Homeविचारराजनैतिक मुद्दे'संत' की यात्रा से 'सनातन' ही गायब, सपा-कॉन्ग्रेस ने किया हाइजैक: UP में विपक्ष...

‘संत’ की यात्रा से ‘सनातन’ ही गायब, सपा-कॉन्ग्रेस ने किया हाइजैक: UP में विपक्ष का प्रोपेगेंडा टूल तो नहीं बन रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, ‘गविष्टि यात्रा’ की टाइमिंग-रूट को लेकर भी सवाल

यह यात्रा 81 दिनों तक चलने वाली है और गोरखपुर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली है। इसी बात को लेकर भी अब बातें होने लगी हैं। लोग ये पूछ रहे हैं कि भई अगर यह यात्रा पूरी तरह धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य से निकाली गई है तो फिर इसका रूट विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से क्यों डिजाइन किया गया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 3 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से गायों के संरक्षण और गोवंश से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए 81 दिवसीय ‘गविष्टि (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा’ की शुरुआत की थी। इस यात्रा का घोषित उद्देश्य गायों के संरक्षण को बढ़ावा देना और गाय माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने जैसे मुद्दों पर समाज को जागरूक करना था। शुरुआत में इसे पूरी तरह धार्मिक और सामाजिक अभियान के तौर पर पेश किया गया। यह संदेश दिया गया कि यह यात्रा भारतीय परंपरा, धर्म और संस्कृति से जुड़े एक संवेदनशील विषय को लेकर जनजागरण की कोशिश है।

उम्मीद जताई जा रही थी कि यह अभियान गाँवों और कस्बों तक पहुँचकर लोगों में गो संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा करेगा। लेकिन जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ रही है उसका स्वरूप बदलता हुआ दिखाई देने लगा है। अब इस यात्रा में विपक्षी दलों के नेताओं की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है। खासतौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) और कॉन्ग्रेस से जुड़े कई नेता यात्रा के मंचों पर नजर आने लगे हैं।

यह यात्रा जिस-जिस विधानसभा से होकर गुजर रही है, वहाँ पर सपा और कॉन्ग्रेस जैसे दलों के नेता इस यात्रा को अपना समर्थन दे रहे हैं और आगे बढ़कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का स्वागत सत्कार कर रहे हैं। यात्रा की शुरुआत से ही इसकी कमान सपा के नेताओं के हाथों में दिख रही है। कुशीनगर पहुँचने पर सपा के नेता और पूर्व मंत्री राधे श्याम सिंह ने इसका स्वागत किया। देवरिया में सपा के पूर्व प्रत्याशी मुरली मनोहर जायसवाल यात्रा में सक्रिय दिखे। बलिया में सपा और कॉन्ग्रेस के नेताओं की भरमार रही। अभी हाल ही में सोनभद्र पहुँचने पर सपा सांसद छोटेलाल खरवार इस यात्रा में प्रमुख रूप से नजर आए।

जाहिर है कि धार्मिक यात्राओं में नेताओं का शामिल होना कोई नई बात नहीं है और कई जगहों पर इस यात्रा में बीजेपी के नेता भी शामिल हुए हैं। लेकिन जिस तरह का पैटर्न इस यात्रा में दिख रहा है उससे इस यात्रा को लेकर कई सवाल उठने शुरू हो गए हैं। भले ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शंकराचार्य होने को लेकर विवाद हो लेकिन उनके घोर से घोर विरोधी भी उनके संत होने पर सवाल नहीं उठा सकते हैं। संतों से जो उम्मीदें हैं, वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भी हैं।

कहीं विपक्ष का राजनीतिक हथियार तो नहीं बन रही गविष्टि यात्रा?

संतों की यात्राओं को हमेशा समाज को जोड़ने, लोगों में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना पैदा करने और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के माध्यम के तौर पर देखा जाता रहा है। इसी कारण जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ‘गविष्टि यात्रा’ शुरू हुई तो इसे भी एक धार्मिक और सामाजिक अभियान माना गया। अब जिस तरह से इस यात्रा में सपा और कॉन्ग्रेस के नेताओं की सक्रिय भूमिका लगातार सामने आ रही है उससे यह सवाल उठने लगो हैं कि कहीं यह यात्रा धीरे-धीरे राजनीतिक रंग तो नहीं ले रही।

सपा-कॉन्ग्रेस के नेताओं की सक्रिय भागीदारी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विपक्षी दलों ने इस यात्रा को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की व्यक्तिगत मंशा पर भले सवाल न हों लेकिन जिस तरह का माहौल यात्रा के आसपास बनता दिखाई दे रहा है उसमें उन्हें यह जरूर देखना चाहिए कि जिन उद्देश्यों को लेकर यह यात्रा शुरू की गई थी क्या वे वास्तव में पूरे हो रहे हैं या नहीं।

