Thursday, March 5, 2026
Homeविविध विषयकला-साहित्यरायपुर साहित्य उत्सव: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा और राष्ट्रीय संवाद का अनुपम संगम

रायपुर साहित्य उत्सव: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा और राष्ट्रीय संवाद का अनुपम संगम

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न केवल एक आयोजन था बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा का उत्सव था। यह छत्तीसगढ़ को साहित्यिक मानचित्र पर मजबूत स्थान देगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में 23 से 25 जनवरी तक आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 एक ऐतिहासिक और अत्यंत सफल आयोजन साबित हुआ। ‘आदि से अनादि तक’ थीम पर आधारित यह उत्सव छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष और गणतंत्र के अमृतकाल के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें साहित्य, संस्कृति, विचार-विमर्श और लोक परंपराओं का अनूठा मेल देखने को मिला।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की इस पहल ने छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई।

उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी को विनोद कुमार शुक्ल मंडप में हुआ, जहाँ मुख्य अतिथि राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश और अध्यक्ष मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा और अभिनेता मनोज जोशी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

उद्घाटन समारोह: साहित्य की शक्ति और छत्तीसगढ़ की गौरवगाथा

उप सभापति हरिवंश ने छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की प्राचीन और समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने कबीर के काशी और कवर्धा से जुड़ाव का उल्लेख किया तथा मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों के माध्यम से साहित्य की समाज-दिशा देने वाली भूमिका पर प्रकाश डाला। हरिवंश ने कहा, “एक पुस्तक और एक लेखक दुनिया बदलने की शक्ति रखते हैं।” उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति, आत्मनिर्भरता और 2047 के विकसित भारत संकल्प में साहित्य की भूमिका को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ को प्रभु श्रीराम का ननिहाल बताते हुए कहा कि यह पावन भूमि साहित्य का महाकुंभ बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों की भागीदारी के साथ 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श हुआ। साय ने स्वतंत्रता संग्राम को समुद्र मंथन से तुलना करते हुए माखनलाल चतुर्वेदी, माधवराव सप्रे, पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों की स्मृतियों को सहेजने की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं का जिक्र करते हुए कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध सिखाती है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आयोजन को छत्तीसगढ़ की साहित्यिक पहचान मजबूत करने वाला बताया।

रायपुर साहित्य उत्सव की झलकियाँ

पुस्तक विमोचन और साहित्यिक गतिविधियाँ

उद्घाटन के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित जे. नंदकुमार की कॉफी टेबल बुक, प्रो. अंशु जोशी की ‘लाल दीवारें, सफेद झूठ’ और राजीव रंजन प्रसाद की ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ का विमोचन किया गया।

उत्सव में कुल 42 सत्र आयोजित हुए, जिनमें 5 समानांतर, 4 सामूहिक और 3 संवाद सत्र शामिल थे। अंतिम दिन पत्रकारिता और साहित्य, ट्रैवल ब्लॉगिंग, नाट्यशास्त्र, समाज-सिनेमा, संविधान-भारतीय मूल्य तथा शासन-साहित्य के अंतर्संबंधों पर चर्चा हुई। चाणक्य नाटक का मंचन, लोकनृत्य, लोकगीत, छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कवि सम्मेलन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

चित्रकला प्रदर्शनी और कार्यशालाएँ: रंगों में छत्तीसगढ़ की आत्मा

सुरेंद्र दुबे मंडप में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती भव्य चित्रकला प्रदर्शनी लगी। छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर (कलाकार सोनल शर्मा), बस्तर बाजार (अवध कंवर), राजिम कुंभ (दिव्या चंद्रा) और रामगढ़ पहाड़ियों के चित्रों ने दर्शकों को आकर्षित किया। पेंटिंग और कार्टून कार्यशालाओं में युवा कलाकारों को मार्गदर्शन मिला।

लोकाचार और जन भागीदारी: उत्सव की असली ताकत

उत्सव में चाउमीन के ठेले नहीं, बल्कि कोदो का भात, चापड़ा चटनी, फर्रा, जिमिकंद का आचार और खट्टी कढ़ी जैसे पारंपरिक पकवान परोसे गए। पारंपरिक साड़ियां, आदिवासी आभूषण जैसे हसुली और बाजूबंद ने छत्तीसगढ़ी लोकाचार को जीवंत किया। चार पीढ़ियों का संगम, उत्तर-दक्षिण-पूर्वोत्तर-पश्चिम के साहित्यकारों की उपस्थिति और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां इसे लोक उत्सव बनाती रहीं।

व्यवस्था अद्भुत थी-समयबद्ध कार्यक्रम, आकस्मिक चुनौतियों के लिए वैकल्पिक योजना और कोई अफरातफरी नहीं। आयोजक टीम ने संभ्रांतवादी होने से बचाकर इसे जनभागीदारी वाला बनाया।

रायपुर साहित्य उत्सव की झलकियाँ

राज्यपाल की सराहना और भविष्य की उम्मीद

समापन समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि डिजिटल दौर में भी साहित्य का महत्व अक्षुण्ण रहेगा। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ का उदाहरण देते हुए शब्दों की ताकत पर जोर दिया और ऐसे उत्सवों को गांव-छोटे शहरों तक पहुँचाने की अपील की। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और रंगकर्मी सच्चिदानंद जोशी ने भी आयोजन की सराहना की। निर्देशक चन्द्रप्रकाश द्विवेदी ने आयोजकों द्वारा  समय का अनुशासन और छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने की  प्रशंसा की तथा बस्तर जैसे स्थानों में इसे दोहराने की बात कही। 

