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‘हमारा ताहिर हुसैन बेगुनाह है, अल्लाह जानता है’… अंकित शर्मा के हत्यारे के समर्थन में अब भी खड़े हैं कट्टरपंथी पड़ोसी, पढ़ें- उसके घर पहुँचे ऑपइंडिया को क्या-क्या दिखा?

फरवरी 2020 में CAA, NRC के विरोध की आड़ में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों दिल्ली के मुस्तफाबाद से शुरू होकर शिवपुरी, जाफराबाद, सीलमपुर, चांद बाग आदि दिल्ली की कई इलाकों में फैल गए थे। जिसमें 56 से अधिक लोगों ने अपनी जान गँवाई थी।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगे के करीब 6 साल बाद IB कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 लोगों को कोर्ट दोषी करार दिया है। इसके बाद मैं एक बार फिर ताहिर हुसैन की उस बड़ी सी बिल्डिंग के सामने पहुँचा जिस बिल्डिंग से दंगाइयों ने न सिर्फ हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया था बल्कि आईबी कर्मी अंकित शर्मा को मकान में खींचकर उन पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार करक उनकी हत्या कर दी गई थी। इसके बाद अंकित शर्मा के शव को पास के नाले में फेंक दिया गया था।

घटना के करीब 6 साल बाद ऑपइंडिया की टीम दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे के उसी प्रभावित क्षेत्र चांद बाग पहुँची, जहाँ अंकित शर्मा की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन का बहुमंजिला मकान बना हुआ है। हमने देखा कि 60 फुटा रोड पर लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की तरह है और बाजार पूरी तरह खुला हुआ है। सड़क के दोनों और नाले का निर्माण कार्य जारी है।

इस बीच राह चलते एक मुस्लिम से हमने कोर्ट के फैसले और दिल्ली दंगों पर बात की तो उन्होंने बताया, “मैंने वह मंजर अपनी आँखों से देखा था बाहर बहुत भीड़ थी जो कि एक-दूसरे पर पत्थरबाजी कर रही थी। मैं गली में दुकान चलाता हूँ।” ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने पर वह कहते हैं कि ये कोर्ट का निर्णय है और वह इस पर कुछ नहीं कह सकते।

एक के बाद एक मुस्लिम बोला- ‘ताहिर हुसैन को फँसाया जा रहा’

ताहिर हुसैन के सामने वाली गली में मौजूद एक दुकान पर खड़े हाफिज ने हमारे पूछने पर कहा, “घटना के समय मैं यहाँ मौजूद नहीं था लेकिन मैंने सुना है कि वह (ताहिर हुसैन) बेकसूर हैं। ताहिर हुसैन को राजनीति के तहत फँसाया गया है। शायद वह पार्षद नहीं होते तो ऐसा नहीं होता।”

नाले की समीप मौजूद मस्जिद के सामने खड़े एक मुस्लिम व्यक्ति ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि यह कानून के मुताबिक फैसला है तो सही है लेकिन यहाँ के साक्ष्य कोई मान नहीं रहा। उन्होंने कोर्ट के फैसले पर व्यंग्य करते हुए कहा, “यहाँ अगर काला पानी है तो आगे सफेद हो जाएगा और अगर आगे सफेद है आगे चलकर लाल हो जाएगा।” यानी उनका मतलब साफ था कि साक्ष्य बदले जा सकते हैं यहाँ हो कुछ रहा है और और दिखाई कुछ और जा रहा है।

हिंदू आबादी के बीच दर्जी की दुकान चला रहे मोहम्मद हनीफ नाम के एक बुजुर्ग ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि इस पर वह कुछ नहीं कह सकते उस समय वह यहाँ नहीं थे लेकिन उनकी दुकान में भी आग लगाई गई थी। उन्होंने आगे कहा, “हमें भी काफी नुकसान हुआ था लेकिन उस समय तो पुलिस की निगरानी में ही ताहिर हुसैन अपने घर से बाहर निकला था।” वह कहते हैं कि ताहिर हुसैन अंकित शर्मा की हत्या का दोषी नहीं है बल्कि वह भीड़ थी जो भी किया था उसने ही किया था।  

ऑपइंडिया की टीम ने ताहिर हुसैन के घर में क्या देखा?

