया है कि वह दोबारा नहीं चुनी जाएँगी। (ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों पर भरोसा नहीं होता, फिर भी इस ज्योतिषी के मुँह में घी-शक्कर डालने के लिए पैसे अलग रखे हैं मैंने।)
राहुल गाँधी के पास 1000 से ज्यादा दिन हैं- इस देश में अराजकता फैलाने के लिए, युवाओं को भड़काने के लिए, दलितों वगैरह को भड़काने के लिए और इन सबको सड़कों पर लाकर हालात बेकाबू करने की कोशिशें करने के लिए।
न तो कॉन्ग्रेस और न ही राहुल गाँधी के पास कोई तय दिशा, तय नक्शा या ठोस कार्यक्रम है, जिसके आधार पर वे यह दावा कर सकें कि देश बेहतर तरक्की कर सकता है। न ही उनके पास मोदी सरकार के खिलाफ एक भी सबूत है कि मौजूदा सरकार देश चलाने में सक्षम नहीं है।
राहुल नाम का नकली गाँधी अगले साढ़े तीन सालों में और जोर पकड़ने वाला है। कॉन्ग्रेस पार्टी प्लेट का बचा-खुचा खाना खाने की आदत वाले दरबारी मीडिया के जरिए वो ऐसी अफवाहें फैलाने जा रहे हैं कि अच्छे-अच्छे मोदी समर्थक भी डगमगा जाएँगे। राहुल गाँधी चाहते हैं कि मोदी सरकार उन्हें गिरफ्तार करे, वो चाहते हैं कि कोई विरोधी उन पर हमला करे। इसीलिए वो अभद्र बातें बोलते हैं। इसीलिए वो सरकार द्वारा दी गई जेड प्लस सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए घूमते रहते हैं।
मोदी सरकार यह सब समझती है। अगर मोरारजीभाई के शासनकाल में गृह मंत्री चरण सिंह की जिद पर इंदिरा गाँधी और संजय गाँधी गिरफ्तार न हुए होते, तो इस प्रतिशोधी माँ-बेटे की जोड़ी को ‘शहीद’ का दर्जा न मिलता, जनता की सहानुभूति न मिलती। लेकिन कॉन्ग्रेस- एक विधवा की गिरफ्तारी, एक होनहार नौजवान की गिरफ्तारी पर प्रचार करके सत्ता में वापस आ गई।
मोदी अतीत को दोहराना नहीं चाहते। मोदी यह भी समझते हैं कि भगवान ना करे और अगर 2029 में भारतीय जनता पार्टी हार जाती है, तो कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दल सत्ता में आ जाएँगे और न सिर्फ भाजपा, बल्कि RSS भी आग में झोंक दिया जाएगा। वे मोदी समेत सभी हिंदुओं को जेल में डाल देंगे, चुनाव आयोग को अपने अधीन कर लेंगे और भारत के सभी राज्यों में गैर-भाजपा सरकारें बना लेंगे।
वे ऐसी स्थिति पैदा कर देंगे कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करना पड़ेगा। देश और दुनिया भर में मोदी समर्थक ऐसा माहौल फैलाएँगे कि मोदी-काल भ्रष्ट था, खोखला था, जनता की आँखों में धूल झोंककर अपनी कमजोरियों को छुपा रहा था। इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की तरह राहुल गाँधी भी न्यायपालिका की खुलेआम अनदेखी करेंगे और देश का खजाना अपने भ्रष्ट साथियों के लिए खोल देंगे।
2029 के चुनावों से पहले, राहुल गाँधी विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर ऐसा निराशाजनक माहौल बनाएँगे कि यह देश नरक में चला गया है, मोदी सरकार विफल हो गई है, तीन कार्यकाल मिलने के बावजूद, मोदी ने देश को 50 साल पीछे धकेल दिया है, युवाओं की उम्मीदें टूट गई हैं, गरीब और भी गरीब हो गए हैं, मोदी ने हिंदू-मुस्लिमों को बाँटकर राज किया है, देश का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना तार-तार हो गया है, देश में लोकतंत्र की बहाली जरूरी है। और इन सभी आरोपों को साबित करने वाला ‘हाइड्रोजन बम’ राहुल गाँधी की जेब में होगा।
राहुल गाँधी देश की सभी संवैधानिक शक्तियों का अनादर करके- संसद, न्यायपालिका और सरकारी तंत्र चलाने वाले सभी लोगों को झूठा बताकर, भारत के नागरिकों में मोदी के प्रति अविश्वास पैदा करने की एक वैश्विक साजिश का अहम हिस्सा हैं। ये सभी नोटबंदी से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक, मोदी की तमाम उपलब्धियों पर संदेह जताकर देश की जनता को मूर्ख बनाने की बेकाबू कोशिश कर रहे हैं।
खतरनाक खेल एक जोखिम भरा, लापरवाह और लापरवाह काम है जिसके हमेशा नकारात्मक परिणाम होते हैं और इससे बहुत नुकसान हो सकता है- भयानक आपदाएँ, विपत्तियाँ और विपत्तियाँ। केवल वही व्यक्ति जिसका दिमाग खाली हो, जिसके मन में शैतान ने घर कर लिया हो, ऐसे खतरनाक खेल को खेलने में रुचि ले सकता है।
लास्ट बोल
‘मेरे दिल और आत्मा से आँसू बह निकले, ज़िंदगी एक प्यास बन कर रह गई’
(हसन कमाल की ये पंक्तियाँ राहुल गाँधी 2029 के नतीजों के बाद गाएँगे या आप- यह फैसला आपको ही करना है।)