लोगों के मन में यह सवाल भी है कि अगर यह यात्रा पूरी तरह समाज और धर्म से जुड़ा अभियान है तो फिर आम हिंदू समाज की उतनी बड़ी भागीदारी क्यों नहीं दिखाई दे रही। यात्रा में सनातन को लेकर बातें होने से ज्यादा राजनीतिक बातें हो रही हैं। कई जगहों पर राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी भी खूब दिखाई दे रही है जबकि आम हिंदू समाज या सामाजिक संगठनों की सक्रियता उतने बडे़ स्तर पर नहीं नजर आ रही हैं। इन्हीं सबके चलते अब यह धारणा भी बन रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि यह यात्रा विपक्ष के लिए राजनीति का एक हथियार बनती जा रही हो। सवाल और भी हैं।

विधानसभाओं पर आधारित रूट और यात्रा की टाइमिंग पर सवाल

यह यात्रा 81 दिनों तक चलने वाली है और गोरखपुर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली है। इसी बात को लेकर भी अब बातें होने लगी हैं। लोग ये पूछ रहे हैं कि भई अगर यह यात्रा पूरी तरह धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य से निकाली गई है तो फिर इसका रूट विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से क्यों डिजाइन किया गया।

आमतौर पर विधानसभा पर आधारित प्लानिंग राजनीतिक अभियानों या चुनावी रणनीतियों में ही नजर आती है, राजनीतिक दल अपनी विधानसभाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से इस तरह के कार्यक्रम डिजाइन करते हैं। रही बात धार्मिक यात्राओं की तो वे आम तौर पर तीर्थस्थलों, धार्मिक केंद्रों या सामाजिक जरूरत वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। इस यात्रा के रूट डिजाइन ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और बढ़ा दिया है।

इसके साथ ही सवाल इस यात्रा की टाइमिंग को लेकर भी हैं। क्योंकि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बनने लगता है। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने प्रस्तावित हैं। ऐसे में विपक्षी दलों की मौजूदगी और विधानसभाओं वाले रूट जैसी चीजों को लोग आपस में जोड़कर देख रहे हैं। यही वजह है कि अब यह यात्रा केवल गो संरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि इसके राजनीतिक हाईजैक होने की आशंका और इसके पीछे की रणनीति को लेकर भी लगातार बहस बढ़ती जा रही है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Searched termsगविष्टि यात्रा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, गोसंरक्षण यात्रा, यूपी राजनीति, सपा कॉन्ग्रेस गविष्टि यात्रा, विधानसभा रूट यात्रा, धार्मिक यात्रा विवाद, उत्तर प्रदेश राजनीति 2026, गो माता अभियान, गोरक्षार्थ यात्रा, चुनावी रणनीति यूपी, राजनीतिक विवाद यात्रा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा पर विवाद, क्या है गविष्टि यात्रा, गविष्टि यात्रा का रूट क्या है, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सपा समर्थन, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का क्यों हो रहा विरोध, Gavishti Yatra, Swami Avimukteshwarananda Saraswati, Cow Protection Yatra, UP Politics, SP Congress Gavishti Yatra, Assembly Route Yatra, Religious Yatra Controversy, Uttar Pradesh Politics 2026, Cow Mother Campaign, Cow Protection Yatra, Election Strategy UP, Political Controversy Yatra, Controversy over Swami Avimukteshwarananda's Yatra, What is Gavishti Yatra, What is the route of Gavishti Yatra, SP support to Swami Avimukteshwarananda, Why is Swami Avimukteshwarananda being opposed,
शिव
शिव
7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

युवक के फर्जी साइन करके महिला दे रही थी शादी का प्रमाण, ‘हिंदू विवाह अधिनियम’ ने बचाई पीड़ित की जान: पढ़िए गुजरात HC ने...

ब्रिटेन में रहने वाले कौशल के धोखे से हस्ताक्षर लेकर महिला ने खुद को उसकी पत्नी बताया। लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने 'सप्तपदी' की रस्म न होने के आधार पर शादी को अमान्य करार दिया।

US कोर्ट ने चीनी जालसाज को दी 30 साल की सजा, पश्चिमी मीडिया बताता था ‘बागी’: जानें गुओ वेनगुई की कहानी और राणा अय्यूब...

चीन विरोधी बागी होने का नाटक कर पश्चिमी मीडिया में छाए रहने वाले चीनी अरबपति भगोड़े गुओ वेनगुई को अमेरिकी अदालत ने 30 साल की सजा सुनाई है।
- विज्ञापन -