इसके बाद हम ताहिर हुसैन के उस चार मंजिला मकान में पहुँचे जिसकी छत पर चढ़कर सैकड़ों दंगाइयों ने हिंदुओं को निशाना बनाया था। बाहर लगे बड़े से लोहे के गेट पर Show Effect Advertising Work के नाम से दो बोर्ड लगे हुए थे। पूछने पर पता चला कि इस बिल्डिंग में कई छोटी-मोटी फैक्ट्रियाँ चलती हैं साथ ही कई किराएदार भी यहाँ रहते हैं। गेट में प्रवेश करने के बाद हमने छत पर जाने की कोशिश की।

उसी छत पर जहाँ पुलिस को एक बड़ी गुलेल, पेट्रोल बम और बड़ी मात्रा में ईंट-पत्थर बरामद किए थे, लेकिन हमें सीढ़ियों पर चढ़ने से पहले ही इस्लाम नाम के चौकीदार ने रोक लिया और हमें ऊपर जाने से मना कर दिया। कोर्ट के फैसले पर हमारे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि कोर्ट ने ताहिर हुसैन को गलत दोषी माना है।

इस्लाम ने कहा, “वह (ताहिर) गलत काम नहीं करता। वह तो फैक्ट्री चलता था लकड़ी का काम करता था। पुलिस प्रशासन ने ताहिर को फँसाने के लिए झूठे सबूत इकट्ठा किए। उसे वर्तमान सरकार फँसा रही है। केजरीवाल ने भी ताहिर का साथ नहीं दिया बल्कि उल्टा फँसाया ही। ताहिर को फँसाने के लिए ही यहाँ ईंट-पत्थर, गुलेल, बम सब षड्यंत्र के तहत रखे गए थे। यहाँ कुछ नहीं था भीड़ जबरन इस घर में घुस गई थी और छत पर चढ़ गई थी।”

इस बीच अपनी पत्नी के साथ छत से उतर रहे मुन्ना नाम के व्यक्ति ने बताया कि ताहिर हुसैन हमारा भतीजा है। उन्होंने कहा, “हमारा ताहिर बेगुनाह है। अल्लाह सब जानता है। इसको फँसाया जा रहा है। उसने आज तक किसी के थप्पड़ भी नहीं मारा है।” इसी बात को आगे बढ़ाते हुए मुन्ना की पत्नी ने कहा कि उसने (ताहिर हुसैन) ने पहले कभी किसी मूस्टी (चूहे) को भी नहीं मारा। हमने बचपन से उसे पाला है। उसने हमेशा गरीब बेटियों की शादी कराई है।

आगे भावुक होते हुए मुन्ना की बीबी कहती है कि कल से(कोर्ट का आदेश आने के बाद) पूरा घर हो रहा है। हम किसी से कुछ कह भी नहीं सकते। बस हमारे ताहिर को इंसाफ मिलना चाहिए। हमें नहीं पता कि अंकित शर्मा को किसने मारा है।  

आपको बता दें कि फरवरी 2020 में CAA, NRC के विरोध की आड़ में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों दिल्ली के मुस्तफाबाद से शुरू होकर शिवपुरी, जाफराबाद, सीलमपुर, चांद बाग आदि दिल्ली की कई इलाकों में फैल गए थे। जिसमें 56 से अधिक लोगों ने अपनी जान गँवाई थी। इस बीच हुई IB कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में करीब 6 वर्ष बाद दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने 12 आरोपितों में से छह आरोपितों को बरी करते हुए ताहिर हुसैन सहित 5 आरोपितों को दोषी माना है और अब इस मामले में सजा का ऐलान बाकी है।

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