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हाई स्पीड रेल, टूरिज्म बूस्ट, टेक्सटाइल पार्क… लेकिन इनकम टैक्स में बदलाव नहीं: मोदी सरकार के बजट 2026 का पूरा विश्लेषण, जानें फायदे और नुकसान

इस लेख में हमने बजट 2026 का सटीक और निष्पक्ष विश्लेषण किया है। यह विश्लेषण आपको बताएगा कि यह बजट अर्थव्यवस्था को कितना आगे ले जाएगा और आम आदमी की जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी 2026) को लोकसभा में वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। यह बजट मोदी सरकार का पहला ऐसा बजट है जो ‘कर्तव्य भवन’ में तैयार हुआ और तीन मुख्य कर्तव्यों से प्रेरित है: आर्थिक विकास को तेज और स्थिर रखना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना तथा हर परिवार, समुदाय और क्षेत्र तक संसाधनों की पहुँच सुनिश्चित करना। बजट में कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपए और पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड स्तर रखते हुए सरकार ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर नियंत्रित रखने का संकल्प दिखाया है।

यह बजट स्पष्ट रूप से ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने वाला है। जहाँ एक तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई, बायोफार्मा और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की घोषणा हुई है, वहीं टूरिज्म, खेल और दुर्लभ खनिजों जैसे उभरते सेक्टरों को नई गति देने का प्रयास किया गया है। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न होने से निरंतरता बनी रहेगी, लेकिन एसटीटी में बढ़ोतरी और कुछ अन्य कर परिवर्तनों ने बाजार को थोड़ा झटका भी दिया।

इस लेख में हमने बजट 2026 का सटीक और निष्पक्ष विश्लेषण किया है। इसमें हम जानेंगे कि कैपेक्स में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से इंफ्रास्ट्रक्चर को कितनी मजबूती मिलेगी, एमएसएमई और बायोफार्मा के लिए 10-10 हजार करोड़ के फंड का क्या असर होगा, सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर और टूरिज्म बूस्ट से रोजगार कैसे बढ़ेगा तथा मध्यम वर्ग, किसान और युवाओं को वास्तव में क्या मिला। साथ ही यह विश्लेषण आपको बताएगा कि यह बजट अर्थव्यवस्था को कितना आगे ले जाएगा और आम आदमी की जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा।

1: टैक्स में बड़े बदलाव नहीं, मध्यम वर्ग को बड़ी राहत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 2026-27 के केंद्रीय बजट में सबसे ज्यादा चर्चा व्यक्तिगत आयकर यानी पर्सनल इनकम टैक्स में हुए बदलावों की हुई है। यह बदलाव मुख्य रूप से नई टैक्स व्यवस्था (न्यू रिजीम) को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए किए गए हैं। पुरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नई व्यवस्था को इतना सरल और फायदेमंद बनाया गया है कि ज्यादातर लोग अब इसी को चुनेंगे।

इसका उद्देश्य मध्यम वर्ग के लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा छोड़ना है, ताकि उनकी क्रय शक्ति बढ़े और अर्थव्यवस्था में खपत को बल मिले। यह बदलाव लाखों वेतनभोगी और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं

बजट का सबसे बड़ा ऐलान यह है कि नई टैक्स व्यवस्था में अब 12 लाख रुपए तक की सामान्य आय (सैलरी, ब्याज आदि) पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह छूट केवल सामान्य आय पर लागू है, कैपिटल गेन जैसी विशेष आय को छोड़कर। पहले यह सीमा 7 लाख रुपए थी, जिसे अब लगभग दोगुना कर दिया गया है।

इसका मतलब है कि अगर आपकी सालाना आय 12 लाख रुपए है, तो आपको एक भी रुपया टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह बदलाव उन लाखों लोगों के लिए खुशखबरी है जो मध्यम वर्ग में आते हैं और महँगाई के दौर में टैक्स का बोझ महसूस करते थे।

वेतनभोगियों के लिए अतिरिक्त लाभ, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ा

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक और खास सुविधा दी गई है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की राशि को 75,000 रुपए कर दिया गया है। पहले यह 50,000 रुपए थी। इस डिडक्शन के कारण प्रभावी टैक्स-फ्री आय की सीमा 12 लाख से बढ़कर 12.75 लाख रुपए हो जाती है। यानी अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपकी सैलरी 12.75 लाख रुपए तक है, तो भी आपको कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो सैलरी से आय कमाते हैं और पहले डिडक्शन का ज्यादा लाभ नहीं उठा पाते थे।

