केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण आंतरिक खुफिया एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नए चीफ के रूप में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित की नियुक्ति की है।
यह महत्वपूर्ण निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की बैठक में लिया गया। महेश दीक्षित आगामी 1 जुलाई से आधिकारिक तौर पर अपना कार्यभार संभालेंगे।

वह वर्तमान आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे, जो 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सरकारी आदेश के अनुसार, महेश दीक्षित कम से कम अगले दो वर्षों तक इस शीर्ष पद पर बने रहेंगे। ये कार्यकाल सरकार के आदेश से आगे भी बढ़ सकता है।
25 जून को उनकी नियुक्ति के आधिकारिक निर्देश जारी होने के बाद से ही यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर वह कौन हैं, खुफिया अभियानों में उनका क्या योगदान रहा है और क्यों उन्हें इतनी संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपी गई है। आइए इन्हीं सवालों का जवाब जानते हैं…
कौन हैं महेश दीक्षित और कैसे रहा उनका सफर
महेश दीक्षित, पहले एक डॉक्टर थे, लेकिन बाद में देशसेवा के लिए उन्होंने पुलिस सेवा का रास्ता चुना। वह 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के एक बेहद सम्मानित और अनुभवी आईपीएस अधिकारी हैं।
उनके पास खुफिया मामलों को बेहद बारीकी से संभालने का, आतंकवाद विरोधी अभियानों को दिशा देने का और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर सूझ-बूझ से कौशल दिखाने का 3 दशक का लंबा अनुभव है। उन्होंने जमीनी स्तर से लेकर मुख्यालयों तक कई जगह और कई पदों पर अपनी सेवाएँ दी हैं।
दीक्षित के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक जम्मू-कश्मीर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल था। साल 2019 के अगस्त माह में जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, तब वहाँ की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति अत्यंत संवेदनशील थी। उस वक्त में और उससे ठीक पहले, महेश दीक्षित ने खुफिया मोर्चे पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने न केवल घाटी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सटीक और समय पर खुफिया जानकारियाँ जुटाईं, बल्कि विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच समन्वय स्थापित कर किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने में अपना योगदान दिया था।
The Appointments Committee of the Cabinet (ACC) has approved the appointment of Mahesh Dixit, a 1993-batch IPS officer, as the new Director of the Intelligence Bureau (IB).
— PB-SHABD (@PBSHABD) June 26, 2026
He will succeed Tapan Kumar Deka and assume charge for a term of two years or until further orders.… pic.twitter.com/3F1DWlHSJq
इसके बाद वर्ष 2023 में श्रीनगर में आयोजित जी-20 (G-20) टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक के दौरान भी सुरक्षा व्यवस्था की पूरी निगरानी महेश दीक्षित के कंधों पर थी। यह चूँकि जम्मू-कश्मीर में होने वाला एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का बड़ा आयोजन था, इसलिए इसमें की गई सुरक्षा व्यवस्था को देखने के बाद दीक्षित के कार्य की काफी सराहना हुई थी।
इसके अलावा बताया ये भी जा रहा है कि कुछ समय पहले उन्होंने ने एक बड़े ‘सफेदपोश’ आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके चलते भी वो काफी चर्चा के केंद्र में थे। उन्होंने यह कार्रवाई श्रीनगर पुलिस से मिली शुरुआती खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी।
जम्मू-कश्मीर के इस चुनौतीपूर्ण अनुभव के बाद, पिछले वर्ष उन्हें नई दिल्ली स्थित आईबी मुख्यालय में ट्रांसफर किया गया था, जहाँ उन्हें स्पेशल डायरेक्टर (विशेष निदेशक) के पद पर पदोन्नत किया गया, तभी से यह तय माना जा रहा था कि वह देश के अगले खुफिया प्रमुख हो सकते हैं।
किसकी जगह नियुक्त होंगे महेश दीक्षित
बता दें कि महेश दीक्षित, जिन तपन कुमार डेका की जगह पद को संभालेंगे वह डेका 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर हैं। उन्होंने जुलाई 2022 से लगातार आईबी का नेतृत्व किया और सरकार ने उनके बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें दो बार सेवा विस्तार भी दिया।
अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान डेका ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद पर लगाम लगाने, आतंकवाद विरोधी ग्रिड को मजबूत करने और विभिन्न राज्यों की पुलिस व केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया। अब इसी दिशा में आगे महेश दीक्षित भी अपने ढंग से काम करेंगे।
IB क्या करती है काम?
गौरतलब है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भारत की प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी है, जो देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर नजर रखती है। इसकी स्थापना 1887 में ब्रिटिश शासन के वक्त भले हुई थी, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसे भारत की केंद्रीय खुफिया एजेंसी के रूप में विकसित किया गया। आज IB, गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है और इसका नेतृत्व डायरेक्टर, इंटेलिजेंस ब्यूरो (DIB) करते हैं।
एजेंसी का मुख्य काम आतंकवाद, अलगाववाद, नक्सलवाद और अन्य सुरक्षा खतरों की जानकारी जुटाना और समय रहते सरकार को सतर्क करना है। इसके अलावा, चुनाव के वक्त, वीआईपी सुरक्षा में, बड़े आयोजनों के दौरान, साइबर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर भी IB लगातार निगरानी रखकर रिपोर्ट देने का काम करती है।


