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विभाग संभालें या मंत्री पद छोड़ दें: कैप्टन के फरमान से बैट्समैन सिद्धू के राजनीतिक विकल्प लगभग खत्म

राहुल गाँधी ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि कैप्टन को अपनी मर्जी से सरकार चलाने का अधिकार है और मंत्रिमंडल में फेरबदल का भी उन्हें विशेषाधिकार है। इसके बाद सिद्धू के लिए...

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तनाव नए मुकाम तक पहुँच गया है। कैप्‍टन और नवजोत सिंह सिद्धू की तकरार घटने के बजाए और बढ़ गई है। कैप्‍टन अमरिंदर का सिद्धू को लेकर रुख आक्रामक हो गया है। राज्य के नए बिजली मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को नया विभाग मिले हुए 24 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने अपना विभाग नहीं संभाला है। 24 दिन बाद भी कार्यभार नहीं संभालने के कारण सिद्धू का मंत्री पद खतरे में है। 

जानकारी के मुताबिक, अगर अगले कुछ दिनों में सिद्धू ने अपना मंत्रालय नहीं संभाला तो मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह उन पर एक्शन ले सकते हैं। इस मसले पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार (जून 29, 2019) को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ लीडर अहमद पटेल से मुलाकात की। बता दें कि अहमद पटेल को अमरिंदर और सिद्धू के बीच मतभेद दूर कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस मुलाकात के दौरान अमरिंदर ने साफ कर दिया कि वो सिद्धू का विभाग बदले जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई इरादा नहीं रखते। ऐसे में अब सिद्धू के लिए दो ही रास्ते बचे हैं- या तो वो नए विभाग का कार्यभार संभाल लें या फिर मंत्री पद छोड़ दें।

वहीं खबर ये भी है कि इस बारे में राहुल गाँधी ने भी ये साफ कर दिया है कि कैप्टन को अपनी मर्जी से सरकार चलाने का अधिकार है और मंत्रिमंडल में फेरबदल का भी उन्हें विशेषाधिकार है। गौरतलब है कि 6 जून को पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने कैबिनेट में फेर बदल किया था। इस दौरान कैप्टन अमरिंदर ने नवजोत सिंह सिद्धू से शहरी निकाय मंत्रालय विभाग वापस ले लिया था और उन्हें ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार सौंपा था। जिससे सिद्धू नाराज थे और उनकी नाराजगी अभी तक जारी है। इस बीच बिजली मंत्री के अभाव में बिजली सप्लाई पर असर पड़ा है। नए बिजली मंत्री सिद्धू की गैरहाजिरी में सीएम अमरिंदर खुद बिजली विभाग के अधिकारियों की मीटिंग ले रहे हैं और उन्हें लगातार निर्देश दे रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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