Homeदेश-समाज'गुटखा खाना गलत बात': हाथों में तख्ती लेकर फिर मैच देखने पहुँचा 'कानपुर का...

‘गुटखा खाना गलत बात’: हाथों में तख्ती लेकर फिर मैच देखने पहुँचा ‘कानपुर का गुटखेबाज’, कहा – अब छोड़ दूँगा ये लत

इस बार शोभित ने अपने हाथ में एक तख्ती ले रखी थी। उस तख्ती पर लिखा था, "गुटका खाना गलत बात है #कानपुर गुटकेबाज।" शोभित पांडेय का कहना है कि वो और उसका दोस्त दोनों ही मैच देखने के लिए गए थे, लेकिन दोनों एक दूसरे काफी दूर थे, इसीलिए फोन पर बात की।

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित ग्रीनपार्क स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीचे खेले जा रहे टेस्ट मैच के दौरान गुटखा खाते हुए एक शख्स की इमेज वायरल हुई थी। इसे सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया। लोगों ने इस पर कमेंट कर खूब मजे लिए थे। अब वही शख्स शोभित मैच के दूसरे दिन हाथों में गुटखा खाना गंदी बात का पोस्टर लेकर मैच देखने पहुँचा।

रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को इमेज के वायरल होने के बाद फिर से क्रिकेट देखने पहुँचे शोभित ने खुद को क्रिकेट फैन बताया। उन्होंने ये भी कहा कि वो क्रिकेट देखने के लिए जाते रहेंगे। शोभित पांडेय पेशे से एक व्यापारी हैं। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए गुटखा खाने की बात से इनकार किया। शोभित का कहना था कि मैच देखने के लिए जाते वक्त एँट्री गेट पर ही गुटखा जमा करा लिया गया था। शोभित के मुताबिक, उन्होंने मीठी सुपारी खाई थी।

साभार: एएनआई

बहरहाल, इस बार शोभित ने अपने हाथ में एक तख्ती ले रखी थी। उस तख्ती पर लिखा था, “गुटका खाना गलत बात है #कानपुर गुटकेबाज।” शोभित पांडेय का कहना है कि वो और उसका दोस्त दोनों ही मैच देखने के लिए गए थे, लेकिन दोनों एक दूसरे काफी दूर थे, इसीलिए फोन पर बात की। शोभित पांडे का कहना है कि जल्द ही वो गुटखा खाना छोड़ देंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले शोभित ने उसके बगल में बैठी लड़की को अपनी बहन बताया था। साथ ही उसके खिलाफ सोशल मीडिया पर किए जा रहे अश्लील कमेंट पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उसने लोगों ने अपनी बहन को लेकर भद्दे कमेंट नहीं करने की भी अपील की थी। वहीं मामले में किसी भी तरह की माफी माँगने के सवाल पर शोभित ने कहा था, “माफी माँगने लायक तो मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है, फिर भी लोगों को लगता है कि मैंने कुछ गलत किया है तो मैं माफी माँगता हूँ।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कामाख्या मंदिर में 22 जून से ऐतिहासिक अंबुबाची मेला, 3 दिन बंद रहेंगे गर्भगृह के कपाट-माँ करती हैं विश्राम: जानें- स्त्री शक्ति, सृजन और...

अंबुबाची मेला हर साल असम के माँ कामाख्या मंदिर में आयोजित किया जाता है। इसे पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है।

एल्गोरिदम के बँधुआ मजदूर… ‘अटेंशन इकॉनमी’ का डिजिटल सर्वहारा

जब मृत शरीर भी वायरल कंटेंट बन जाए, तब सवाल केवल संवेदनशीलता का नहीं बल्कि पूरे डिजिटल कल्चर के पतन का होता है।
- विज्ञापन -