चाहे पाकिस्तान के पास खाने के लिए रोटी हो या न हो, पीने के लिए पानी हो या न हो या बेशक साँस लेने के लिए ऑक्सीजन ही न हो… पर ‘आतंकी मुल्क’ कभी भारत के मामलों में दखल देने से बाज नहीं आता। खुद चारों ओर से दुश्मनों से घिरा हुआ है, लेकिन पाकिस्तान को बात भारत की आंतरिक राजनीति पर करनी है। मुल्क की मीडिया की तर्जी भी भारत ही है, वह अपने देश के मुद्दों पर बोलने से ज्यादा भारत की नकारात्मक छवि बनाने में तुली रहती है। हाल फिलहाल में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन के कवरेज में भी यही हुआ।
जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के प्रदर्शन की कवरेज पाकिस्तान की मीडिया जितनी कर रही है, शायद उतनी भारत की मीडिया भी न कर पा रही हो। क्योंकि प्रदर्शन में देखा गया कि ‘कॉकरोचों’ ने अपनी मीडिया के साथ क्या बदसलूकी की। पर उसी समय पाकिस्तान की मीडिया में जब इस प्रदर्शन की वाहवाही हो रही है, भारत का नाम बदनाम किया जा रहा है, अपने मंसूबे पूरे करने के लिए मोदी को सत्ता से गिराने की साजिशें रची जा रही हैं… तब भारत की मीडिया को ‘गोदी मीडिया’ बोलने वाले इन ‘कॉकरोचों’ को शायद फर्क नहीं पड़ रहा।
गौरतलब है कि पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व छात्र देश में NEET पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर बैठे हैं, शुरुआत में उनकी प्रमुख माँग शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान का इस्तीफा थी, जो अब बढ़कर पीएम मोदी के इस्तीफे तक पहुँच गई है। इसे बड़े स्तर पर ले जाने के लिए 20 जुलाई को CJP ने संसद मार्च का आह्वान किया था, इस मार्च से ठीक पहले प्रदर्शन में वामपंथी, आंदोलनजीवी, विपक्षी दल, हिंदू-विरोधी, दलिते-हितैषी, इस्लामी कट्टरपंथी जैसे सारे चेहरे देखने को मिले थे.. इन सबमें कॉमन यह था कि ये लोग मोदी सरकार के खिलाफ थे और नतीजा यह हुआ कि संसद मार्च के दौरान इनके समर्थकों ने सीजेपी के प्रदर्शन में हिंसा फैलाई।
पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई, पत्थर फेंके गए, लाठियाँ चलाई गईं, गालियाँ बकी गईं… जिसने शायद एक ‘असल छात्र’ को निराश किया और उसका इस प्रदर्शन से विश्वास हटा दिया। और अब यही अराजक तत्व पिछले तीन दिनों से सेंट्रल दिल्ली में रोजाना हिंसा फैला रहे हैं। बुधवार (22 जुलाई 2026) देर रात को ही इन हिंसक प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों को सड़कों पर घसीटा और भीड़ में हिंसा की। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि सरकार पहले ही CJP के नेतृत्व से बातचीत कर माँगों को पूरा करने का आश्वासन दे चुकी है और अब पीएम मोदी ने भी युवाओं से फास्ट-ट्रैक बनाने का वादा किया है। बावजूद, जंतर-मंतर से भीड़ हटने का नाम नहीं ले रही।
पाकिस्तानी के प्रमुख मीडिया संस्थान CJP प्रदर्शन की रख रहे पल-पल की अपडेट
पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया संस्थानों में जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के प्रदर्शन की पल-पल की अपडेट रख रही है। मीडिया चैनलों पर लंबी-लंबी डिबेट हो रही हैं, भारत की इकोनॉमी पर बात की जा रही है… विश्लेषकों को बिठाकर प्रदर्शन के मुद्दे पर भारत की मोदी सरकार को नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है।
तीखी और आक्रामक हेडलाइन के साथ प्रदर्शन की कवरेज की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि कवरेज भी केवल एकतरफा नैरेटिव के साथ की जा रही है, जो आज देश में हर वामपंथी द्वारा गड़ा जा रहा है। केवल पुलिस का प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता, प्रदर्शन में शामिल भारी जनसंख्या, मोदी-विरोधी पोस्टर दिखाए जा रहे हैं।
नीचे इस फोटो कोलाज में DAWN की CJP प्रदर्शन की कवरेज के स्क्रीनशॉट हैं। DAWN की कवरेज में भी वही एकतरफा नैरेटिव दिखाई दे रहा है। थंबनेल, हेडलाइन और फीचर फोटो का कमाल दिखाकर पाठक को पहली नजर में ही भारत के खिलाफ करने की कोशिश की गई है।

DAWN की कुछ प्रमुख खबरों की हेडलाइंस:
- ‘कॉकरोच’ आंदोलन के विरोध-प्रदर्शनों के बाद बढ़ते दबाव के बीच, भारत के शिक्षा मंत्री ने सुधार और बहस का किया वादा (Under soaring pressure after ‘cockraoch’ movement protests, India’s education minister promises reforms, debate)
- ‘कॉकरोच’ आंदोलन से बढ़े दबाव के बीच शिक्षा मंत्री ने सुधार और व्यापक चर्चा का किया वादा (India protest give opposition a rare opening against Modi)
- “दिल्ली में संसद घेराव, प्रदर्शनकारियों ने की मोदी के इस्तीफे की माँग” (Parliament siege in delhi, Protestors Demand Modi’s Resignation)
- “क्या यह भारत की GenZ क्रांति है?” (Is this India’s GenZ revolution?)