नए टैक्स स्लैब को बनाया गया सरल

नई टैक्स व्यवस्था में स्लैब को पूरी तरह से बदल दिया गया है, जिससे यह अधिक क्रमिक और न्यायपूर्ण हो गया है। नए स्लैब इस प्रकार हैं: 0 से 4 लाख रुपए तक शून्य प्रतिशत, 4 से 8 लाख तक 5 प्रतिशत, 8 से 12 लाख तक 10 प्रतिशत, 12 से 16 लाख तक 15 प्रतिशत, 16 से 20 लाख तक 20 प्रतिशत, 20 से 24 लाख तक 25 प्रतिशत और 24 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत।

पहले स्लैब ज्यादा जटिल थे और ऊपरी आय वालों पर भी कम बोझ पड़ता था। अब यह संरचना इस तरह बनाई गई है कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, टैक्स का बोझ धीरे-धीरे बढ़ता है, जिससे मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा फायदा होता है।

रिबेट की व्यवस्था, यानी 12 लाख तक पूरी तरह टैक्स-फ्री

रिबेट की मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सेक्शन 87A के तहत रिबेट का लाभ अब इस तरह दिया गया है कि 12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं बचेगा। पहले रिबेट केवल 7 लाख तक की आय पर पूरी छूट देता था।

अब स्लैब में कमी और रिबेट के संयोजन से 12 लाख तक की आय पूरी तरह टैक्स-फ्री हो गई है। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिनकी आय इस सीमा के आसपास है और पहले उन्हें थोड़ा-बहुत टैक्स देना पड़ता था।

व्यावहारिक उदाहरण से समझें, कितनी बचत होगी?

बजट में कुछ उदाहरण दिए गए हैं जो बदलाव का असर स्पष्ट करते हैं। अगर किसी व्यक्ति की आय 12 लाख रुपए है, तो उसे पहले के मुकाबले 80,000 रुपए की बचत होगी, यानी पूरा टैक्स माफ। 18 लाख आय वाले को 70,000 रुपए और 25 लाख आय वाले को 1.1 लाख रुपए की राहत मिलेगी। ये आँकड़े दिखाते हैं कि मध्यम और ऊपरी मध्यम वर्ग दोनों को ही अच्छा खासा लाभ होगा। इन पैसों से लोग खर्च, बचत या निवेश कर सकेंगे, जिससे बाजार में माँग बढ़ेगी।

मध्यम वर्ग पर सकारात्मक प्रभाव, उनके हाथ में ज्यादा पैसा

ये सारे बदलाव मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी राहत हैं। मध्यम वर्ग भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन है। वे सबसे ज्यादा खर्च करते हैं, बचत करते हैं और निवेश करते हैं। अब उनके हाथ में ज्यादा पैसा आने से घरेलू खपत बढ़ेगी, जो अर्थव्यवस्था को गति देगी।

महँगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत के बीच यह राहत लोगों को आर्थिक सुरक्षा का एहसास कराएगी। सरकार ने इसे ‘ट्रस्ट बेस्ड’ टैक्स सिस्टम का हिस्सा बताया है, जहां ईमानदार करदाता को फायदा दिया जा रहा है।

सरकार को राजस्व का नुकसान, लेकिन लंबे फायदे

इन बदलावों से सरकार को प्रत्यक्ष करों में करीब 1 लाख करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान होगा। अप्रत्यक्ष करों में भी कुछ छूट से 2,600 करोड़ का नुकसान अनुमानित है। लेकिन सरकार का मानना है कि इससे उपभोग बढ़ेगा, अर्थव्यवस्था तेज चलेगी और अंततः टैक्स बेस बढ़ेगा। यह एक तरह का ‘स्टिमुलस’ है जो बिना ज्यादा खर्च के अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगा। लंबे समय में इससे निवेश और रोजगार भी बढ़ेंगे।

अन्य प्रत्यक्ष टैक्स बदलाव से सरलीकरण पर जोर

प्रत्यक्ष करों में कई अन्य सरलीकरण भी किए गए हैं। टीडीएस और टीसीएस की दरें कम की गई हैं और थ्रेशोल्ड बढ़ाए गए हैं, जैसे सीनियर सिटीजन के ब्याज पर टीडीएस की सीमा 50,000 से 1 लाख रुपए। अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा 2 साल से बढ़ाकर 4 साल की गई। छोटे चैरिटेबल ट्रस्टों की रजिस्ट्रेशन अवधि 5 से 10 साल की गई। सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर दो घरों तक बिना शर्त के छूट।

