असम में विधानसभा चुनाव से पहले विशेष मतदाता सूची संशोधन (SR) प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस दौरान 5.86 लाख नए नाम जोड़े गए, जबकि 2.43 लाख नाम हटा दिए गए, जिससे अंतिम मतदाता सूची तैयार हो गई है। हैरानी की बात यह है कि इस संशोधित सूची में कुल मतदाता संख्या कम होने के बावजूद ये जानकारी सामने आती है कि 8 मुस्लिम-बहुत जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है।
जिलावार आँकड़ों के अनुसार, असम के 35 जिलों में से केवल 10 जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। यह आँकड़ा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की चिंता को ही साबित करता दिख रहा है, क्योंकि इन जिलों में डेमोग्राफी और मतदाता वृद्धि के रुझान चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
असम में SR की अंतिम सूची में हटाए गए 2.49 करोड़ मतदाता
SR प्रक्रिया में असम के 35 जिलों में हर बूथ-लेवल अधिकारी (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाता सूची की पूरी जाँच की। हर व्यक्ति से उनका नाम, उम्र और पहचान के दस्तावेज स्त्यापित किए गए। इसमें यह देखा गया कि कौन नए योग्य मतदाता हैं, कौन मर चुका है या कौन दूसरी जगह स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुका है, और किन लोगों के नाम डुप्लीकेट या गलत तरीके से सूची में दर्ज थे।
प्रक्रिया के बाद 10 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की गई, जिसमें कुल 2,49,58, 139 मतदाता दर्ज हैं। इनमें लगभग 1.24 करोड़ पुरुष, 1.24 करोड़ महिलाएँ और 343 तीसरें-लिंग मतदाता शामिल हैं। यह संख्या मसौदा सूची की तुलना में 2,43,485 मतदाता कम हैं, जो कि लगभग 0.97 की गिरावट दर्शाती है।
इनमें 5,86,000 नए नाम सूची में जोड़े गए, जिनमें मुख्य रूप से वे युवा शामिल थे जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की उम्र पूरी की और वे लोग जिन्होंने पिछले अपडेट में अपने नाम दर्ज नहीं करवाए थे। वहीं, 2,43,000 नाम हटाए गए, जिनमें मृतक लोग, दूसरी जगह स्थाीय रूप से गए लोग और डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ शामिल थीं।
मुस्लिम-बहुल जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी
असम के SR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो डिटेल सामने आई है उसे देखकर पता चलता है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने के बावजूद कई जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। कुल 35 जिलों में से 10 जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी और इनमें से 8 मुस्लिम-बहुत जिले सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाले रहे हैं।
इन जिलों में ड्राफ्ट सूची की तुलना में मतदाता संख्या में बढ़ोतरी सबसे अधिक दर्ज की गई। बारपेटा में सबसे ज्यादा लगभग 28,000 (2.1% की वृद्धि) नए मतदाता जुड़े, जबकि दक्षिण सलमारा में सबसे कम करीब 200 (0.1% की वृद्धि) मतदाता बढ़े। इसी के साथ धुबरी, गोलपाड़ा, मोरीगाँव, नगाँव और बोंगाईगाँव जैसे पश्चिमी असम के जिलों में भी 5,000 से 10,000 के बीच वोटर संख्या में वृद्धि देखी गई। यह आँकड़े स्थानीय डेमोग्राफी में बदलाव को साफ दिखाता है।
इनके अलावा दो गैर-मु्स्लिम बहुल जिले माजुली और बजाली में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। माजुली में लगभग 209 और बजाली में करीब 1,300 मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। इसके विपरीत, असम के कुछ जनजातीय बहुल जिलों जैसे दीमा हसाओ, कार्बी आंगलोंग, कोराझार और बोडोलैंड में मतदाता संख्या घट गई। कुल मिलाकर 24 जिलों में मतदाताओं की संख्या कम हुई, जबकि मुस्लिम-बहुल जिलों में बढ़ोतरी हुई।
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने जताई थी चिंता
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पिछले कुछ समय में बार-बार राज्य की बदलती डेमोग्राफी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों पर कहा है कि अगर मौजूदा रुझान इसी तरह जारी रहे तो 2041 तक असम मुस्लिम बहुल राज्य बन सकता है।
सरमा का कहना है कि 1951 में असम में मुस्लिम आबादी लगभग 12 प्रतिशत थी, जो 2011 की जनगणना तक बढ़कर करीब 34 प्रतिशत हो गई। उनका दावा है कि कुछ जिलों में यह प्रतिशत 50 से भी अधिक हो चुका है और कई क्षेत्रों में तेजी से जनसंख्या संतुलन बदल रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो आने वाली जनणनाओं में मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुँच सकती है, जिससे राज्य की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संरचना पर असर पड़ेगा। उन्होंने इस मुद्दे को ‘डेमोग्राफिक चैलेंज’ बताते हुए कहा कि यह केवल आँकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि जमीन, संसाधनों, राजनीति प्रतिनिधित्व और स्थानीय समुदायों की पहचान से जुड़ा सवाल है।
अब राज्य में SR की अंतिम मतदाता सूची में मुस्लिम-बहुल जिलों में मतदाता वृद्धि के आँकड़ों से मुख्यमंत्री की चिंता सही साबित हो रही है। सीएम ने भी इसे व्यापक डेमोग्राफी परिप्रेक्ष्य में देखने की बात कही है।