- “मोदी सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में युवा आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार” (India’s Youth Movement Intensifies As Pressure Mounts on Modi Government)
- “खाने, आक्रोश और दूर बैठे समर्थकों के सहारे जिंदा है भारत का आंदोलन” (Food, fury and supporters and far keep India protest alive)
नीचे दिखाया गया है फोटो कोलाज भी पाकिस्तान के ही प्रमुख मीडिया संस्थान Geo News की खबरों के स्क्रीनशॉट से बनाया गया है। इनके थंबनेल, कवर फोटो और हेडलाइंस को देखें, तो ‘झुकी हुई मोदी सरकार’, ‘पुलिस का प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज’, ‘राहुल गाँधी का संघर्ष’, ‘प्रदर्शन में शामिल हुए वामपंथी’ ही दिखाई देंगे, जिससे दर्शक देखते ही यह निष्कर्ष निकालेगा कि भारत की ‘मोदी सरकार कितनी अत्याचारी’ है।

Geo News की कुछ प्रमुख खबरों की हेडलाइंस
- “भारतीय सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर किया लाठीचार्ज” (Indian Security Forces Lathicharge Protestors)
- “पूरे भारत में फैला छात्रों का विरोध-प्रदर्शन, नई दिल्ली धरना जारी” (Student Protests Spread Across India, Sit-in Continue in New Delhi)
- “जंतर-मंतर पर CJP का विरोध प्रदर्शन: मोदी सरकार पर बढ़ता तनाव” (CJP Protest at Jantar Mantar: Modi Government Faces Growing Pressure)
- “पुलिस कार्रवाई से बढ़ा गुस्सा, छात्र आंदोलन फैला; प्रदर्शनकारी पीएम मोदी के आवास तक पहुँचे” (Crackdown Ignites Anger: Student Protest Spread, Demonstrators Reach PM Modi’s Residence)
- “खाने, आक्रोश और दूर बैठे समर्थकों के सहारे जिंदा है भारत का आंदोलन” (Food, fury and supporters and far keep India protest alive)

ARY News की कुछ प्रमुख खबरों की हेडलाइंस:
- “बढ़ते तनाव के बीच मोदी सरकार पर दबाव” (Modi Govenment Under Pressure Amid Rising Tensions)
- “भारत में मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी” (Protest against Modi government continues in India)
- “भारत में युवाओं के नेतृत्व वाला आंदोलन तेज, मोदी पर बढ़ा दबाव” (India’s Youth-Led Protests intensify, Pressure Mounts on Modi)
- “भारत में युवाओं के नेतृत्व वाला ‘कॉकरोच’ आंदोलन पुलिस की सख्ती के बावजूद जारी” (India’s Youth-Led Cockroach Movement Defies Police Crackdown)
- “भारत का युवा आंदोलन पकड़ रहा रफ्तार, राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी” (Indian Youth Movement Gains Momentum, Political Unrest Intensifies)
सिर्फ यही कुछ प्रमुख संस्थान नहीं, बल्कि पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया और यूट्यूब चैनल भी भारत के CJP प्रदर्शन पर नजरें गढ़ाए बैठे हैं। ये मीडिया बड़ी-बड़ी डिबेट कर घंटों-घंटों तक CJP प्रदर्शन पर बात कर रही है। पैनलिस्ट में भी कोई आम आदमी नहीं बैठा है, बल्कि देश के पूर्व राजनयिक से लेकर बड़े-बड़े प्रोफेसर तक भारत के खिलाफ बोलने के लिए अपना समय दे रहे हैं।

पाकिस्तानी मीडिया में CJP प्रदर्शन की कवरेज के मायने
पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भारत में चल रहे CJP प्रदर्शन की कवरेज को प्राइम टाइम में जगह दी है। इससे साफ है कि उनके लिए पाकिस्तान की मीडिया भारत की आंतिरक राजनीति में खूब दखल देती है। इन कवरेज में यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की गई है कि ‘कॉकरोचों’ के आंदोलन के दबाव में भारत की मोदी सरकार झुकने को तैयार हो गई है, जबकि ऐसा नहीं हुआ है। सरकार ने ‘असल छात्रों’ की माँगों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया है। और यह वही नैरेटिव है जो 20 जुलाई को भी गढ़ा गया था, जब CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका केंद्रीय मंत्री जेपी नेड्डा से मिलने पहुँचे थे।