सबसे महत्वपूर्ण नया इनकम टैक्स बिल अगले हफ्ते पेश होगा, जो मौजूदा कानून से आधा छोटा और सरल होगा। ये कदम टैक्स सिस्टम को और पारदर्शी व करदाता-अनुकूल बनाएँगे।

अप्रत्यक्ष करों में बदलाव से स्वास्थ्य और विनिर्माण को प्रोत्साहन

अप्रत्यक्ष करों यानी कस्टम्स ड्यूटी में भी बड़े बदलाव हैं। कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की 36 दवाओं पर पूरी छूट और 6 दवाओं पर केवल 5 प्रतिशत ड्यूटी लगेगी। क्रिटिकल मिनरल्स, लिथियम-आयन बैटरी, टेक्सटाइल मशीनरी और अन्य इनपुट पर ड्यूटी कम की गई है।

इन छूटों का उद्देश्य एमएसएमई, निर्यात और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। कुल मिलाकर अप्रत्यक्ष करों में भी घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी गई है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बल मिलेगा और आम लोगों को सस्ती दवाएँ व उत्पाद मिलेंगे।

2: विकास में खर्च- इंफ्रास्ट्रक्चर और पूँजीगत व्यय पर सरकार का जोर

केंद्रीय बजट 2026 में विकास को गति देने के लिए पूँजीगत व्यय यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाता है। यह निवेश सड़क, रेल, बंदरगाह, ऊर्जा और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करता है, जिससे लंबे समय में रोजगार बढ़ता है, उत्पादकता बढ़ती है और अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ती है।

बजट में पूँजीगत व्यय को बढ़ाने का फोकस इसलिए है क्योंकि निजी निवेश अभी पूरी तरह रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। सरकार खुद आगे बढ़कर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगी, जिससे निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह कदम ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

राज्यों को 1.5 लाख करोड़ रुपए का ब्याज-मुक्त लोन

बजट में राज्यों को इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए का ब्याज-मुक्त लोन देने का प्रावधान किया गया है। यह लोन 50 साल की अवधि का है और राज्यों को अपनी पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च करने की छूट है। इसका उद्देश्य राज्यों को अपनी जरूरत के हिसाब से सड़क, स्कूल, अस्पताल या अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करना है। साथ ही सुधार करने वाले राज्यों को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

यह व्यवस्था केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करती है और देश के हर क्षेत्र में समान विकास सुनिश्चित करती है। पिछली योजनाओं में यह राशि प्रभावी साबित हुई थी, इसलिए इसे जारी रखा गया है। इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में भी विकास की गति बढ़ेगी।

जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाया गया

साल 2019 में शुरू हुआ जल जीवन मिशन अब 2028 तक बढ़ा दिया गया है। इस मिशन का लक्ष्य हर ग्रामीण घर में नल से साफ पानी पहुँचाना है। अब तक 15 करोड़ घरों यानी 80 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को पानी के कनेक्शन मिल चुके हैं। अब बाकी 20 प्रतिशत को कवर करने के लिए मिशन को तीन साल और बढ़ाया गया है।

बजट में इसकी कुल राशि बढ़ाई गई है और अब फोकस पानी की गुणवत्ता, रखरखाव और जन भागीदारी पर है। राज्यों के साथ अलग-अलग समझौते (MoU) किए जाएँगे ताकि पानी की सप्लाई स्थाई और नागरिक-केंद्रित हो। यह योजना न सिर्फ स्वास्थ्य सुधारती है बल्कि महिलाओं और बच्चों का समय बचाती है जो पहले पानी लाने में लगता था। यह ग्रामीण भारत की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

शहरी सुधारों के लिए अर्बन चैलेंज फंड में ₹1 लाख करोड़

शहरों को विकास का केंद्र बनाने के लिए अर्बन चैलेंज फंड की घोषणा की गई है, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान है। यह फंड जुलाई 2024 के बजट में घोषित ‘सिटीज ऐज ग्रोथ हब्स’, ‘क्रिएटिव रीडेवलपमेंट ऑफ सिटीज’ और ‘वाटर एंड सैनिटेशन’ जैसी योजनाओं को लागू करने में मदद करेगा। फंड का 25 प्रतिशत तक केंद्र देगा, बाकी बैंक लोन, बॉन्ड या पीपीपी से आएगा।

साल 2026 में इसके लिए 10,000 करोड़ रुपए अलग रखे गए हैं। साथ ही शहरी सुधारों जैसे शहरी शासन, नगर सेवाएँ, भूमि उपयोग और प्लानिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह फंड शहरों को आर्थिक केंद्र बनाने में मदद करेगा, जहाँ रोजगार, उद्योग और सेवाएँ तेजी से बढ़ सकें। इससे शहरीकरण की समस्याओं का समाधान भी होगा।

