प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार (6 जून 2026) को आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की बैठक हुई। बैठक में चर्चा हुई कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 5 जून को उठाए गए कदमों से भारत में करीब 70 अरब डॉलर (लगभग 6 लाख करोड़ रुपए) का विदेशी निवेश आ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भारत में पूँजी प्रवाह तेज होगा। इससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, सरकार की उधारी लागत कम हो सकती है और वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारत की स्थिति और बेहतर होगी।
बैठक में वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने, दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं और सुधारों को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा, प्रधान सचिव और पूर्व RBI गवर्नर शक्तिकांत दास, परिषद के अध्यक्ष एस महेंद्र देव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
Chaired a meeting of the Economic Advisory Council to the Prime Minister. Deliberated on a wide range of issues relating to India’s economic transformation and long-term development priorities. Also shared perspectives on adding more momentum to the reforms journey and ensuring… pic.twitter.com/1BkP1EyuFe
— Narendra Modi (@narendramodi) June 6, 2026
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि भारत के आर्थिक परिवर्तन, दीर्घकालिक विकास और सुधारों की गति को बढ़ाने पर व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि ‘Ease of Living’ और ‘Ease of Doing Business’ को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार साझा किए गए।
सरकार और RBI ने क्या कदम उठाए?
विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए वित्त मंत्रालय ने बड़ा कर सुधार किया है। सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के सरकारी बॉन्ड में निवेश पर लगने वाले शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स को समाप्त कर दिया है। इसके अलावा सरकारी बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज आय पर लगने वाला विदहोल्डिंग टैक्स भी हटा दिया गया है।
वहीं RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया। केंद्रीय बैंक ने भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और सप्लाई चेन संबंधी चिंताओं के बीच न्यूट्रल रुख बनाए रखा। इसके साथ ही RBI ने विदेशी पूँजी आकर्षित करने के लिए कई अतिरिक्त कदमों की घोषणा की।
इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के लिए एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) जुटाने हेतु रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा और FCNR(B) डिपॉजिट योजना को फिर से शुरू करना शामिल है। इस योजना के तहत विदेशी मुद्रा जमा पर हेजिंग लागत RBI वहन करेगा। वर्ष 2013 में इसी योजना के जरिए भारत ने लगभग 26 अरब डॉलर जुटाए थे।
क्यों है 70 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त मंत्रालय और RBI द्वारा उठाए गए कदम विदेशी निवेशकों के लिए भारत को अधिक आकर्षक बनाएँगे। करों में राहत मिलने से विदेशी निवेशकों की लागत कम होगी, जबकि RBI की नई सुविधाएँ बाहरी वित्तपोषण को आसान बनाएँगी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा है कि केंद्रीय बैंक किसी निश्चित निवेश लक्ष्य को लेकर काम नहीं कर रहा है, लेकिन उसे बाहरी उधारी, विदेशी जमा और इक्विटी निवेश के माध्यम से मजबूत पूँजी प्रवाह की उम्मीद है। इन कदमों से भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को भी मजबूती मिल सकती है।
ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत में संभावित विदेशी निवेश का बड़ा हिस्सा भारतीय सरकारी बॉन्ड्स के ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने पर निर्भर माना जा रहा है। दुनिया के कई बड़े निवेश फंड इन वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और उसी के आधार पर निवेश करते हैं।
यदि भारतीय सरकारी बॉन्ड इस प्रमुख इंडेक्स में शामिल होते हैं, तो बड़ी मात्रा में निष्क्रिय (Passive) निवेश अपने आप भारत की ओर आएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल इस इंडेक्स में शामिल होने से अगले 10 महीनों में 20 से 25 अरब डॉलर तक का निवेश आ सकता है।
भारत पहले ही कई प्रमुख वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में जगह बना चुका है। जून 2024 में JPMorgan ने भारतीय बॉन्ड को अपने उभरते बाजार सूचकांक में शामिल किया था। इसके बाद जनवरी 2025 में ब्लूमबर्ग इमर्जिंग मार्केट लोकल करेंसी इंडेक्स और सितंबर 2025 में FTSE Russell के संबंधित सूचकांक में भी भारतीय सरकारी बॉन्ड शामिल किए गए।
हालाँकि जनवरी 2026 में Bloomberg Index Services Ltd (BISL) ने भारतीय सरकारी बॉन्ड को अपने प्रमुख ग्लोबल इंडेक्स में शामिल करने का फैसला टाल दिया था। कंपनी ने कहा था कि बाजार ढाँचे और परिचालन संबंधी कुछ मुद्दों पर और मूल्यांकन की जरूरत है। BISL ने संकेत दिया था कि इस विषय पर अगला अपडेट 2026 के मध्य तक दिया जाएगा।
भारत के लिए कितना बड़ा अवसर?
सरकार की कर राहत, RBI की नई निवेश प्रोत्साहन योजनाएँ, मजबूत GDP वृद्धि और ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स में संभावित शामिल होने की संभावना मिलकर भारत के लिए बड़ा अवसर पैदा कर रही हैं। यदि ये सभी परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत में करीब 70 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आ सकता है।
इससे न केवल विदेशी मुद्रा भंडार और निवेश बढ़ेगा, बल्कि सरकार की उधारी लागत कम होगी, वित्तीय बाजारों को मजबूती मिलेगी और वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। ऐसे समय में जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ अनिश्चितता का सामना कर रही हैं, भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर माना जा रहा है।


