पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी और इस मुद्दे को लेकर आमरण अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की माँग क्या अलग अलग हो गई है। ये हम नहीं कर रहे, बल्कि जंतर मंतर पर अभी भी डेरा जमाए कॉकरोच जनता पार्टी के बयान और गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक के खुले पत्र से पता चलता है।
क्या है सोनम वांगचुक के खुले पत्र में
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर सोनम वांगचुक ने अपने खुले पत्र में सरकार से माँग की है कि पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई न की जाए, उनके खिलाफ दायर एफआईआर वापस ले ली जाए। नीट यूजी 2026 पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिजनों को मुआवजा दी जाए।
AN APPEAL TO THE GOVERNMENT
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 22, 2026
regarding breaking my fast…
Once the assurance from govt come I will also appeal to the peacefully protesting students to halt the movement for now and enter into dialogue with the government pic.twitter.com/gR6S8woF5R
पेपर लीक करने के मुद्दे पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा करना, अगर इन मुद्दों पर सरकार तैयार हो जाती है तो वे अनशन तोड़ने के लिए तैयार हैं यानी उनकी माँगों में कही भी शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर जोर नहीं है, जबकि सीजेपी का कहना है कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से कम हमें कुछ नहीं चाहिए और वार्ता जंतर मंतर या किसी ‘न्यूट्र्ल जगह’ पर होनी चाहिए। इसी पर सरकार से वार्ता भी अटकी हुई है।
सीजेपी ने क्या माँग रखी है
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके धमकी भरे लहजे में कहते हैं, “मोदी जी, मैं एक बार फिर आपसे रिक्वेस्ट करता हूँ कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करें। नहीं तो, मामला सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक ही सीमित नहीं रहेगा, यह आपके इस्तीफे तक भी आएगा… याद रखें: भारत में कोई भी आपको चुनाव में वोट नहीं देगा…।” साफ है कि उनकी माँग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से शुरू होती है।

लेकिन सरकार सीजेपी के जंतर मंतर पर बातचीत करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफा वाली माँग को मानने वाली नहीं है। हालाँकि सरकार लगातार प्रदर्शनकारी कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं से बातचीत की अपील करती रही है। सरकार की तरफ से छात्रों और सोनम वांगचुक से बातचीत की अगुवाई करने वाले केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने विनम्र निवेदन की है कि वार्ता के मेज पर ही समाधान निकाला जा सकता है। सरकार हर वक्त सभी मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। सरकार की तरफ से कोई ‘पूर्व शर्त’ भी नहीं रखी गई है।
धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर वांगचुक और सीजेपी एकमत नहीं
ये तो हुई सरकार की बात, लेकिन क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफा के मुद्दे पर सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच मतभेद हो गया है। सोनम वांगचुक से लगातार दोनों केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह अस्पताल जाकर वार्ता कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वांगचुक जल्दी ही अपना अनशन तोड़ देंगे।
अगर वांगचुक भूख हड़ताल खत्म करते हैं तो छात्र आंदोलन का चेहरा कौन होगा? आखिर वांगचुक का चेहरा ही इस आंदोलन में सेलिब्रिटी को जोड़ने का जरिया रहा है। सोशल मीडिया पर भी वांगचुक के भूख हड़ताल पर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखी गई। वांगचुक के अस्पताल जाते ही यह मंच पर कई चेहरे दिखने लगे।
निंहगों से लेकर योगेन्द्र यादव तक अपने अपने तरह से आंदोलन में कूदते नजर आए। संसद मार्च के दौरान हुआ हुडदंग और हिंसा भी इस आंदोलन का चेहरा बन गया। ऐसे में वांगचुक की भूख हड़ताल के खत्म होते ही इस आंदोलन के दिशाहीन होने की आशंका है।
छात्र आंदोलन के नेतृत्व को हाईजैक करने की कोशिश तो विपक्षी राजनीतिक पार्टियाँ भी कर रही है। इसी तरफ एक कदम आगे बढ़ते हुए लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी पीएम आवास के सामने धरना पर बैठ गए और अपनी माँगों को बदलते रहे। पहले उन्होंने संसद में चर्चा कराने की माँग रखी, जिसे सरकार के नुमाइंदे केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने तुरंत मान लिया। लेकिन तुरंत उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का मुद्दा जोड़ दिया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहे विपक्ष ने मानसून सत्र का पहला हफ्ता बर्बाद कर दिया। शिक्षा मंत्री पहले इस्तीफा दें, तब सदन में पेपर लीक पर चर्चा होगी। विपक्ष इस पर अड़ा हुआ है, वही सरकार पेपर लीक समेत हर मुद्दे पर सदन में पहले चर्चा करना चाहती है।