परमाणु ऊर्जा मिशन में 2047 तक 100 GW बिजली का लक्ष्य, SMR के लिए 20,000 करोड़

ऊर्जा सुरक्षा और क्लाइमेट चेंज से निपटने के लिए न्यूक्लियर एनर्जी मिशन शुरू किया गया है। लक्ष्य है कि 2047 तक कम से कम 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन हो। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जाएगी और एटॉमिक एनर्जी एक्ट व सिविल लायबिलिटी एक्ट में संशोधन किए जाएँगे।

इसके साथ ही छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के लिए अलग मिशन है, जिसमें 20,000 करोड़ रुपए का प्रावधान है। कम से कम 5 स्वदेशी SMR 2033 तक चालू होंगे। यह कदम ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण है क्योंकि परमाणु ऊर्जा साफ और स्थिर स्रोत है। इससे बिजली की बढ़ती माँग पूरी होगी और कार्बन उत्सर्जन कम होगा। यह भारत को ग्लोबल क्लीन एनर्जी लीडर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड में ₹25000 करोड़

समुद्री क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड बनाया गया है, जिसमें 25,000 करोड़ रुपए का कोष होगा। सरकार इसमें 49 प्रतिशत तक योगदान देगी, बाकी बंदरगाह और निजी क्षेत्र से आएगा। फंड का उद्देश्य जहाज निर्माण, बंदरगाह और समुद्री उद्योग को लंबी अवधि का वित्त उपलब्ध कराना है।

इसके साथ ही जहाज निर्माण की वित्तीय सहायता नीति को रिवाइज किया जाएगा और बड़े जहाजों को इंफ्रास्ट्रक्चर लिस्ट में शामिल किया जाएगा। जहाज निर्माण क्लस्टर बनाए जाएँगे और स्किलिंग-टेक्नोलॉजी पर जोर होगा। यह कदम भारत को ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब बनाने में मदद करेगा, निर्यात बढ़ाएगा और रोजगार सृजन करेगा। समुद्री व्यापार भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए यह निवेश जरूरी था।

UDAN स्कीम को बढ़ाकर 120 नए डेस्टिनेशन

क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत बनाने के लिए UDAN स्कीम को नया रूप दिया गया है। अब अगले 10 साल में 120 नए डेस्टिनेशन जोड़े जाएँगे और 4 करोड़ यात्रियों को लाभ होगा। स्कीम में हेलीपैड और छोटे एयरपोर्ट भी शामिल किए गए हैं, खासकर पहाड़ी, पिछड़े और पूर्वोत्तर इलाकों में। अब तक UDAN से 88 एयरपोर्ट जुड़े और 619 रूट चालू हुए, जिससे 1.5 करोड़ मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ती हवाई यात्रा मिली।

यह नया संस्करण क्षेत्रीय असंतुलन दूर करेगा, पर्यटन बढ़ाएगा और दूरदराज के इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ेगा। इससे छोटे शहरों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और कोसी कैनाल प्रोजेक्ट

बिहार के विकास पर विशेष ध्यान देते हुए बजट में कई घोषणाएँ की गई हैं। राज्य में नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जाएँगे, जो पटना एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने और बिहटा में ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट के अलावा होंगे। इससे बिहार की हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन-व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

इसके साथ ही मिथिलांचल क्षेत्र में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिससे 50,000 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि की सिंचाई होगी और लाखों किसानों को फायदा होगा। ये दोनों प्रोजेक्ट बिहार को ‘पूर्वोदय’ की दिशा में आगे बढ़ाएँगे और क्षेत्रीय असंतुलन को कम करेंगे।

मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से रोजगार और दीर्घकालिक विकास का लक्ष्य

ये सारे कदम मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर को अभूतपूर्व मजबूती देंगे। पानी, बिजली, सड़क, हवाई और समुद्री संपर्क बेहतर होगा। इससे लाखों रोजगार पैदा होंगे, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में। लंबे समय में यह निवेश अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करेगा, निजी निवेश को आकर्षित करेगा और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करेगा। सरकार का यह दृष्टिकोण संतुलित है- जहाँ जरूरत है वहाँ केंद्र खुद निवेश कर रहा है और राज्यों-निजी क्षेत्र को साथ लेकर चल रहा है।

