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6 पर FIR, 4 गिरफ्तार और 4 अधिकारी सस्पेंड: लखनऊ अलीगंज अग्रिकांड में CM योगी ने रातोंरात लिया सख्त एक्शन, SIT गठित कर कहा- 7 दिन में चाहिए हर जवाब

मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पाँच कालीदास मार्ग पर देर रात उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री ने मामले की गहन जाँच के लिए दो सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया। वहीं पुलिस ने भी जाँच में तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों के भीतर चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात तक लगातार मॉनिटरिंग करते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ में चल रहे सभी कार्यक्रम छोड़ सीधे लखनऊ पहुँचे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्य को तेज किया गया, घायलों के इलाज की विशेष व्यवस्था की गई और कुछ ही घंटों के भीतर आरोपितों की गिरफ्तारी व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई।

लखनऊ पहुँचने के बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली और मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट माँगी। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पहुँचे। यहाँ उन्होंने भर्ती घायलों का हालचाल जाना और उनके परिजनों से बातचीत की।

मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान

हादसे में जान गँवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके अलावा घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि देने का भी ऐलान किया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री आवास पर हुई हाई लेवल मीटिंग, SIT का गठन

केजीएमयू से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पाँच कालीदास मार्ग पर देर रात उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में शासन, पुलिस, अग्निशमन, विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा की और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मामले की गहन जाँच के लिए दो सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया। एसआईटी में पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। जाँच दल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार के अनुसार एसआईटी यह जाँच करेगी कि भवन में फायर सेफ्टी मानकों का पालन हुआ था या नहीं, संबंधित विभागों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया या नहीं और किन अधिकारियों या व्यक्तियों की लापरवाही से यह हादसा हुआ। एसआईटी को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

अलीगंज थाने में मुकदमा, 4 आरोपित गिरफ्तार

घटना के संबंध में थाना अलीगंज में 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 110, 105, 125, 3(5) और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत छह अभियुक्तों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने जाँच में तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों के भीतर चार आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया। गिरफ्तार किए गए आऱोपितों में अलीगंज निवासी रामकृ्ष्ण उपाध्याय, सीतापुर रोड क्षेत्र के वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, बालागंग निवासी तुषॉक कृष्णा जायसवाल और मड़ियाँव निवासी सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। पुलिस अन्य आरोपितों और जिम्मेदार लोगों की तलाश में भी जुटी हुई है।

चार अधिकारियों पर गिरी गाज

प्रारंभिक जाँच में लापरवाही सामने आने पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इनमें जानकीपुरम बिजली विभाग के एक्सईएन कलेक्शन गौरव कुमार, इंदिरा नगर फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सहायक अभियंता अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे शामिल हैं।\

सरकार का मानना है कि अगर संबंधित विभाग समय पर निरीक्षण और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करते तो इस तरह की बड़ी दुर्घटना को रोका जा सकता था। इसी कारण शुरुआती स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

2016 में एलडीए ने जारी किया था ध्वस्तीकरण आदेश

जाँच के दौरान सामने आए दस्तावेजों के अनुसार अलीगंज सेक्टर-डी के उषा मेहता मार्ग स्थित इस तीन मंजिला भवन का आवासीय नक्शा 20 अगस्त 2014 को स्वीकृत हुआ था। हालाँकि वर्ष 2016 में एलडीए ने कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर मामला दर्ज किया और 10 मई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश भी जारी किया था। बाद में भवन मालिकों की आपत्तियों के बाद 5 जुलाई 2016 को यह आदेश वापस ले लिया गया था। अब एसआईटी इस पहलू की भी जाँच कर रही है।

यह भी सामने आया कि जिस प्रॉपर्टी में आग लगी थी, उसके कई बार मालिक बदले गए थे। अधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक भवन संख्या एमएस/102/डी वर्ष 1980 में आवंटित हुई थी। इसके बाद 2005 और फिर 2013 में इसका मालिकाना हक बदला। 7 अगस्त 2014 को एलडीए ने इसे नए मालिकों के नाम म्यूटेट किया था।

सोमवार (22 जून 2026) दोपहर करीब 3 बजे इसी प्रॉपर्टी में आग लगी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई। प्रारंभिक जाँच में आग एसी डक्ट से शुरू होने और पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट नहीं होने की आशंका जताई गई है। अब जाँच एजेंसियां भवन मानकों और फायर सेफ्टी नियमों के पालन की भी पड़ताल कर रही हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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