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जौहर यूनिवर्सिटी के फायदे के लिए बना ₹150 करोड़ का फ्लाईओवर, आजम खान ने कौड़ियों के भाव जमीनें हड़पीं: रामपुर के ग्रामीणों ने ऑपइंडिया से बयां किया दर्द, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

रामपुर में व्यक्तिगत लाभ के लिए आजम खान ने कराया था ₹150 करोड़ से फ्लाइओवर का निर्माण, कौड़ियों के भाव जमीन हड़पने का आरोप: पीड़ित बोले- RTO की वसूली का 40% हिस्सा जाता था जौहर यूनिवर्सिटी।

रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को अवैध बताए जाने के बाद आजम खान की चर्चा एक बार फिर लोगों की जुबान पर है। आजम खान पर सपा सरकार में मंत्री रहते हुए सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। इनमें एक आरोप है कि आजम खान ने व्यक्तिगत लाभ के लिए जौहर यूनिवर्सिटी तक करीब ₹150 करोड़ की लागत से फ्लावर का निर्माण कराया था।  

यहाँ तक कि इसके लिए गाँव की गरीब किसानों और मजदूरों से आजम खान ने कम दामों में जमीन लेकर उनसे जबरन रजिस्ट्री कराईं थीं। इसी की सच्चाई जानने के लिए ऑपइंडिया के रिपोर्टर केशव मालान रामपुर के उस एकता तिराहे पर पहुँचे, जहाँ से शुरू हुआ 5 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर जौहर यूनिवर्सिटी के पिछले गेट पर जाकर समाप्त होता है। इसी एकता तिराहे से कुछ दूरी पर ही आजम खान का शहर में अपना पैतृक मकान है। यह बात अलग है कि इसी पैतृक मकान के सामने बनी रामपुर की जेल में वह कई वर्षों से बंद है।

बहरहाल, हम फ्लाईओवर से जौहर यूनिवर्सिटी तक पहुँचे। इस बीच हमने देखा कि फ्लाईओवर के दोनों और घने जंगल है और आम के बाग हैं, जिसे देखकर लगता है कि फ्लाइओवर के निर्माण के लिए हजारों बड़े पेड़ों को काटकर लाखों छोटे पेड़ों को कुचला गया होगा। रामपुर की व्यस्त सड़कों के उलट इस फ्लाईओवर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। हैरानी इस बात की है कि यह फ्लाइओवर न तो किसी रेलवे लाइन को क्रॉस करता है न किसी नदी-नाले को और ना ही किसी सिक्स लाइन-फोर लाइन हाईवे या फिर ये किसी 2 लाइन रोड को भी क्रॉस नहीं करता।

यह फ्लाईओवर किसी बड़ी सड़क, गाँव या शहर को भी नहीं जोड़ता और न ही यह फ्लाईओवर रामपुर शहर के किसी ट्रैफिक को कंट्रोल करता है। इसके नीचे से सिर्फ दो छोटे लिंक रोड क्रॉस करते हैं, जो उन गाँवों को जाते हैं, जिन गाँवों के लोगों ने इस फ्लाईओवर के लिए आजम खान को अपनी जमीन दी थी। फ्लाईओवर पर खड़े एक व्यक्ति ने बताया कि इस फ्लाईओवर पर वाहनों की कोई भीड़ नहीं रहती है, बस यूनिवर्सिटी वाले छात्र ही यहाँ से होकर जाते हैं। इससे ज्यादातर लोगों को कोई फायदा नहीं है।

कौड़ियों के भाव ले ली हमारी जमीन: ग्रामीण

फ्लाइओवर से नीचे उतरने के बाद गाँव से पहले एक आम के बाग में काम कर रही कुछ महिलाओं से जब हमने आजम खान के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा हम उन्हें जानते तो हैं, लेकिन उन्हें कभी देखा नहीं है क्योंकि वह हमारे गाँव कभी नहीं आए। कमलेश नाम की महिला ने बताया कि हमारे पास सिर्फ चार बीघा ही जमीन थी। उसमें भी होकर पुल का निर्माण हो गया। अब वह किसी काम के लायक नहीं है। हमारी कीमती जमीन को कौड़ियों के भाव ले लिया गया। उन्होंने कहा कि हम अपनी जमीन नहीं देना चाहते थे, लेकिन हम गरीब लोग हैं। आखिर क्या करते?