3: मोदी सरकार का विकास के चार इंजनों पर खास फोकस

केंद्रीय बजट 2026 में कई नई योजनाएँ और पहल शुरू की गई हैं, जो अर्थव्यवस्था के चार मुख्य इंजनों पर केंद्रित हैं। ये इंजन हैं- कृषि, एमएसएमई, निवेश और निर्यात। सरकार ने इनको इंजन इसलिए कहा है क्योंकि ये विकास की गति प्रदान करेंगे। इनके लिए ईंधन के रूप में सुधारों को रखा गया है।

बजट का उद्देश्य इन क्षेत्रों को मजबूत करके समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। नई योजनाएँ उत्पादकता बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में हैं। ये पहल गरीब, युवा, किसान और महिलाओं पर विशेष फोकस रखती हैं। अब हम इन चार इंजनों और संबंधित योजनाओं को विस्तार से देखते हैं।

पहला इंजन: कृषि और उसकी नई योजनाएँ

बजट में कृषि को पहला इंजन बनाया गया है, क्योंकि यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और करोड़ों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी है। सरकार का लक्ष्य कृषि को उत्पादक, विविधतापूर्ण और स्थाई बनाना है। इसके लिए कई नई योजनाएँ शुरू की गई हैं, जो कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों पर फोकस करती हैं।

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना एक महत्वपूर्ण पहल है। यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम की सफलता से प्रेरित है। इसमें राज्यों के साथ साझेदारी में 100 कम उत्पादकता वाले जिलों को चुना गया है। योजना का लक्ष्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण अपनाना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण सुविधा बनाना, सिंचाई बेहतर करना और क्रेडिट उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इससे करीब 1.7 करोड़ किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यह योजना मौजूदा स्कीमों के कन्वर्जेंस से चलेगी और विशेष उपाय भी शामिल होंगे।
  • ग्रामीण समृद्धि और लचीलापन कार्यक्रम भी नया है। यह बहु-क्षेत्रीय कार्यक्रम है, जो राज्यों के साथ मिलकर शुरू होगा। इसका फोकस कृषि में अंडर-एम्प्लॉयमेंट दूर करना है। स्किलिंग, निवेश, टेक्नोलॉजी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करके नए अवसर पैदा किए जाएंगे। ताकि ग्रामीण युवा और महिलाओं के लिए शहरों की ओर पलायन जरूरी न रहे। पहली फेज में 100 विकासशील कृषि जिलों को कवर किया जाएगा। इसमें ग्रामीण महिलाएँ, युवा किसान, छोटे किसान और भूमिहीन परिवार मुख्य लाभार्थी होंगे।
  • दालों में आत्मनिर्भरता मिशन 6 साल का है, जिसमें तुअर, उड़द और मसूर पर विशेष फोकस है। पहले दालों में आत्मनिर्भरता हासिल की गई थी, अब उपभोग बढ़ने से फिर जरूरत है। केंद्र एजेंसियां (NAFED और NCCF) रजिस्टर्ड किसानों से पूरी खरीद करेंगी। यह मिशन उत्पादकता, प्रोटीन कंटेंट और भंडारण पर जोर देगा।
  • सब्जियाँ और फल कार्यक्रम भी नया है। लोगों की पोषण जागरूकता बढ़ने से इनकी खपत बढ़ी है। राज्य सरकारों के साथ मिलकर उत्पादन, सप्लाई चेन, प्रोसेसिंग और किसानों को अच्छे दाम सुनिश्चित किए जाएँगे। इसमें एफपीओ और कोऑपरेटिव की भूमिका होगी।
  • बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित किया जाएगा। मखाना बिहार की विशेष फसल है। बोर्ड उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग सुधारने में मदद करेगा। किसानों को एफपीओ में संगठित किया जाएगा और सरकारी स्कीमों का लाभ दिलाया जाएगा।
  • उच्च उपज बीज मिशन शुरू होगा, जिसमें रिसर्च मजबूत होगी और जलवायु प्रतिरोधी बीज विकसित किए जाएंगे। 100 से ज्यादा नई वैरायटी उपलब्ध कराई जाएँगी।
  • मत्स्य पालन के लिए नया फ्रेमवर्क आएगा, जो ईईजेड और हाई सीज से सस्टेनेबल फिशिंग पर फोकस करेगा। अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप पर विशेष ध्यान।
  • कपास उत्पादकता मिशन 5 साल का है, जो एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कपास को बढ़ावा देगा। इससे किसानों की आय और टेक्सटाइल सेक्टर को कच्चा माल मिलेगा।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की लोन लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की गई। इससे 7.7 करोड़ किसान, मछुआरे और डेयरी किसान लाभान्वित होंगे।
  • असम में नमरूप में 12.7 लाख टन क्षमता वाला यूरिया प्लांट बनेगा, जो आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा।

