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आज ट्रंप के बयानों को सुन कॉन्ग्रेस कर रही देश के PM का अपमान, कभी मनमोहन सिंह के लिए नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को दिखा दी थी औकात: क्या पुराना वक्त भूल गए ‘चमचे’

डोनाल्ड ट्रंप के 'महोदय, क्या मैं आपसे मिल सकता हूँ?' वाले नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान से कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा चलाया। वही नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के मनमोहन सिंह का अपमान करने पर कड़ा विरोध दर्ज किया था।

इन दिनों डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक और अस्थिर मिजाज दुनियाभर में तनाव का कारण बना हुआ है। लेकिन चिंता की बात यह है कि भारत को लेकर भी उनका रवैया लगातार तल्ख होता जा रहै। जहाँ ट्रंप अपने से कमजोर देशों पर सीधे कार्रवाई करने से नहीं हिचक रहे, वहीं भारत जैसे सशक्त और आत्मनिर्भर देश के मामले में वह बयानबाजी के जरिए माहौल गरम करने की कोशिश कर रहे हैं।

स्थिति तब और खराब हो जाती है जब ट्रंप की इस बयानबाजी को देश की विपक्षी पार्टियाँ अपने राजनीतिक हितों के लिए भुनाने लगती हैं। भारत पर दूसरे देशों की टिप्पणियों को आधार बनाकर वे सरकार पर हमला बोलने लगती हैं, बिना यह सोचे कि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिष्ठा को ही नुकसान पहुँच सकता है।

विपक्ष का यह रवैया हाल के दिनों में और अधिक स्पष्ट हुआ है, जब डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए बयानों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर उनकी छवि को कमजोर करने के लिए किया गया। हैरानी की बात यह है कि कॉन्ग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता भी अमेरिका के संदर्भ में अपने ही प्रधानमंत्री को कमतर दिखाने से पीछे नहीं रहे, जो राजनीतिक विरोध की सामाओं को पार कर देता है।

दरअसल, हाल ही में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर भारत की लंबित रक्षा सौदे और व्यापारिक मुद्दों में उनसे बात की। ट्रंप ने कहा, “भारत ने अपाचे हेलीकॉप्टर का ऑर्डर दिया था, लेकिन 5 सालों तक डिलीवरी नहीं हुई। प्रधानमंत्री मोदी मुझसे मिलने आए थे। महोदय, क्या मैं आपसे मिल सकता हूँ?” डोनाल्ड ट्रंप ने आगे पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनके मजबूत संबंध बताते हुए कहा, “मेरा उनके साथ बहुत अच्छा रिश्ता है।”

ट्रंप के बयान पर कॉन्ग्रेस ने चलाया प्रोपेगेंडा

ट्रंप के इस बयान को कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने प्रोपेगेंडा का रूप देकर सोशल मीडिया पर परोसा। वो भी बयान के एक अधूरा हिस्से को उठाकर, जिसमें ट्रंप ने पीएम मोदी की बात करते हुए कहा- ‘क्या मैं आपसे मिल सकता हूँ?’ इस अधूरे बयान से प्रधानमंत्री की आलोचना को लेकर धड़ाधड़ पोस्ट किए गए। प्रधानमंत्री मोदी पर विदेशों में भारत की बेइज्जती करवाने के आरोप लगाए गए। खासतौर पर राहुल गाँधी के ‘नरेंदर-सरेंडर’ वाले वीडियो से कॉन्ग्रेस ने प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाया।

कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता सुप्रिया श्रीनाते ने कहा, “नेपाल, बांग्लादेश संभल नहीं रहा है। चीन का नाम ले नहीं पाते। अमेरिका में ‘सर सर’ करते मिमिया रहे हैं, इनसे कोई भी उम्मीद करना बेमानी है। मैंने किसी का नाम नहीं लिया- लेकिन सब जानते हैं वो कौन है वैसे बौखलाए भक्त अभी खुद ही दास्तान बयां करेंगे।”

कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन (NSUI) ने कहा, “इनका इतिहास ही “I am sorry, Sir” से शुरू हुआ था। उसी कायर विरासत को प्रधानमंत्री मोदी आगे बढ़ा रहे हैं- हाथ जोड़कर ट्रंप के सामने “May I see you, Sir” की याचना करते हुए। जो देश कभी सातवें बेड़े के सामने डटकर खड़ा था, आज उसका प्रधानमंत्री दुनिया भर में रोज-रोज ट्रंप से बेइज्जती कराने के नए कीर्तिमान रच रहा है।”

