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‘अब तेरी बारी… कन्हैयालाल जैसा हाल करेंगे’: उज्जैन के महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरी के पीछे पड़ी इस्लामी जमात, जानिए कैसे कट्टरपंथियों ने पाकिस्तान के नारे को बना ली है अपनी पहचान

महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि को यह धमकी भरा पत्र डाक के माध्यम से मिला। पत्र प्रयागराज से भेजा गया बताया जा रहा है। पत्र में बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा गया है, "तू अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा, तूने नबी की शान में गुस्ताखी की है।"

उज्जैन के मौन तीर्थ पीठ के पीठाधीश्वर और निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज को इस्लामी कट्टरपंथियों ने जान से मारने की धमकी दी है। डॉ. सुमनानंद महाराज को भेजे गए धमकी भरे पत्र में उदयपुर के चर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड और हाल ही में दिल्ली में बकरीद पर ‘सूर्या की कुर्बानी’ जैसा अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। इन्हें भी ‘सर तन से जुदा’ कर मारा गया था। धमकी मिलने के बाद उज्जैन नगरी के संत समाज में नाराजगी है, वहीं पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ मामले की जाँच में जुट गई हैं।

धमकी भरे पत्र में क्या लिखा?

महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि को यह धमकी भरा पत्र मंगलवार (16 जून 2026) को डाक के माध्यम से मिला। पत्र प्रयागराज से भेजा गया बताया जा रहा है। पत्र में बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा गया है, “तू अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा, तूने नबी की शान में गुस्ताखी की है।”

धमकी भरा पत्र (फोटो साभार: NDTV)

पत्र में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा ‘सर तन से जुदा’ की चर्चित घटनाओं का हवाला देते हुए लिखा, “कन्हैया लाल दर्जी के कत्ल का वीडियो देखा। दिल्ली के बकरीद पर काफिर पिल्ले की कुर्बानी का वीडियो देख। अब तेरी बारी है। जहन्नुम में जाएगा तू।”

धमकी देने वाले ने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का भी जिक्र किया है। पत्र में लिखा गया है, “मोदी और मोहन, कोई बचा नहीं पाएगा। इंशाल्लाह। बच सको तो बचो।”

धमकी मिलने के बाद महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद ने पुलिस प्रशासन को सूचना दी है। मामले की शिकायत दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। पुलिस पत्र भेजने वाले की पहचान करने और उसके नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

कई बार महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि को मिली धमकियाँ, हुए हमले

यह पहला मौका नहीं है जब डॉ. सुमनानंद गिरि को निशाना बनाया गया हो। डॉ. सुमनानंद का कहना है कि यह हरकत पहली बार नहीं हुई है, इससे पहले भी चार बार धमकी भरे पत्र भेजे जा चुके है और यह पाँचवीं घटना है। उन्होंने बताया कि साल 2023 से उन्हें जान से मारने धमकियाँ मिल रही हैं। हिंसक मजहबी विचारधारा जैसे लव जिहाद, शरिया कानून और अन्य मुद्दों पर खुलकर बोलने के कारण वे कट्टरपंथी तत्वों के निशाने पर रहते हैं।

इससे पहले दिसंबर 2025 में एक उर्दू में लिखा धमकी भरा पत्र मिला था, जो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी सगीर अहमद पिता रिजवान के पते से भेजा गया था। इस पत्र में लिखा था, “काफिर सुमन आनंद, तू बार-बार नबी की तौहीन करता है। नामुराद, तुम अच्छी तरह जानते हो कि गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा जिस्म से जिस्म को जुदा करना है। तुम बहुत मुनाफिक (पाखंडी) और बदतमीज आदमी हो। तुम्हारी जिंदगी हमारे रहम-ओ-करम पर है। खामोश सफर में तुम हमारी जमात को मुसलसल गुमराह कर रहे हो। हम तुम्हारे लिए कयामत का इंतजार नहीं करेंगे।” धमकी भरे पत्र में यह भी लिखा था कि राम मंदिर में एक दिन अजान गूँजेगी।

साल 2023 में भी ऐसी ही जान से मारने की धमकी डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज को मिली थी। तब भी उर्दू में लिखे पत्र में महामंडलेश्वर का ‘सर तन से जुदा’ करने के बात कही गई थी। इसके अलावा फोन कॉल, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भी धमकियाँ मिल चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी उन पर उज्जैन और वडोदरा में हमले हो चुके हैं, लेकिन अब तक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है।

कैसे महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज बने इस्लामी कट्टरपंथियों का निशाना?