ये सारी कृषि योजनाएँ मिलकर 1.7 करोड़ किसानों तक पहुँचेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी।

दूसरा इंजन: MSME और उससे जुड़ी पहल

एमएसएमई को दूसरा इंजन कहा गया है, क्योंकि ये 5.7 करोड़ इकाइयाँ हैं जो रोजगार और निर्यात का बड़ा हिस्सा देती हैं। बजट में इनको स्केल देने पर जोर है।

  • एमएसएमई क्लासिफिकेशन की निवेश और टर्नओवर सीमा को क्रमशः 2.5 गुना और दोगुना किया गया। इससे छोटी इकाइयाँ बड़ी हो सकेंगी और रोजगार बढ़ेगा।
  • क्रेडिट गारंटी कवर माइक्रो-स्मॉल के लिए 5 से 10 करोड़ किया गया, जिससे 5 साल में 1.5 लाख करोड़ अतिरिक्त क्रेडिट मिलेगा। स्टार्टअप्स के लिए 20 करोड़ तक और एक्सपोर्टर एमएसएमई के लिए टर्म लोन पर गारंटी।
  • माइक्रो इंटरप्राइजेज के लिए उद्यम पोर्टल पर रजिस्टर्ड को 5 लाख लिमिट का क्रेडिट कार्ड मिलेगा। पहले साल 10 लाख कार्ड जारी होंगे।
  • स्टार्टअप्स के लिए नया फंड ऑफ फंड्स 10,000 करोड़ का बनेगा।
  • 5 लाख महिला, एससी-एसटी पहली बार उद्यमियों के लिए 2 करोड़ तक टर्म लोन स्कीम। स्टैंड-अप इंडिया से सीख लेकर।
  • फुटवियर-लेदर सेक्टर के लिए फोकस प्रोडक्ट स्कीम, जो 22 लाख रोजगार और बड़े निर्यात का लक्ष्य रखती है। टॉय सेक्टर को ग्लोबल हब बनाने की स्कीम।
  • बिहार में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी बनेगा, जो पूर्वी क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देगा।
  • नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन सभी इंडस्ट्रीज के लिए पॉलिसी, रोडमैप और मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क देगा। क्लीन टेक मैन्युफैक्चरिंग पर भी फोकस।

ये कदम एमएसएमई को चैंपियन बनाएँगे और लाखों रोजगार पैदा करेंगे।

तीसरा इंजन: निवेश

तीसरा इंजन निवेश है, जिसमें लोगों, अर्थव्यवस्था और इनोवेशन में निवेश शामिल है।

  • सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 में पोषण मानक बढ़ाए गए, जो 8 करोड़ बच्चों और महिलाओं को कवर करता है।
  • 50,000 अटल टिंकरिंग लैब स्कूलों में बनेंगी, जो बच्चों में इनोवेशन जगाएंगी।
  • सभी सरकारी सेकंडरी स्कूल और पीएचसी में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी।
  • भारतीय भाषा पुस्तक स्कीम से डिजिटल किताबें उपलब्ध होंगी।
  • स्किलिंग के 5 नेशनल सेंटर्स ग्लोबल पार्टनरशिप से बनेंगे।
  • आईआईटी में 6,500 अतिरिक्त सीटें और पटना आईआईटी में विस्तार।
  • एआई में एजुकेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (500 करोड़)।
  • मेडिकल सीटें 5 साल में 75,000 बढ़ाने का लक्ष्य, अगले साल 10,000 सीटें।
  • सभी जिला अस्पतालों में 3 साल में डे-केयर कैंसर सेंटर।
  • पीएम स्वनिधि को रिवैंप करके स्ट्रीट वेंडर्स को ज्यादा लोन और क्रेडिट कार्ड।
  • गिग वर्कर्स (1 करोड़) को आईडी, हेल्थकेयर और ई-श्रम रजिस्ट्रेशन।

ये पहल युवाओं को स्किल्ड बनाएँगी और स्वास्थ्य-शिक्षा सुधारेंगी।

चौथा इंजन: निर्यात

निर्यात चौथा इंजन है। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन शुरू होगा, जिसमें सेक्टोरल टारगेट होंगे। भारत ट्रेड नेट डिजिटल प्लेटफॉर्म ट्रेड डॉक्यूमेंटेशन और फाइनेंसिंग आसान करेगा। ग्लोबल सप्लाई चेन में एकीकरण के लिए सपोर्ट और इंडस्ट्री 4.0 पर फोकस। ये कदम निर्यात बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।