सफलता की कुंजी: मुख्यमंत्री साय सरकार की प्रतिबद्धता

बीते दो वर्षों में साय सरकार ने साहित्य और संस्कृति को सामाजिक उत्तरदायित्व मानकर कई पहलें कीं। यह उत्सव जनभागीदारी, स्थानीय भाषाओं और युवा रचनाकारों को मंच देकर सफल रहा।

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न केवल एक आयोजन था बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा का उत्सव था। यह छत्तीसगढ़ को साहित्यिक मानचित्र पर मजबूत स्थान देगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। आयोजक टीम-मुख्य रूप से मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, आर. कृष्णा दास और छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के पूर्व/वर्तमान साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा-ने यादगार बनाया। यह अन्य साहित्यिक उत्सवों के लिए मानक स्थापित कर गया है।

रायपुर साहित्य उत्सव के एक सत्र के दौरान राम माधव

रायपुर साहित्य उत्सव की धुरी: पंकज झा- चुपचाप सफलता का सूत्रधार

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 की चमक के पीछे एक ऐसा व्यक्तित्व है जो कभी मंच पर नहीं आया, लेकिन पूरे आयोजन की धुरी बना रहा-पंकज झा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मीडिया सलाहकार के रूप में उन्होंने इस तीन दिवसीय साहित्य महाकुंभ को बिना किसी दिखावे के संभाला और इसे यादगार बनाया। उनकी मेहनत, दूरदर्शिता और संगठन क्षमता ने उत्सव को राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई।

पंकज झा का काम करने का अंदाज बिल्कुल अलग है। वे अपने किए काम का श्रेय कभी नहीं लेते। यदि कोई बधाई दे, तो वे तुरंत टीम, सहयोगियों और कार्यकर्ताओं की चर्चा शुरू कर देते हैं-कैसे उन्होंने दिन-रात एक कर इस सपने को साकार किया। सारा क्रेडिट वे मुख्यमंत्री के ‘नया रायपुर’ विजन और साहित्य प्रेम को देते हैं। यह विनम्रता उन्हें अन्य आयोजकों से विशिष्ट बनाती है।

एक जिम्मेदार आयोजक के रूप में वे आलोचना का सामना भी खुले मन से करते हैं। यदि शिकायत सही हो, तो वे इसे किसी पर टालने की बजाय पूरी जिम्मेदारी खुद ले लेते हैं। यही गुण उन्हें विश्वसनीय और सम्मानित बनाता है।

उत्सव की सबसे बड़ी खासियत थी अतिथियों की उपस्थिति। आधे से अधिक वक्ता और लेखक सिर्फ पंकज झा के व्यक्तिगत स्नेह और प्रेम के कारण आए। कुछ वरिष्ठ साहित्यकार, जो स्वास्थ्य कारणों से अब कम बाहर निकलते थे, आयोजन में मुख्य द्वार से मंच तक पैदल चलकर पहुंचे। जिसके बीच ठीक ठाक दूरी थी। यह उनके प्रेम का जादू था। उनकी दोस्ती की दुनिया इतनी विस्तृत है कि कई लोग न बुलाए जाने पर नाराज भी हुए और अब उन्हें मनाने का काम भी पंकज जी को ही करना पड़ेगा।

यदि इस उत्सव में ‘मैन ऑफ द मैच’ चुनना हो, तो नाम पंकज झा का ही होगा। उन्होंने छत्तीसगढ़िया प्रेम को न सिर्फ जिया, बल्कि पूरे आयोजन में रचा-बसा दिया। छत्तीसगढ़ की मिठास, आतिथ्य और सांस्कृतिक गर्मजोशी हर अतिथि को छू गई। बाहर से आए लोग जाते-जाते अभिभूत होकर कहते रहे- ‘सबले बढ़िया छत्तीसगढ़िया’।

पंकज झा ने साबित किया कि सच्चा नेतृत्व चुपचाप मेहनत, प्रेम और टीमवर्क से आता है। रायपुर साहित्य उत्सव उनकी दूरदर्शिता और मानवीय संवेदना का जीवंत प्रमाण है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

वेनेजुएला और ईरान पर चीन की चुप्पी ने किया साबित, वो सिर्फ मौका परस्त: नहीं है सुपरपॉवर जैसी कोई बात, फिर भी हमारे लिबरल्स...

चीन के पास अभी अमेरिका जैसी शक्ति नहीं है। भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियाँ अपनाते रहना चाहिए, जैसा वो कर भी रहा है।

भारत-मोदी पर उठाए सवाल, ईरान-खामेनेई के लिए दिखाया प्यार…: प्रोपेगेंडा के ‘प्राइम मास्टर’ बने रवीश कुमार, 5 दिन में 6 Video डालकर जानिए क्या...

रवीश कुमार की पत्रकारिता में 'तथ्य' गायब और 'ईरान के प्रति संवेदना' दिखी। 5 दिनों में 6 वीडियो के अंदर अमेरिका-इजरायल-भारत के प्रति नफरत दिखी।
- विज्ञापन -