सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) और अखिलेश यादव के राम मंदिर को लेकर दिए गए बयानों पर निशाना साधा है। बीते कई दिनों से अखिलेश यादव राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोल रहे हैं।
उनके बयानों पर सच्चाई सामने लाने के लिए कैबिनेट मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अखिलेश को उनके कार्यकाल में किए गए खनन घोटाले और गोमती रिवरफ्रंट घोटाले को लेकर धागे खोल दिए।
सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सीधे टैग करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने सपा के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर घोटालों के पैसों को खपाने का आरोप लगाया है। राजभर ने लिखा, “खनन और गोमती रिवर फ्रंट का पैसा कहां खपा रहे हैं ये बात डिंपल, राम गोपाल यादव और अखिलेश यादव के अलावा ओम प्रकाश राजभर को भी पता है।”
खनन और गोमती रिवर फ्रंट का पैसा कहां खपा रहे हैं ये बात डिंपल, राम गोपाल यादव और अखिलेश यादव के अलावा ओम प्रकाश राजभर को भी पता है।
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) June 18, 2026
एक खुलासे से आपकी ये हालत हो गई। फाइलों का पूरा पुलिंदा लेकर बैठा हूं। कांप क्यों रहे हो अखिलेश? आँख खोलते ही बलिया फोन मिला दिए न?@yadavakhilesh
राजभर यहीं नहीं रुके, उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीतिक घबराहट पर तंज कसते हुए आगे लिखा, “एक खुलासे से आपकी ये हालत हो गई। फाइलों का पूरा पुलिंदा लेकर बैठा हूं। कांप क्यों रहे हो अखिलेश? आँख खोलते ही बलिया फोन मिला दिए न?”
असल में बलिया लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी के मजबूत नेता सनातन पांडेय का गढ़ मानी जाती है। राजभर का यह तंज इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि उनके खुलासे या दावों के बाद अखिलेश यादव को यह डर सताने लगा है कि सुभासपा उनके नेताओं को तोड़ रही है, या बलिया के सपा नेता राजभर/भाजपा के संपर्क में हैं।
‘लंका में राजनीतिक शॉर्ट सर्किट’ का दावा कर चुके हैं राजभर
राजभर का यह तीखा हमला उनके उस पिछले बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर एक गोपनीय पत्र सौंपा है।
राजभर के मुताबिक, उस पत्र में सपा के कई बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं जो जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। राजभर ने आगाह किया कि सपा बहुत जल्द महाराष्ट्र की शिवसेना-NCP और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की तर्ज पर एक बड़ी टूट का गवाह बनने वाली है और अखिलेश यादव की ‘लंका में राजनीतिक शॉर्ट सर्किट’ होने वाला है।
जब समाजवादी पार्टी ने राजभर के बयानों को मनगढ़ंत बताया गया तो राजभर ने सीधे पुराने कार्यकाल के विवादित मुद्दों को हवा दे दी। उन्होंने सपा सरकार के दौरान हुए कथित खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट को सामने लाकर अखिलेश यादव, डिंपल यादव और रामगोपाल यादव को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
राजभर का इशारा साफ है कि यदि उन्होंने इन फाइलों को सार्वजनिक किया, तो सपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी।
सपा की सफाई- मुद्दों से ध्यान भटकाने की हो रही साजिश
राजभर के इस सीधे और आक्रामक हमले पर समाजवादी पार्टी तोड़ निकालने का हरसंभव प्रयास कर रही है। सपा प्रवक्ताओं का कहना है कि ओम प्रकाश राजभर केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह की अनर्गल और आधारहीन बयानबाजी कर रहे हैं।
सपा का आरोप है कि राजभर बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और पेपर लीक जैसे जनता से जुड़े असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा के इशारे पर ‘माउथपीस’ की तरह काम कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने भी पहले राजभर के दावों को खारिज करते हुए इसे केवल ‘टीआरपी और मनोरंजन’ की राजनीति करार दिया था।
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों और उप-चुनावों की आहट के बीच राजभर का यह आक्रामक रूप बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव इस सीधे हमले का जवाब किस तरह देते हैं।