सुधारों को ईंधन कहा गया है। छह डोमेन में ट्रांसफॉर्मेटिव रिफॉर्म्स होंगे, जिसमें टैक्सेशन, पावर सेक्टर, अर्बन डेवलपमेंट, माइनिंग, फाइनेंशियल सेक्टर और रेगुलेटरी शामिल है। हाई लेवल कमिटी रेगुलेटरी रिफॉर्म्स की सिफारिश करेगी। स्टेट्स के लिए इनवेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स। ये सुधार अगले 5 साल में ग्रोथ पोटेंशियल बढ़ाएँगे।

विशेष फोकस एरिया: किसान, महिला, युवा और मध्यम वर्ग

केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने चार विशेष समूहों किसान (अन्नदाता), महिला (नारी), युवा और मध्यम वर्ग पर विशेष ध्यान दिया है। बजट की थीम ‘सबका विकास’ है और ये समूह विकसित भारत की नींव हैं। कृषि को पहला इंजन बनाकर किसानों को प्राथमिकता दी गई है।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने, युवाओं को स्किल और रोजगार देने तथा मध्यम वर्ग को टैक्स राहत देकर उनकी क्रय शक्ति मजबूत करने पर जोर है। ये फोकस क्षेत्र बजट को समावेशी बनाते हैं और हर वर्ग तक विकास पहुँचाने का प्रयास करते हैं। अब हम इनकी विस्तार से चर्चा करते हैं-

किसानों (अन्नदाता) के लिए कृषि को बनाया गया पहला इंजन

बजट में कृषि को अर्थव्यवस्था का पहला इंजन घोषित किया गया है, क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और करोड़ों परिवार इससे जुड़े हैं। सरकार का लक्ष्य शून्य गरीबी, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोगुनी करना है। इसके लिए कई नई योजनाएँ शुरू की गई हैं, जो उत्पादकता, फसल विविधीकरण, भंडारण, सिंचाई और क्रेडिट पर फोकस करती हैं।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और ग्रामीण समृद्धि कार्यक्रम जैसे उपाय कम उत्पादक जिलों में बदलाव लाएँगे। दालों में आत्मनिर्भरता मिशन से तुअर, उड़द और मसूर की खेती बढ़ेगी। सब्जियाँ-फल कार्यक्रम पोषण और आय दोनों बढ़ाएगा। बिहार में मखाना बोर्ड और कपास मिशन क्षेत्रीय फसलों को मजबूत करेंगे। मत्स्य पालन का नया फ्रेमवर्क समुद्री संसाधनों का सस्टेनेबल उपयोग करेगा।

किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने से छोटे किसानों को आसानी से लोन मिलेगा। यूरिया प्लांट और उच्च उपज बीज मिशन से इनपुट सस्ते और बेहतर होंगे। इन योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा और पलायन कम होगा। कुल मिलाकर 1.7 करोड़ किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यह फोकस किसानों को सशक्त बनाकर खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।

महिलाओं (नारी) के लिए आर्थिक भागीदारी और सशक्तिकरण पर जोर

बजट में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य 70 प्रतिशत रखा गया है। महिलाएँ घर और समाज की रीढ़ हैं, इसलिए उनकी सशक्तिकरण पर कई योजनाएं केंद्रित हैं।

सबसे बड़ी पहल 5 लाख महिला और एससी-एसटी पहली बार उद्यमियों के लिए टर्म लोन स्कीम है। यह स्टैंड-अप इंडिया की सफलता पर आधारित है और 2 करोड़ तक लोन देगी। इससे महिलाएं अपना बिजनेस शुरू कर सकेंगी। ग्रामीण समृद्धि कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं पर विशेष फोकस है, जहां स्किलिंग और उद्यमिता से उन्हें स्वावलंबी बनाया जाएगा।

ग्रामीण महिलाओं को एफपीओ और कोऑपरेटिव में संगठित किया जाएगा। शिक्षा में हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनेंगे, जो लड़कियों की हायर एजुकेशन को आसान बनाएंगे। ये कदम महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करेंगे, घरेलू निर्णयों में उनकी भूमिका बढ़ाएंगे और लिंग समानता को बढ़ावा देंगे। सरकार का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी से ही विकसित भारत संभव है।

युवाओं के लिए स्किलिंग, शिक्षा और रोजगार पर विशेष ध्यान

युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं और बजट में उन्हें भविष्य का निर्माणकर्ता माना गया है। युवाओं के लिए स्किलिंग, शिक्षा और रोजगार पर कई योजनाएं हैं, ताकि वे ‘मेक फॉर इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ में योगदान दे सकें।