मीडिया ने हेडलाइन का खेल करते हुए ही मोदी सरकार को इस छात्र आंदोलन का विलेन करार दिया है, जबकि सरकार ने हमेशा समाधान की बात की है। NEET पेपर लीक के बाद तुरंत RE-NEET की घोषणा कराई गई, और अब इस परीक्षा के रिजल्ट में साफ झलक रहा है कि असल छात्र दोबारा बिना गड़बड़ी के हुई NEET परीक्षा से खुश हैं, जबकि वामपंथी और विपक्षी दलों के विचारधारा से भड़के हुए छात्र के चेहरे में छिपे अराजक तत्व अब भी जंतर-मंतर पर ‘हिंसा के लिए उतारू’ हैं।
यह भी साफ हो गया है कि भारत में छोटे-से उथल-पुथल से पाकिस्तान कितना खुश हो रहा है। डिबेटों में भारक की इकोनॉमी पर चिंता जताई जा रही है, शिक्षा व्यवस्था पर बहसें हो रही हैं, पुलिस की प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता पर संवेदनाएँ जताई जा रही हैं, भारत में बेरोजगारी की बातें हो रही हैं, और तो और यह बात तक हो रही है कि पीएम मोदी इसीलिए धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से नहीं हटा रहे हैं, क्योंकि ऐसा करने पर वे चुनाव हार जाएँगे।
निष्कर्ष: ‘कंगाल’ पाकिस्तान बना भारत का ‘हमदर्द’
असल विडंबना यह है कि जो पाकिस्तान की मीडिया भारत में एक छात्र आंदोलन पर घंटों को प्राइम टाइम में जगह दे रहा है, वही खुद अपने घर में नहीं झाँक रहा है। जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले महीने से जारी प्रदर्शनों में दर्जनों नागरिकों को शहबाज सरकार की पुलिस गोलियों से भून देती है, तब इस मीडिया के लिए वो डिबेट का विषय नहीं बनती।
पूरी दुनिया जानती है कि अब PoK में प्रदर्शनों में 58 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1460 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है या वे लापता हैं। जो पाकिस्तानी मीडिया भारत के लिए एकतरफा खबरें चलाते हुए सिर्फ पुलिस का लाठीचार्ज को ‘अत्याचार’ बनाकर दिखाती है, उस मुल्क को PoK में प्रदर्शनकारियों पर तरस नहीं आता है क्या?
आर्थिक हालत की बात करें तो पाकिस्तान की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। देश में करीब 40 प्रतिशत आबादी गरीबी में जी रही है, आर्थिक वृद्धि दर महज 3 प्रतिशत के आसपास सिमटी हुई है और लदभग एक तिहाई- बच्चे कुपोषण के चलते शारीरिक विकास में पिछड़ रहे हैं। यह वही मुल्क है जो 1958 से अब तक IMF से 24वां बेलआउट ले चुका है और कर्जों के चक्र से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं ढूँढ पा रहा है।
इस साल भी पाकिस्तान ने विदेशी कर्ज और रोलओवर के जरिए करीब 27.2 अरब डॉलर जुटाए, जिसमें से ज्यादातर हिस्सा नए कर्ज चुकाने में ही खप गया। यानी जो देश खुद अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा, वह भारत को आर्थिक नसीहत देने में जुटा है।
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान में खूब शांति है, मुल्क की शहबाज सरकार के खिलाफ चारों ओर प्रदर्शन और विद्रोह जारी है। एक तरफ बलूचिस्तान में BLA लड़ाकों का उभार, दूसरी तरफ TTP के हमले, तीसरी तरफ PoK में जनता का गुस्सा, और अब विपक्ष भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। पर मीडिया यह दिखाने से परहेज करता है, क्योंकि असल में अपनी भीतर की आग से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत को निशाना बनाता है।
वही मीडिया भारत में एक प्रदर्शन को ‘जनक्रांति’ बताने वाली पाकिस्तानी मीडिया अपने घर में उठ रही आवाजों को ‘देशद्रोही’ करार देकर कुचल देती है। यही दोहरा रवैया पाकिस्तान की असली पहचान है।
कुल मिलाकर, जो मुल्क खुद रोटी, पानी और आर्थिक स्थिरता के लिए मोहताज है, वह भारत का ‘हमदर्द’ बनने का स्वाँग रचकर असल में अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक प्रदर्शन सरकार से बातचीत और सुधार तक पहुँच जाता है, जबकि पाकिस्तान में वही आवाजें गोलियों और गिरफ्तारियों में दब जाती हैं। यही फर्क है भारत और पाकिस्तान की सच्चाई में।