कॉन्ग्रेसी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने वाले मोहित चौहान कहते हैं, “लेकिन अब वे मुझसे नाराज हैं क्योंकि मैंने रूस पर भारी टैरिफ लगाकर भारत को रूस से तेल खरीदने से रोक दिया है। ट्रंप रोजाना भारत का अपमान करते हैं, लेकिन मोदी उनसे इतना डरते हैं कि एक शब्द भी नहीं बोलते। भारत को राहुल गाँधी जैसे सशक्त और शिक्षित प्रधानमंत्री की जरूरत है।”

ट्रंप के बयान के अधूरे हिस्से से गढ़ा नैरेटिव

कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने डोनाल्ड ट्रंप के बयान के केवल एक हिस्से को चुनकर सोशल मीडिया पर नैरेटिव गढ़ा। ट्रंप के बयान के उन शब्दों पर फोकस किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी इज्जत से बात कर केवल एक सवाल पूछ रहे हैं। ट्रंप ने इस बयान को इस तरह पेश किया, मानो भारत के प्रधानमंत्री विदेशी ताकतों के सामने कमजोर पड़ गए हों।

असलियत यह है कि ट्रंप ने उसी बयान में अगली ही पंक्ति में साफ कहा कि वे और प्रधानमंत्री काफी अच्छे दोस्त हैं। यह तथ्य कॉन्ग्रेस के इस प्रोपेगेंडा में जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया गया, क्योंकि पूरी बात सामने आ जाती तो बनाया गया नैरेटिव टिक ही नहीं पाता। साफ है कि सच को पूरा बताने के बजाए अधूरे बयान को हथियार बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई।

अंतरराष्ट्रीय छवि को दरकिनार कर प्रधानमंत्री के लिए वही आपत्तिजनक भाषा

प्रोपेगेंडा फैलाने की जल्दबाजी में यह भी नहीं सोचा गया कि इसका असर कहीं न कहीं देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी पड़ सकता है। प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हुए की गई बयानबाजी में यह विचार तक नहीं किया गया कि विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गैर-जिम्मेदार टिप्पणियाँ भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकती हैं। राजनीतिक विरोध के नाम पर संयम और मर्यादा दोनों को दरकिनार कर दिया गया।

यहाँ तक कि राहुल गाँधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए आपत्तिजनक शब्द ‘नरेंद्र-सरेंडर’ को प्रतिक्रिया के तौर पर बड़े पैमाने पर फैलाया गया। यह पहली बार नहीं है, जब प्रधानमंत्री की आलोचना आपत्तिजनक भाषा में की गई हो, लेकिन इस बार मामला देश की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँच गया। यही वजह है कि यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि देश की साख से जुड़ा सवाल बन गया।

नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री पद का सम्मान, कॉन्ग्रेस को नहीं बूझेगा

दूसरी ओर नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री पद का सम्मान हमेशा बरकरार रखा। एक बार पाकिस्तान में जब नवाज शरीफ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को ‘देहाती महिला’ कहा था। उस समय पीएम मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और खुद प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। लेकिन नवाज शरीफ की इस टिप्पणी पर वह चुप नहीं बैठे, बल्कि कड़ा विरोध दर्ज किया।

पीएम मोदी ने कहा था, “आप मेरे प्रधानमंत्री को देहाती महिला कैसे कह सकते हैं। भारत के प्रधानमंत्री को देहाती महिला कैसे कह सकते हैं। भारत के प्रधानमंत्री का इससे अधिक अपमान और नहीं हो सकता। हम राजनीति के विषय पर उनसे लड़ सकते हैं लेकिन इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। सवा सौ करोड़ लोगों का यह देश अपने प्रधानमंत्री का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।”

इससे साफ होता कि पीएम नरेंद्र मोदी अपने देश के प्रधानमंत्री का कितना सम्मान करते हैं। वह भी तब जब वह खुद उसी विपक्षी पार्टी के सामने चुनाव लड़ रहे हैं। साफ है कि भारत की आंतरिक राजनीति जैसी भी हो, लेकिन विदेशों में जाकर भारत और उसके प्रधानमंत्री का अपमान करना गलत है। लेकिन राहुल गाँधी और उनका कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम इसे समझने में असमर्थ है। इसीलिए राहुल गाँधी आए दिन विदेशों में जाकर भारत के आंतरिक मुद्दों पर बात करते हुए देश की मौजूदा सरकार और उसके प्रधानमंत्री को कोसते हैं।

ये इन दोनों पार्टियों की मानसिकता का सबूत है कि कॉन्ग्रेस कैसे प्रोपेगेंडा और राजनीतिक हित के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, जबकि बीजेपी ने हमेशा प्रधानमंत्री पद का सम्मान किया है, यह देखे बिना की उस पद पर विपक्षी दल का व्यक्ति ही क्यों न हो।

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पूजा राणा
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