दरअसल, महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि अकसर मुस्लिम धर्म परिवर्तन, लव जिहाद, मजहबी कट्टरपंथ विरोधी और हिंदू-मुस्लिम से जुड़े मुद्दों पर खुलकर विचार रखते हैं। उज्जैन में अपने आश्रम में महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज ने मुस्लिम लड़कियों को सनातन धर्म में घर वापसी कराई है। साथ ही, एक महीने पहले ही एक मुस्लिम लड़के को विधि-विधान से हिंदू धर्म में शामिल किया था।

2024 में मुस्लिम महिला फरहा ने अनिकेत चौबे से विवाह कर सनातन धर्म अपनाया था। इसके बाद फरहा की बेटी जारा ने भी घर वापसी कर ली थी। इसे भी विधि-विधान से महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज के आश्रम में ही संपन्न कराया था। पिछले महीने मुस्लिम युवक सलमान खान ने स्वेच्छा से सनातन धर्म में घर वापसी की और अपना हिंदू नाम ‘शांतनु’ रख लिया। शांतनु को भी महामंडलेश्र के आश्रम से ही दीक्षा प्राप्त हुई। वह कई सालों से सनातन धर्म में घर वापसी की दीक्षा दे रहे हैं।

उनके कई बयान भी सामने आए, जिनको लेकर विवाद छिड़ा। 2024 में महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि ने प्रयागराज के महाकुंभ में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने की माँग की थी। उन्होंने कहा ता कि जब मुस्लिमों के हज में हिंदुओं को प्रवेश नहीं मिलता, तो कुंभ जैसे हिंदू धार्मिक आयोजनों में मुस्लिमों को भी नहीं आना चाहिए।

यही वजह है कि इस्लामी कट्टरपंथी उनसे चिढ़े रहते हैं और उन्हें आए दिन ‘सर तन से जुदा’ की धमकी देते रहते हैं।

भारत में आम बन चुकीं ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ

डॉ. सुमनानंद गिरि को मिली ताजा धमकी कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में देश में ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे और धमकियाँ बार-बार सामने आई हैं। इसकी जड़ें पाकिस्तान में देखी जाती हैं, जहाँ 2011 में पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर की उनके ही अंगरक्षक और आतंकी मुमताज कादरी ने हत्या कर दी थी। तासीर पर ईशनिंदा कानून की आलोचना करने का आरोप लगाया गया था। तब मुमताज कादरी को पाकिस्तान के एक मौलाना खादिम हुसैन रिजवी ने ‘शहीद’ और ‘गाजी’ की तरह पेश किया।

इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथी समूहों द्वारा मजहबी अपमान आरोपों पर हिंसा और हत्या को उचित ठहराने के लिए ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे बुलंद किए जाने लगे। धीरे-धीरे यह नारा पाकिस्तान से निकलकर दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों तक पहुँचा और भारत में भी कई मामलों में धमकियों, उकसावे और हिंसक घटनाओं के संदर्भ में सुनाई देने लगा।

भारत में पिछले कुछ वर्षों में ऐसी घटनाएँ लगातार सामने आई हैं। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को भी ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ मिल चुकी हैं। जब उत्तर प्रदेश के बरेली के फैज रजा और सलमान ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सर तन से जुदा की धमकी दी। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था।

इसके अलावा उज्जैन में एक कथावाचक को लव जिहाद पर बोलने के लिए सोशल मीडिया पर ‘सर तन से जुदा’ की धमकी दी गई। मामला पुलिस तक पहुँचा और साइबर माध्यम से धमकी देने वालों की तलाश शुरू की गई। मध्य प्रदेश के इंदौर में विश्व हिंदू परिषद के नेता संतोष शर्मा को भी इसी तरह की धमकी मिली।

मध्य प्रदेश के इंदौर में विश्व हिंदू परिषद के नेता संतोष शर्मा को भी इसी तरह की धमकी मिली। आरोप था कि सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाते हुए सिर कलम करने की चेतावनी दी गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई।

राजस्थान के कोटा में भाजपा कार्यकर्ता को धमकी भरा पत्र मिला था। पत्र में ‘सर तन से जुदा’ की धमकी दी गई थी और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी। अजमेर दरगाह से जुड़े एक मामले ने भी देशभर में सुर्खियाँ बटोरी थीं। दरगाह के सामने कुछ लोगों ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने लगाए थे। यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा और बाद में अदालत की कार्यवाही का विषय भी बना।

इन सभी घटनाओं के बीच सबसे भयावह और चर्चित मामला उदयपुर के कन्हैया लाल साहू की हत्या का रहा। 28 जून 2022 को राजस्थान के उदयपुर में दो इस्लामी कट्टरपंथी रफीक मोहम्मद और अब्दुल जफ्फार ने उन्हें उनकी दुकान में घुसकर धारदार हथियार से गला काटकर मार डाला था। हत्या के बाद आरोपितों ने हँसते हुए वीडियो जारी कर कहा था कि कन्हैयाय लाल को ‘गुस्ताख ए नबी की सजा में सर तन से जुदा’ की सजा मिली है।

यही कारण है कि जब डॉ. सुमनानंद गिरि जैसे संतों को कन्हैया लाल का उदाहरण देकर धमकी दी जाती है, तो उसे केवल एक सामान्य चेतावनी नहीं माना जाता। पिछले वर्षों की घटनाएँ बताती हैं कि मजहब के नाम पर हत्या करने से इस्लामी कट्टरपंथी बिल्कुल नहीं कतराते हैं। उनके लिए ऐसी धमकियों आम बन चुकी हैं, जो भारत को अगला पाकिस्तान समझ बैठे हैं।

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