50,000 अटल टिंकरिंग लैब से स्कूलों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेम्पर जगाया जाएगा। स्किलिंग के 5 नेशनल सेंटर्स ग्लोबल पार्टनरशिप से बनेंगे, जो इंडस्ट्री 4.0 के लिए तैयार करेंगे। आईआईटी में 6,500 अतिरिक्त सीटें और मेडिकल में 75,000 सीटें बढ़ाने का लक्ष्य युवाओं को हायर एजुकेशन देगा।

एमएसएमई और स्टार्टअप स्कीम से लाखों रोजगार पैदा होंगे। गिग वर्कर्स (लगभग 1 करोड़) को आईडी, हेल्थकेयर और ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन मिलेगा। टूरिज्म में 50 टॉप डेस्टिनेशन डेवलपमेंट और हॉस्पिटैलिटी स्किलिंग से युवाओं को नए अवसर मिलेंगे। ये पहल युवाओं को स्किल्ड, रोजगारयुक्त और इनोवेटिव बनाएंगी, जिससे भारत ग्लोबल टैलेंट हब बनेगा।

मध्यम वर्ग के लिए टैक्स राहत और जीवन सुगमता

मध्यम वर्ग बजट का सबसे बड़ा लाभार्थी है, क्योंकि यह वर्ग उपभोग, बचत और निवेश का मुख्य आधार है। सबसे बड़ा तोहफा इनकम टैक्स में राहत है – 12 लाख तक आय टैक्स-फ्री, जिससे लाखों लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा।

कैंसर और गंभीर बीमारियों की दवाओं पर ड्यूटी छूट से इलाज सस्ता होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से बेहतर सड़क, पानी, बिजली और हेल्थ सुविधाएँ मिलेंगी। उपभोग बढ़ाने की नीति से जीवन आसान होगा। ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और डिजिटल शिक्षा से मध्यम वर्ग के बच्चे लाभान्वित होंगे। यह राहत मध्यम वर्ग को आर्थिक सुरक्षा देगी और उनकी क्रय शक्ति बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगी।

बजट 2026 में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) पर बदलाव

केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए, जो मुख्य रूप से फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट पर केंद्रित हैं। फ्यूचर्स पर STT दर को मौजूदा 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज दोनों पर इसे 0.15% किया गया है (पहले क्रमशः 0.1% और 0.125% के आसपास)।

हालाँकि आयकर विभाग ने स्पष्ट किया कि यह बढ़ोतरी केवल F&O पर लागू है, अन्य STT दरें अपरिवर्तित हैं। विभाग के अनुसार, ऑप्शंस और फ्यूचर्स का ट्रांजेक्शन वॉल्यूम भारतीय जीडीपी (लगभग 300 लाख करोड़ रुपए) का 500 गुना से अधिक (1.5 लाख लाख करोड़ रुपये) है। इस अत्यधिक सट्टेबाजी को नियंत्रित करने और सरकारी राजस्व बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई- सेंसेक्स 1500 अंक से अधिक टूटा। ट्रेडर्स और निवेशकों में निराशा है, क्योंकि F&O ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। सरकार का तर्क है कि यह छोटे निवेशकों को सट्टेबाजी से होने वाले नुकसान से बचाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बाजार की अस्थिरता कम कर सकता है, लेकिन अल्पकाल में लिक्विडिटी प्रभावित होगी। कुल मिलाकर, यह बदलाव पूँजी बाजार में संतुलन की दिशा में एक सुधारात्मक प्रयास है।

एक संतुलित और दूरदर्शी बजट

यह बजट विकास और समावेश का बेहतरीन संतुलन बनाता है। टैक्स राहत से मध्यम वर्ग खुश है, कृषि और एमएसएमई पर फोकस से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और सुधार लंबी अवधि का विकास सुनिश्चित करेंगे। महिलाओं और युवाओं की सशक्तिकरण योजनाएँ सामाजिक बदलाव लाएँगी। कुछ आलोचनाएँ भी हैं, जैसे पुरानी टैक्स व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं और कुछ क्षेत्रों में ज्यादा राशि की उम्मीद थी, लेकिन कुल मिलाकर यह बजट व्यावहारिक और दूरदर्शी है।

यह आत्मविश्वास जगाता है कि भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनेगा। किसान, महिला, युवा और मध्यम वर्ग सभी को शामिल करके यह ‘सबका विकास’ का सच्चा उदाहरण है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यह बजट भारत को 21वीं सदी की महाशक्ति बनाने की दिशा में मजबूत कदम है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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