उसी बाग में काम कर रहे भगवान दास बताते हैं कि इस पुल को जबरन बनाया गया था। हमने मजबूरी में अपनी जमीन दी। नहीं तो वह (आजम खान) हमें जेल में बंद करवा देते। उनसे फ्लाईओवर के निकलने से लाभ के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इस फ्लाईओवर से हमें कोई लाभ नहीं हुआ। अगर फ्लाईओवर की जगह नीचे से रोड़ बनाया गया होता तो शायद हमारे गाँव, क्षेत्र का विकास होता और हमें वहाँ पर मकान, दुकान या फिर कोई व्यवसाय करने का मौका मिलता, लेकिन सच्चाई यही है कि आजम खान ने इसे सिर्फ अपने लाभ के लिए बनवाया था।

वह आगे कहते हैं कि उस समय आजम खान का लठ्ठ (दबदबा) चल रहा था, लेकिन अब उनकी दादागिरी बंद हो गई। उन्होंने जैसा किया वैसा ही वह भुगत रहे हैं। कुछ लोगों ने ऑफ कैमरा हमें बताया कि आजम खान ने इस फ्लाईओवर का निर्माण सिर्फ इसलिए कराया था, ताकि वह अपने घर से निकलकर बिना किसी जाम में फंसे सीधे ‘अपनी’ यूनिवर्सिटी तक पहुँच सकें।

जबरन कराई गई थी रजिस्ट्री: पीड़ित ग्रामीण

ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट टीम इस पुल के नीचे मौजूद किशनपुर गाँव पहुँची। फ्लाईओवर बनने से लाभ के बारे में पूछने पर दिनेश नाम के व्यक्ति कहते हैं कि हमारी जमीन तो इसमें नहीं गई, लेकिन इस फ्लाईओवर के बगल में हमारा मकान है। इसके बनने से हमें आज तक कोई लाभ नहीं हुआ बल्कि नुकसान ही हुआ है। नीचे रोड बनता तो शायद हमें कुछ इसका लाभ मिलता।

ग्रामीणों के मुताबिक, उस समय लोगों से कहा गया था कि पुल के नीचे भी रोड बनेगा, जिससे ग्रामीण खुश थे लेकिन आज तक ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने यह बहुत गलत काम किया। इस बीच घूँघट लगाकर रास्ते से गुजर रहीं दो महिलाओं ने भी इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उन्होंने कोई अच्छा काम नहीं किया।

गाँव के ही उम्मेद सिंह बताते हैं कि हमारी जमीन फ्लाईओवर के निर्माण में गई थी, लेकिन इससे हमें कोई लाभ नहीं मिला। हमसे जबरन रजिस्ट्री कराई गई थी। उन्होंने कहा कि कानूनगो और तहसीलदार घर पर आ गए थे। इसके बाद हमें रजिस्ट्री ‘करनी’ पड़ी। स्कूल को आजम खान ने अपनी यूनिवर्सिटी के लिए बनवाया था और इसमें निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया।

उम्मेद सिंह कहते हैं कि मैं उस समय ऑटो चलाता था। आरटीओ में मौजूद एक यादव समाज के अधिकारी हमसे मोटी रकम वसूलते थे। पूछने पर रहते थे कि इसका 40% पैसा हिस्सा जौहर यूनिवर्सिटी को जाता है। यह सब आजम खान के इशारे पर होता था। आजम खान ने सपा सरकार में हमारे ऊपर बहुत जुल्म किए हैं और हमेशा ही रामपुर की जनता को सताया है, लेकिन आज उनको किए की सजा मिल रही है। योगी सरकार में सभी सही काम हो रहा है।  

आपको बता दें कि रामपुर के जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े इस 5 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण साल 2013-14 में करीब ₹150 करोड़ की लागत से कराया गया था। ये फ्लाईओवर अपने निर्माण के समय से ही विवादों के घेरे में है। लोगों का साफ कहना है कि ये फ्लाईओवर सिर्फ और सिर्फ आजम खान की खुदगर्जी की वजह से बना, जिसका फायदा स्थानीय लोगों को शायद ही हुआ हो। उन्हें तो सिर्फ नुकसान हुआ, क्योंकि उनकी जमीनें भी कौड़ियों के दाम ले ली गई और उन्हें इसके इस्तेमाल का कुछ खास फायदा भी नहीं है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भी सिर्फ यूनिवर्सिटी आने-जाने के लिए ही होता है।

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